उनके वादे कल के हैं ( ग़ज़ल ) : डॉ. बालस्वरूप राही
उनके वादे कल के हैं ( ग़ज़ल ) : डॉ. बालसरूप राही उनके वादे कल के हैंहम मेहमाँ दो पल के हैं । कहने को दो पलके हैंकितने सागर छलके…
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उनके वादे कल के हैं ( ग़ज़ल ) : डॉ. बालसरूप राही उनके वादे कल के हैंहम मेहमाँ दो पल के हैं । कहने को दो पलके हैंकितने सागर छलके…
ज्ञान – ध्यान कुछ काम न आए ( ग़ज़ल ) : डॉ. बालस्वरूप ‘राही’ ज्ञान ध्यान कुछ काम न आएहम तो जीवन-भर अकुलाए । पथ निहारते दृग पथराएहर आहट पर…