रविंद्र भवन में प्रवासी भारतीय लेखकों से संवाद कार्यक्रम संपन्न

अंतरराष्ट्रीय सहयोग परिषद एवं वैश्विक हिंदी परिवार के संयुक्त तत्वावधान में “संवाद (प्रवासी भारतीय लेखकों से)” शीर्षक से एक साहित्यिक संवाद कार्यक्रम का आयोजन शनिवार, 7 फरवरी 2026 को अपराह्न 3 बजे रविंद्र भवन, मंडी हाउस, नई दिल्ली में किया गया। कार्यक्रम में देश-विदेश से जुड़े प्रतिष्ठित साहित्यकारों, शिक्षाविदों एवं हिंदी सेवी संस्थाओं के प्रतिनिधियों की गरिमामयी उपस्थिति रही।
कार्यक्रम का शुभारंभ कार्यक्रम संचालक ऋषि कुमार शर्मा द्वारा रूपरेखा प्रस्तुत करने एवं अतिथियों के परिचय के साथ हुआ। इसके पश्चात संस्था एवं कार्यक्रम की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए जीतेन्द्र वीर कालरा ने वैश्विक हिंदी परिवार के कार्यों और उद्देश्यों से श्रोताओं को अवगत कराया।
स्वागत उद्बोधन में अंतरराष्ट्रीय सहयोग परिषद के निदेशक श्री नारायण कुमार ने हिंदी के वैश्विक विस्तार में प्रवासी लेखकों की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि प्रवासी साहित्यकारों का सृजन हिंदी को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने में महत्त्वपूर्ण योगदान दे रहा है।
कवयित्री एवं शिक्षाविद डॉ. अनीता वर्मा ने वैश्विक हिंदी परिवार की अंतरराष्ट्रीय संयोजिका डॉ. शैलजा सक्सेना के व्यक्तित्व और कृतित्व पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने वैश्विक हिंदी डॉट कॉम पर उनकी रचनात्मक सक्रियता का उल्लेख करते हुए अपनी चर्चित कविता “तमकमा उठती है” का पाठ किया।
सुप्रसिद्ध साहित्यकार श्री नरेश शांडिल्य ने साहित्य की सामाजिक आवश्यकता पर बल देते हुए वैश्विक हिंदी परिवार की निरंतर प्रगति की सराहना की तथा डॉ. अजय त्रिपाठी के साहित्यिक योगदान को रेखांकित किया। लेखिका डॉ. अलका सिन्हा ने अक्षरम के संदर्भ में चर्चा करते हुए डॉ. अजय त्रिपाठी की कविताओं एवं ग़ज़लों तथा डॉ. शैलजा सक्सेना की रचनात्मक यात्रा पर प्रकाश डाला।
ब्रिटेन से आए सुप्रसिद्ध ग़ज़लकार डॉ. अजय त्रिपाठी ने अपनी चर्चित कविताओं और ग़ज़लों का पाठ किया, जिनमें “मैं अपने नाम से डरने लगा हूँ”, “सोच समझ कर बोलो तुम अल्फ़ाज़ यहाँ” और “है दुनिया की रानी दिल्ली” सहित अनेक रचनाएँ शामिल रहीं, जिन्हें श्रोताओं ने खूब सराहा।
कनाडा की प्रख्यात प्रवासी लेखिका डॉ. शैलजा सक्सेना ने प्रवासी साहित्य के विविध आयामों पर प्रकाश डालते हुए अपने साहित्यिक कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने “लेबनान की एक रात” सहित अपनी कहानियों और कविताओं का पाठ किया। उन्होंने बताया कि हिंदी राइटर गिल्ड को 18 वर्ष पूरे हो चुके हैं तथा प्रवासी लेखकों द्वारा निरंतर साहित्य सृजन किया जा रहा है।
दोनों साहित्यकारों से प्रश्नोत्तर सत्र के बाद मुख्य अतिथि, साहित्य अकादमी के संपादक (हिंदी) श्री कुमार अनुपम ने कहा कि “प्रवासी लेखक भारत से गए नहीं, बल्कि भारत को अपने साथ लेकर गए हैं। संस्थागत प्रयासों से हिंदी को वैश्विक विस्तार मिला है।”
वैश्विक हिंदी परिवार के अध्यक्ष श्री अनिल जोशी के सानिध्य उद्बोधन के पश्चात संयोजक मनोज कुमार श्रीवास्तव ‘आनाम’ द्वारा औपचारिक धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम का समापन सौहार्दपूर्ण वातावरण में हुआ।

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