Category: कविता

तुम्हारा मौन (कविता) : रमाशंकर भारती

तुम्हारा मौन (कविता) : रमाशंकर भारती डॉ० रामशंकर भारती : एक परिचय – 1960 के दशक में सुरीलों के गाँव कैलाशनगर, क्योलारी-जालौन (उत्तर प्रदेश) के कृषक परिवार में जन्मे रामशंकर…

दिन विशेष नवोदित रचनाकार में दिनेश सेन शुभ की कविता

दिन विशेष नवोदित रचनाकार में दिनेश सेन शुभ की कविता दिनेश सेन ‘शुभ’ महाराजपुर, जबलपुर निवासी शासकीय सेवक एवं शोधार्थी हैं। उनका एकल काव्य-संग्रह ‘पराधीन परिणीता’ प्रकाशित है। उनकी कविताएँ…

दिन विशेष युवा लेखन विमर्श में उद्भव शांडिल्य की कविताएँ

दिन विशेष युवा लेखन विमर्श में उद्भव शांडिल्य की कविताएँ इन रचनाओं में संस्कृतनिष्ठ तत्सम शब्दावली, एक लयबद्ध प्रवाह और गंभीर दार्शनिक चिंतन प्रमुखता से दिखाई देता है। कवि का…

क्वेरियम की मछलियां : अलका निगम

क्वेरियम की मछलियां : अलका निगम कभी देखी हैंएक्वेरियम की मछलियां,कुछ कुछ स्त्रियों सी ही तो होती हैं।रंग बिरंगे लिबास में लिपटी,कोई सोने से लदी गोल्ड फिश सरीखी,तो कोई स्टार…

दिन विशेष विमर्श में युवा रचनाकार गोलेन्द्र पटेल की कविता

दिन विशेष विमर्श में युवा रचनाकार गोलेन्द्र पटेल की कविताएं गोलेन्द्र पटेल समकालीन हिन्दी के महत्त्वपूर्ण युवा कवि-लेखक हैं, जिनकी रचनाधर्मिता जनपक्षधरता, प्रतिरोध और सामाजिक न्याय की प्रखर चेतना से…

युवा लेखन विमर्श में रवि यादव का कविता पाठ

युवा लेखन विमर्श में रवि यादव का कविता पाठ रवि यादव का जन्म महराजगंज, उत्तर प्रदेश में हुआ। उन्होंने स्नातक की शिक्षा दिल्ली विश्वविद्यालय तथा परास्नातक की शिक्षा काशी हिंदू…

“युवा लेखन विशेष में प्रखर शर्मा की कविता पर विमर्श”

“युवा लेखन विशेष में प्रखर शर्मा की कविता पर विमर्श” प्रखर शर्मा समकालीन हिन्दी के उदीयमान युवा कवि, साहित्यकार एवं शोधार्थी हैं। मूलतः उत्तर प्रदेश के अमेठी जनपद के निवासी…

आज का विमर्श रत्ना भदोरिया की दो कविताएँ

रायबरेली उत्तर प्रदेश की रत्ना भदौरिया की इन कविताओं को पढ़ते हुए आपको लगता है कि आप आज के समय से दो-चार हो रहे हैं। पेशे से वे नर्स हैं,…

अनहद नाद ( कविता ) : अनीता वर्मा

अनहद नाद ( कविता ) : अनीता वर्मा हमें सुनना होगा भीतर के कोलाहल को समेटना होगा उसे अपनी आत्म शक्ति से स्वयं से जुड़ने के लिए ज़रूरी है जुड़ना…

மூச்சுப் பயிற்சி ( கவிதை ) : ஜமுனா கிருஷ்ணராஜ்

மூச்சுப் பயிற்சி ( கவிதை ) : ஜமுனா கிருஷ்ணராஜ் யோக வகுப்பில் எங்களிக்கப்பட்டதுமூச்சுப் பயிற்சிஅதாவது மூச்சை உள்ளிழுத்து வெளியே மெதுவாக விட வேண்டிய பயிற்சி. அப்போது நான் மூச்சின் வகைகளை உணர்ந்து சிந்தனையில் ஆழ்ந்தேன். அன்றாடம் நாம் ஓயாடிமூச்சிறைக்க வேலை…

योगाभ्यास ( कविता ) : डॉ. जमुना कृष्णाराज

योगाभ्यास ( कविता ) : डॉ. जमुना कृष्णाराज योग की कक्षा में मुझेदिया गया योगाभ्यास। श्वास लेने और छोड़ने कीविधि मुझे बताई गई। तब मैं श्वास के अनेक प्रकारों सेअवगत…

शब्द चिंतन मोड पर ( कविता ) : अनीता वर्मा

शब्द चिंतन मोड पर ( कविता ) : अनीता वर्मा जो हो रहा हैवो तो होना ही थापर जो नहीं चाहिए होनाउस होने के होने काक्या होना और क्या नहीं…

“तांडव” कविता : ( रेणुका – कविता संग्रह ) : रामधारी सिंह ‘दिनकर’

“तांडव” कविता : ( रेणुका – कविता संग्रह ) : रामधारी सिंह ‘दिनकर’ नाचो, हे नाचो, नटवर !चन्द्रचूड़ ! त्रिनयन ! गंगाधर ! आदि-प्रलय ! अवढर ! शंकर!नाचो, हे नाचो,…

सात और आठ ( कविता ) : डॉ. अशोक बत्रा

सात और आठ ( कविता ) : डॉ. अशोक बत्रा एक दिन झूमते हुएसात और आठपहुँच गएगणितज्ञ आर्यभट्ट के पास! खुशी से किलक कर पूछा आर्यभट्ट नेकहो प्यारे सात और…

गया बादळा ( राजस्थानी कविता ) : कल्याणसिंह शेखावत

गया बादळा ( राजस्थानी कविता ) : कल्याणसिंह शेखावत आज बादळा, नया बादळा,चढ्या सबैरे घणा बादळा। जबरा-जबरा काळा-काळा,म्हानै लाग्या भला बादळा।म्हारो तन अर मन हरसायो,नभ मे दीख्या बड़ा बादळा।। मॉक…

“मंगल-आह्वान” कविता (कविता संग्रह – रेणुका ) : रामधारी सिंह ‘दिनकर’

“मंगल-आह्वान” कविता (कविता संग्रह – रेणुका ) : रामधारी सिंह ‘दिनकर’ भावों के आवेग प्रबलमचा रहे उर में हलचल। कहते, उर के बाँध तोड़स्वर-स्त्रोत्तों में बह-बह अनजान,तृण, तरु, लता, अनिल,…

बुढ़ापा बनाम अनुभव ( कविता ) : मंजु गुप्ता

बुढ़ापा बनाम अनुभव ( कविता ) : मंजु गुप्ता बुढ़ापा बिन बुलाए आता हैअनुभव परिश्रम से कमाया जाता है।बुढ़ापा लाचारी, अनुभव जौहरी पारखीबुढ़ापा तोड़ता है, अनुभव सिखाताबुढ़ापा उम्र की मजबूरी,…

बस दौड़ रहा आदमी… ( कविता ) : मंजु गुप्ता

बस दौड़ रहा आदमी… ( कविता ) : मंजु गुप्ता बच्चों मे भोलापन, मासूमियतकिशोरों में जिज्ञासा, कौतूहलयुवाओं में स्वप्नदर्शिता और जीवन में आस्था, विश्वासइत्र की खुली शीशी – सी गायब…

फूल – एक अहसास ( कविता ) : मंजु गुप्ता

फूल – एक अहसास ( कविता ) : मंजु गुप्ता फूल तो मात्र एक अहसास होते हैंपानी की एक बूँद या मात्र एक घूँट नहींतृप्ति का अनंत, अथाह सागर होते…

प्रेम का छठा कोण ( कविता ) : मंजु गुप्ता

प्रेम का छठा कोण ( कविता ) : मंजु गुप्ता एक प्रेम था- दो हृदयों को जोड़ने वालामाँ ने उसे ममता बना दियापिता ने वात्सल्यबहन ने स्नेह के धागे में…

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