शब्द चिंतन मोड पर ( कविता ) : अनीता वर्मा
शब्द चिंतन मोड पर ( कविता ) : अनीता वर्मा जो हो रहा हैवो तो होना ही थापर जो नहीं चाहिए होनाउस होने के होने काक्या होना और क्या नहीं…
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शब्द चिंतन मोड पर ( कविता ) : अनीता वर्मा जो हो रहा हैवो तो होना ही थापर जो नहीं चाहिए होनाउस होने के होने काक्या होना और क्या नहीं…
“तांडव” कविता : ( रेणुका – कविता संग्रह ) : रामधारी सिंह ‘दिनकर’ नाचो, हे नाचो, नटवर !चन्द्रचूड़ ! त्रिनयन ! गंगाधर ! आदि-प्रलय ! अवढर ! शंकर!नाचो, हे नाचो,…
सात और आठ ( कविता ) : डॉ. अशोक बत्रा एक दिन झूमते हुएसात और आठपहुँच गएगणितज्ञ आर्यभट्ट के पास! खुशी से किलक कर पूछा आर्यभट्ट नेकहो प्यारे सात और…
गया बादळा ( राजस्थानी कविता ) : कल्याणसिंह शेखावत आज बादळा, नया बादळा,चढ्या सबैरे घणा बादळा। जबरा-जबरा काळा-काळा,म्हानै लाग्या भला बादळा।म्हारो तन अर मन हरसायो,नभ मे दीख्या बड़ा बादळा।। मॉक…
“मंगल-आह्वान” कविता (कविता संग्रह – रेणुका ) : रामधारी सिंह ‘दिनकर’ भावों के आवेग प्रबलमचा रहे उर में हलचल। कहते, उर के बाँध तोड़स्वर-स्त्रोत्तों में बह-बह अनजान,तृण, तरु, लता, अनिल,…
बुढ़ापा बनाम अनुभव ( कविता ) : मंजु गुप्ता बुढ़ापा बिन बुलाए आता हैअनुभव परिश्रम से कमाया जाता है।बुढ़ापा लाचारी, अनुभव जौहरी पारखीबुढ़ापा तोड़ता है, अनुभव सिखाताबुढ़ापा उम्र की मजबूरी,…
बस दौड़ रहा आदमी… ( कविता ) : मंजु गुप्ता बच्चों मे भोलापन, मासूमियतकिशोरों में जिज्ञासा, कौतूहलयुवाओं में स्वप्नदर्शिता और जीवन में आस्था, विश्वासइत्र की खुली शीशी – सी गायब…
फूल – एक अहसास ( कविता ) : मंजु गुप्ता फूल तो मात्र एक अहसास होते हैंपानी की एक बूँद या मात्र एक घूँट नहींतृप्ति का अनंत, अथाह सागर होते…
प्रेम का छठा कोण ( कविता ) : मंजु गुप्ता एक प्रेम था- दो हृदयों को जोड़ने वालामाँ ने उसे ममता बना दियापिता ने वात्सल्यबहन ने स्नेह के धागे में…
‘नियति’ : ( कविता ) महीनों बाद अस्पताल से छूटकर आज काम पर फिर वापस आई गुलबिया एक बच्ची को गोद में थामे दो और बच्चे उसका आँचल पकड़े एकटक…
(विश्व पर्यावरण दिवस) : दोहे – डॉ. बबिता ‘किरण‘ मेरे आंगन झूमती, हरियाली की डोर।करती चिड़ियों की चहक, सुखद सुहानी भोर।। बना हुआ है घोंसला, चीं चीं का है शोर।काश…
“मेघ कहाँ से बरसेंगे” : कविता काट रहे हो जब पेड़ों को,मेघ कहाँ से बरसेंगे। मानव लगा हुआ है देखो,अंधाधुंध कटाई में।बिन बारिश सब हरियाली अरु,पैदावार खटाई में।।जल बिन अवनी…
प्रतीक्षा ( कविता ) : मंजु गुप्ता क्या कभी तुमने महसूसा हैवह क्षणजब देह की पोर- पोर मेंउग आती हैं आँखेंरोम-रोम बन जाता है कानऔर सहस्राक्ष सा अपलक गिनता हैकिसी…
पेड़ सब हरे होते हैं ( कविता ) : मंजु गुप्ता पेड़ सब हरे होते हैंहरा होना कितनी बड़ी बात है, जानते हो ?धूप, ताप, आँधी, बरसात, पतझड़ सहते हुए,…
चिड़िया और उदासी ( कविता ) : मंजु गुप्ता एक उदास चिड़ियाबैठी थी पेड़ पर अकेली, गुमसुममैं भी उदास, सोच रही थी-चिड़िया उदास भला किस कारण होगीशायद उसे भूख लगी…
शेष – अशेष : अनीता वर्मा ( कविता ) क्या होगा अगर तुम्हें जानेंगे बहुत लोगक्या ही होगा अगर तुम सिर्फ बातें ही करोगे समझदारी कीऔर क्या ही करोगे जब…
परजीवी तिलचट्टे – विनयशील चतुर्वेदी ( कविता ) बहुत ही खतरनाक हैं येढूंढ लेते हैं अंधरेघुस जाते हैदरारों मेंगटरों मेंहर उस जगह जहाँ होता हैअंधेरा………लाखों लाठियाँ लेकर भागोइनके पीछेहज़ारों तरह…
पुल – डॉ. वंदना मुकेश ( कविता ) पुलउस पीढ़ी से इस पीढ़ी तककई पुल बनने हैं।कुछ कदम तुम चलो,कुछ मैं। याद रखना,बनाओ जब पुल तोइनमें सरकारी सीमेंट न हो,दीवारों…
शोर – डॉ. वंदना मुकेश ( कविता ) मैं कुछ कहती हूँतुम भी कुछ कहते हो।जो मैं कहती हूँकुछ वैसा ही तुम भी कहते हो। न तुम सुनते होन मैं…
“धूप छांव”- डॉ. नीना छिब्बर सुख के संग दुख मुस्कान के साथ ऑंसू आशा के संग निराशा गीत की धुन में खामोशी मंजिल की राह में रूकावटें विजय के संग…