Category: कहानी

दिन – विशेष विमर्श में मृदुला भटनागर की कहानी “कहीं कुछ तो होगा”

दिन विशेष विमर्श में मृदुला भटनागर की कहानी कहीं कुछ तो होगा चर्चित कथाकार मृदुला भटनागर की यह कहानी आज के पढ़े-लिखे परिवारों में भी कभी दहेज़ तो कभी पसंद-नापसंद…

दिन विशेष विमर्श में अलका सिन्हा की कहानी : ‘हरदम साथ डॉट कॉम’

दिन विशेष विमर्श में अलका सिन्हा की कहानी : ‘हरदम साथ डॉट कॉम’ अलका सिन्हा एक श्रेष्ठ कथाकार और कवियत्री हैं । आज के व्यस्त और बदलते परिवेश में तकनीक…

वैश्विक हिंदी परिवार के ‘कहानी विशेष’ में मधु पंत की कहानी ‘एक और कुतुबनुमा’ पर विमर्श

वैश्विक हिंदी परिवार के ‘कहानी विशेष’ में मधु पंत की कहानी ‘एक और कुतुबनुमा’ पर विमर्श मधु पंत हिंदी की प्रतिष्ठित साहित्यकार, प्रख्यात बाल साहित्यकार तथा शिक्षाविद् हैं। वे राष्ट्रीय…

मोह (कहानी) – मधुरिमा कोहली

मोह (कहानी) – मधुरिमा कोहली *********आज के विमर्श में हम पढ़ते हैं वरिष्ठ साहित्यकार, दिल्ली विश्वविद्यालय की पूर्व प्रोफेसर डॉ मधुरिमा कोहली जी की कहानी। डॉ मधुरिमा कोहली प्रतिष्ठित साहित्यकार…

“मोरपंख”- प्रवीण ‘बनजारा’

“मोरपंख”- प्रवीण ‘बनजारा’ सब उन्हें माताजी के नाम से जानते थे।उस दिन बड़े तड़के जब नींद खुली तो अंधेरा ही दिखा। गली के एक खम्भे के लाटू की रोशनी जाने…

जिला अधिकारी ने मेकअप क्यों नहीं किया? – (कहानी)

जिला अधिकारी ने मेकअप क्यों नहीं किया? डॉ महादेव एस कोलूर मलप्पुरम (केरल) की जिला अधिकारी सुश्री रानी सोयामोय कॉलेज के विद्यार्थियों के साथ बातचीत कर रही थीं। केरल राज्य…

बात छोटी सी – (कहानी)

बात छोटी सी नोरिन शर्मा आज शीतल और वरुण की पच्चीसवीं शादी की सालगिरह है। वरुण ने न तो कभी जन्मदिन मनाया और न ही कभी शादी की सालगिरह…! अंग्रेज़ों…

वापसी – (कहानी)

वापसी सुनीता पाण्डेय -“पिताजी यह मांस नही खाऊँगा मैं।” -“क्यों बेटा?” -“अच्छा नहीं लगता, मन ऊब गया इसे खाते-खाते।” -“बेटा यहाँ तो यही है, इस समय पेड़ों पर भी कुछ…

याद – (कहानी)

याद जयशंकर इस क्रिसमस को मैं पैंसठ बरस का हो गया। चौंसठ का हो रहा था और ब्लड प्रेशर रहने लगा। रोज सुबह एक टेबलेट लेने की शुरुआत हो गयी।…

विल यू मैरी मी (कहानी)     

विल यू मैरी मी प्रो. सारिका कालरा भारती ने अपने व्हाट्एप्प मैसेज चेक किए तो आज फिर मीनल का कोई मैसेज नहीं था। ‘पहले तो रोज सुबह-सुबह ही ‘मम्मा गुड…

ध्रुव तारा कभी अस्त नहीं होता.. – (कहानी)

ध्रुव तारा कभी अस्त नहीं होता.. – राजेश्वर वशिष्ठ डॉ. विश्वास अपने चेम्बर से निकलने ही वाले थे कि लैंड-लाइन फोन बज उठा। आमतौर पर यह फोन इन दिनों गुमसुम…

एक छोटी सी बात… – (कहानी)

– डॉ सुनीता शर्मा, न्यूजीलैंड एक छोटी सी बात… आज जब मैं घर लौटी, तो बगल की बिल्डिंग से कुछ असामान्य शोर सुनाई दिया। निकोला — वहीं रहने वाली महिला…

संस्कारों के अंतर – (कहानी)

संस्कारों के अंतर – अजेय जुगरान अनाहिता एक संवेदनशील, बुद्धिमान,पढ़ी-लिखी और देश – विदेश अच्छी तरह से घूम चुकी तैराक थी। वह अच्छे परिवार में पैदा हुई मुंबई की एक…

एक नयी सिन्ड्रेला – (कहानी)

एक नयी सिन्ड्रेला – डॉ संतोष गोयल सिन्ड्रेला की कहानी उसके प्रिय राजकुमार के आने तथा अपने साथ अपने घर ले जाने के बाद समाप्त हो जाती है, पर मेरी…

घर – (कहानी)

घर – चित्रा मुद्गल टूटते जाड़े का वह मटमैला-सा उदास दिन था … शिप्रा, बालकनी से लगे तारों पर मैं कपड़े सुखाकर पलटने को ही थी कि तभी दरवाजे की…

दर्पणों की गली – (कहानी)

दर्पणों की गली – वरुण कुमार “यह रात जैसे दर्पणों की गली हो और तुम एक अकेली चांदनी बनकर निकली हो…” छत की रेलिंग पर भिंचे अपने हाथ की उंगलियों…

जिन्दगी बड़ा सच – (कहानी)

जिन्दगी बड़ा सच – वरुण कुमार अस्पताल का गमगीन माहौल। सभी के चेहरे बुझे हुए। मृत्यु की घटना के ऩजदीक में होने का अनुभव भी कितना अवसन्नकारी होता है। डेड…

मन का प्रहरी – (कहानी)

मन का प्रहरी -शिवानी आज तक मुझे अपनी अन्तःप्रेरणा पर बड़ा गर्व था, पर आज सचमुच ही मेरा दर्प अचानक हाथ से गिर गए दर्पण की भाँति, यथार्थ की धरा…

गूंगा – (कहानी)

गूंगा –शिवानी सर्जन पंड्या को दूर से देखने पर लगता, कोई अंग्रेज़ चला आ रहा है। सुर्ख़ गालों पर सुख, सन्तोष और स्वास्थ्य की चमक थी। उनके हाथ में कुछ…

पीपल, पुरखे और पुरानी हवेली – (कहानी)

पीपल, पुरखे और पुरानी हवेली – अलका सिन्हा चैटर्जी लेन का यह सबसे पुराना, दो तल्ला मकान होगा जिसे समय के साथ नया नहीं कराया गया। नीचे-ऊपर मिला कर लगभग…

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