Category: भारत

आज के दिन विभूति विशेष के नाम : हनुमान प्रसाद पोद्दार – (दिन विशेष)

आज के दिन विभूति विशेष के नाम : हनुमान प्रसाद पोद्दार – डॉ जयशंकर यादव 22 मार्च 1971 स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और आध्यात्मिक विभूति हनुमान प्रसाद पोद्दार का निधन। उन्होंने…

मराठी-फारसी राज्य व्यवहार कोश की संक्षिप्त जानकारी – (लेख)

मराठी-फारसी राज्य व्यवहार कोश की संक्षिप्त जानकारी ~विजय नगरकर, अहिल्यानगर, महाराष्ट्र छत्रपति शिवाजी महाराज ने राज्य व्यवहार कोश मराठी में जारी किया था। इसके पीछे का इतिहास इस प्रकार है:…

यूक्रेन रूस युद्ध में भाषा विवाद का बारूद – (विचार स्तंभ)

यूक्रेन रूस युद्ध में भाषा विवाद का बारूद ~ विजय नगरकर यूक्रेन और रूस के बीच चल रहे संघर्ष में भाषा विवाद एक महत्वपूर्ण और जटिल पहलू है, जो दोनों…

नीदरलैंड में भारत प्रेम – (संस्मरण)

नीदरलैंड में भारत प्रेम – प्रो. दिनेश प्रसाद सकलानी मुझे मार्च 2005 में नीदरलैंड (हॉलैण्‍ड) जाने का अवसर मिला। मेरी नीदरलैंड यात्रा के विचार का शुभारंभ जून 2004 में फ्री…

महात्मा गांधी और हिंदी – (विचार स्तंभ)

महात्मा गांधी और हिंदी – अतुल कुमार प्रभाकर अंग्रेजों ने भारत में अपनी पैठ बनाने के लिए हिंदुओं की पीठ पर हाथ रखा और कहा कि मुसलमान तो बाहर से…

वर्णमाला में वर्ण नहीं हैं – (विचार-स्तम्भ)

वर्णमाला में वर्ण नहीं हैं – डॉ अशोक बत्रा उस दिन की बात है। कक्षा 9 से 12 तक पढ़ाने वाले अध्यापकों का प्रशिक्षण चल रहा था। मैंने पूछ लिया…

शाहीर योगेश – मराठी और हिंदी शाहिरी कला का एक अमूल्य नायक – (आलेख)

शाहीर योगेश – मराठी और हिंदी शाहिरी कला का एक अमूल्य नायक ~ विजय नगरकर देश धरम पर मिटने वाला।शेर शिवा का छावा था।।महापराक्रमी परम प्रतापी।एक ही शंभू राजा था।।…

संवाद – (कविता)

संवाद प्रभु ने कहाकरते हो विश्वासरखते हो श्रद्धा अपारचढ़ाते हो पुष्प नितसम्पत्ति भी हो उदारनियमित संकल्प साधभूल कर सब ऋतु प्रहारबोलो किस आशा सेरहे तुम पथ बुहारबोलो वत्स!निर्मल सेवाओं कापाया…

स्व-पथ चुनना है – (कविता)

स्व-पथ चुनना है जब-जब प्रहार हुएकठोरतर होता रहाऔरअन्दर का पहाड़दरकता रहाभीत सम प्रतिपल। जब-जब फुहार पड़ी नमसंकुचित होता रहाऔरअन्दर का लावापिघलता रहामोम सम प्रतिपल।प्रहार और फुहारदोनों लिए नवजीवन अंशरीते घट…

आत्ममंथन – (कविता)

आत्ममंथन देव पथ पर मनुज बनने को चला पशुडर गया क्यों आज उन अभिवादनों सेजो देते थे सुखद अनुभूति पहलेक्यों असंभव हो रहा स्वीकार करनाआज निज वंदनजो भरते थे हृदय…

चलो… मेरे पुनर्जन्म तक – (कविता)

चलो… मेरे पुनर्जन्म तक तुमने मारा है मेरे अन्तर-पशु कोडुबा कर अनन्त में बहुत गहरेबांध कर द्रवित दृगों मेंलगाकर पलकों के पहरे…तुमने मारा है मेरे अन्तर-पशु को।तुमने किया है, प्रिय!अकस्मात…

मोम के देवता – (कविता)

मोम के देवता पत्थर कठोर होता हैवह देवता होता हैऔरयुगों तक देवत्व को जीता है। संवेदनाहीन!इसीलिए वहस्मित मुख धारण करता हैऔरयुगों तकनिश्कलंकित रहता है।संज्ञा शून्य!इसीलिए वहविष-अमृत ग्रहण करता हैऔरयुगों तकअमरत्व…

राजभाषा हिंदी प्रचार प्रसार में एण्ड्राइड मोबाइल की भूमिका

राजभाषा हिंदी प्रचार प्रसार में एण्ड्राइड मोबाइल की भूमिका – विजय प्रभाकर नगरकर आधुनिक तकनीकी विकास के साथ भाषा का विस्तार भी धीरे धीरे बढ़ रहा है। । सूचना प्रौद्योगिकी…

दीर्घ सन्धि की कहानी – (कविता)

दीर्घ सन्धि की कहानी आगे-आगे थी विद्यापीछे-पीछे था आलयदोनों अपनी अपनी साइकिल चला रहे थेपर आलय का अगड़ा आऔर विद्या का पिछला आकोई गुल खिला रहे थेविद्या का आ बोला…

76 वाँ गणतंत्र – (कविता)

76 वाँ गणतंत्र मेरा देश वह साइकिल हैजिसे 540 गण चला रहे हैं300 चला रहे हैं दिन रात पैडलबाकी मिलकर ब्रेक लगा रहे हैं। कोई दाहिनी ब्रेक तो कोई वामकोई…

संज्ञा बोली सर्वनाम से – (कविता)

संज्ञा बोली सर्वनाम से न जाने क्योंसंज्ञा और सर्वनाम मेंतकरार हो गईसर्वनाम बना हुआ था ढालऔर संज्ञा तलवार हो गई! वो सर्वनाम से बोली —अरे मेरे चाकर!मेरे आश्रित!मेरे पालतू!और फालतू!मेरी…

उपसर्ग और शब्द – (कविता)

उपसर्ग और शब्द हम भगतसिंह हैं, आज़ाद हैंहम करोड़ों नहींदस बीस होते हैमाना कि हम कटे हुए शीश होते हैंहम कौम के लिए उत्सर्ग होते हैंहम शब्द नहीं, उपसर्ग होते…

उक्ति के बहाने से – (कविता)

उक्ति के बहाने से कुछ भी कहावो वाक्य हैअपना मत रखातो कथन हैकथन की ओर उँगलीउक्ति हैसारगर्भितया कि मर्मबेधक उक्तिसूक्ति हैऔर बरसों बरस का अनुभवचढ़ जाएलोगों की जुबान परतो लोकोक्ति…

मुहावरे और लोकोक्ति की भिड़ंत – (कविता)

मुहावरे और लोकोक्ति की भिड़ंत एक दिनमुहावरे और लोकोक्ति मेंहो गई जिद्दबाजीकदम पीछे हटाने कोन मुहावरा राजीन लोकोक्ति राजी! मुहावरे ने उचक कर कहा —तुम खुद को समझती क्या हो?तुम…

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