Category: संपादकीय

नए वर्ष का नयापन – (संपादकीय – 7)

नए वर्ष का नयापन डॉ. शैलजा सक्सेना पिछले कुछ वर्षों से लोग, जनवरी १ की शुभकामना भेजते हुए, आंग्ल वर्ष की शुभकामनाएँ या ग्रिगेरियन कैलेंडर के नव वर्ष की शुभकामनाएँ…

वंदे मातरम! – (संपादकीय – 6)

डॉ. शैलजा सक्सेना मित्रो, मौसम के बदलने के साथ जो अनचाही सौगातें आती हैं, उन्हीं के चलते पिछला संपादकीय नहीं लिख सकी, इसके लिए क्षमा चाहती हूँ। अब बात उसकी…

ट्रिक-ओ-ट्रीट: किसकी ट्रिक और किसको ट्रीट – (संपादकीय-५)

ट्रिक-ओ-ट्रीट: किसकी ट्रिक और किसको ट्रीट शैलजा सक्सेना त्यौहारों का मौसम लौट गया, मौसम में ठंड की धीमी पदचाप है। दीपावली के दियों के साथ, गर्मी भी जैसे घर-आँगन से…

प्रेम की भाषा में बाँचे त्यौहार ही पीढ़ियों तक चलते हैं – (संपादकीय-४)

प्रेम की भाषा में बाँचे त्यौहार ही पीढ़ियों तक चलते हैं डॉ. शैलजा सक्सेना घर में लड्डू बनने की महक फैली है, तीन स्टोव चल रहे हैं जिस पर अलग-अलग…

संपादकीय-३

संस्थाएँ और उनका औचित्य पिछले रविवार,सितंबर २८ को वैश्विक हिंदी परिवार की उत्तरी अमेरिका शाखा का उद्घाटन और रचनापाठ कार्यक्रम कैनेडा, अमेरिका और मैक्सिको के रचनाकारों के साथ संपन्न हुआ।…

हिंदी दिवस: एक दिन के लिए नहीं बल्कि जीवन भर का उत्सव – (संपादकीय-2)

हिंदी दिवस: एक दिन के लिए नहीं बल्कि जीवन भर का उत्सव शैलजा सक्सेना मित्रो, हिंदी दिवस की हार्दिक शुभकामनायें! वर्ष में दो दिन, १४ सितंबर को ‘हिंदी दिवस’ और…

1 सितंबर 2025 – (संपादकीय)

पहला संपादकीय डॉ. शैलजा सक्सेना, कैनेडा वैश्विक हिंदी परिवार और इसकी वेबसाइट से जुड़े सभी हिंदी प्रेमियों को सादर प्रणाम! आज इस वेबसाइट पर यह मेरा पहला संपादकीय! इस बेवसाइट…

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