भारतीय भाषा मंच एवं दक्षिण भारतीय हिंदी प्रचार सभा के संयुक्त तत्वावधान में वैश्विक हिंदी परिवार द्वारा आयोजित निःशुल्क हिंदी ऑनलाइन प्रतियोगिता 2026 का परिणाम निम्नानुसार है। इस प्रतियोगिता में भाग लेने वाले सभी विद्यार्थियों को हृदय से आभार व्यक्त करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हैं। नोट: पूर्व घोषित विजेताओं की संख्या […]
हिंदी के इस वैश्विक मंच में 50 से अधिक देशों और भारत के प्राय: सभी राज्यों में स्थित लेखकों / विद्वानों की सक्रिय भागीदारी है। हमारा मानना है कि व्यावसायिक क्षेत्र में हिंदी का विकास ही हिंदी का भविष्य है और हम भाषा के प्रति सहानुभूति पर नहीं योगदान पर विश्वास करते हैं। आप सब का आह्वान करते हैं कि भाषा संबंधी परियोजनाओं को अपनी ऊर्जा और समय का योगदान कर मूर्त रूप दें।










वैश्विक हिंदी परिवार एवं गृहस्वामिनी के संयुक्त तत्वावधान में ‘दीपोत्सव नवंबर 2026’ का आयोजन
वैश्विक हिंदी परिवार एवं गृहस्वामिनी के संयुक्त तत्वावधान में ‘दीपोत्सव नवंबर 2026’ का आयोजन 5 नवंबर, 2026 को वैश्विक हिंदी परिवार एवं गृहस्वामिनी के संयुक्त तत्वावधान में बिहार और झारखंड का दीपोत्सव आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम भारतीय समयानुसार रात्रि 8 बजे संपन्न होगा। इस अवसर पर अध्यक्ष के रूप में डॉ. शैल अग्रवाल, मुख्य अतिथि […]
काव्य अमृत धारा का प्रथम वार्षिकोत्सव: साहित्य, सृजन और आत्मीयता का अनुपम संगम
काव्य अमृत धारा का प्रथम वार्षिकोत्सव: साहित्य, सृजन और आत्मीयता का अनुपम संगम 31 अक्टूबर, नई दिल्ली। साहित्यिक मंच की सार्थकता केवल आयोजनों की संख्या से नहीं, बल्कि उससे जुड़ने वाले लोगों के बीच विकसित आत्मीयता और साहित्यिक संबंधों से पहचानी जाती है। इसी आत्मीयता, सृजन और पारिवारिक सौहार्द का सुंदर उदाहरण बना काव्य अमृत […]
अनुवाद उपकरण एवं प्रशासनिक हिंदी पर रोजगारपरक प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित
अनुवाद उपकरण एवं प्रशासनिक हिंदी पर रोजगारपरक प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित बेंगलुरु: जैन (मानद विश्वविद्यालय), स्कूल ऑफ साइंसेज के हिंदी परिषद द्वारा 2 नवंबर 2026 को ‘अनुवाद उपकरण एवं प्रशासनिक हिंदी : रोजगारपरक प्रशिक्षण’ विषय पर एक कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में मुख्य वक्ता के रूप में सुश्री नर्मदा कुमारी, वरिष्ठ अनुवाद अधिकारी, प्रधान […]
साक्षात्कार : “कलम में किसी भी तानाशाह की तलवार से ज़्यादा शक्ति होती है” – हिमांशु जोशी
साक्षात्कार : “कलम में किसी भी तानाशाह की तलवार से ज़्यादा शक्ति होती है” – हिमांशु जोशी दिल्ली की एक शांत, हल्की सर्द शाम। कमरे में चारों ओर किताबों का अंबार लगा है। आधी सदी से अधिक समय तक हिन्दी कथा-साहित्य और पत्रकारिता को अपने सृजन से समृद्ध करने वाले कथाकार-उपन्यासकार हिमांशु जोशी अपनी चिर-परिचित […]
पुस्तक समीक्षा : ‘स्त्री और प्रेम’ : डॉ. नीलिमा पाण्डेय की काव्य-कृति पर पल्लवी रानी की समीक्षा
पुस्तक समीक्षा : ‘स्त्री और प्रेम’ : डॉ. नीलिमा पाण्डेय की काव्य-कृति पर पल्लवी रानी की समीक्षा ‘क्षणिका’ काव्य साहित्य की एक विशिष्ट विधा होते हुए भी उतनी लोकप्रिय नहीं है, जितनी होनी चाहिए. क्षणिकाओं के बहुत कम संग्रह उपलब्ध हैं। इस विधा को यथेष्ट प्रोत्साहन दिए जाने की आवश्यकता हैं। ‘क्षणिका’ विधा इसलिए भी […]
वैश्विक हिंदी परिवार की संगोष्ठी में ‘दीप पर्व : अतीत से वर्तमान तक’ विषय पर हुआ सारगर्भित विमर्श
वैश्विक हिंदी परिवार की संगोष्ठी में ‘दीप पर्व : अतीत से वर्तमान तक’ विषय पर हुआ सारगर्भित विमर्श 01 नवंबर, 2026। केंद्रीय हिंदी संस्थान, अन्तर्राष्ट्रीय सहयोग परिषद, वातायन-यूके तथा भारतीय भाषा मंच के संयुक्त तत्वावधान में वैश्विक हिंदी परिवार के साप्ताहिक कार्यक्रम के अंतर्गत ‘दीप पर्व : अतीत से वर्तमान तक’ विषय पर ऑनलाइन संगोष्ठी […]
दिन विशेष व्यंग्य : “आज इंसान खुद को भगवान बना बैठा है” – समीर लाल ‘समीर’
अब AI (आर्टिफिशियल इन्टेलिजेंस) का जमाना है। बनाने वाले ने तो न जाने क्या सोच कर बनाया होगा मगर इस्तेमाल करने वालों के तो क्या कहने।बनाया तो भगवान ने भी इंसानों को कुछ सोच कर ही होगा मगर अब जब वो इनकी हरकतें देखता होगा तो पछताता ही होगा कि ये क्या बना डाला मैंने। […]
दिन विशेष व्यंग्य : “हम विकास करके रहेंगे” – डॉ.संदीप अवस्थी
दिन विशेष व्यंग्य : “हम विकास करके रहेंगे” – डॉ.संदीप अवस्थी हर कोई विकास की चर्चा कर रहा है। सभी बड़े लोग विकास चाहते हैं। विकास आ रहा है,विकास होगा,विकास खुशहाली लाएगा,सुन-सुनकर सभी हैरान और परेशान। यह विकास कौन है जो आजादी के बाद से अब तक तो नहीं आया? और अब आ रहा है,तो […]
दिन विशेष कविता : “बुंदेली चौकड़ियां” – प्रभु दयाल श्रीवास्तव पीयूष टीकमगढ़
दिन विशेष कविता : “बुंदेली चौकड़ियां” – प्रभु दयाल श्रीवास्तव पीयूष टीकमगढ़ गोपीं गोविंद के गुन गाबें,बड़े भोर उठ जाबें।जुर मिल जे जमुना के जल में,बुड़की रोज लगाबें।कात्यायनि मइया की मूरत,रज सें नित्य बनाबें।नीर क्षीर नैवेद्य नारियल,श्री सिंदूर चड़ाबें ।हे मां आस होय पूरी प्रभु,कृष्ण परम पति पाबें। ,,,,,,,,,, ,,,,,,,,,, ,,,,,,,,, गोपीं फूलीं नईं समानी,भइँ […]
