आस्ट्रेलिया की प्रतिष्ठित संस्था इलासा (इंडियन लिटरेरी एंड आर्ट सोसाइटी ऑफ़ ऑस्ट्रेलिया) ने हिंदी साहित्य व हिंदी शिक्षण के क्षेत्र में कार्य कर रही विश्व की प्रतिष्ठित भारतीय महिलाओं को किया सम्मानित आस्ट्रेलिया की प्रतिष्ठित संस्था इलासा (इंडियन लिटरेरी एंड आर्ट सोसाइटी ऑफ़ ऑस्ट्रेलिया) ने हिंदी साहित्य व हिंदी शिक्षण के क्षेत्र में कार्य कर […]
हिंदी के इस वैश्विक मंच में 50 से अधिक देशों और भारत के प्राय: सभी राज्यों में स्थित लेखकों / विद्वानों की सक्रिय भागीदारी है। हमारा मानना है कि व्यावसायिक क्षेत्र में हिंदी का विकास ही हिंदी का भविष्य है और हम भाषा के प्रति सहानुभूति पर नहीं योगदान पर विश्वास करते हैं। आप सब का आह्वान करते हैं कि भाषा संबंधी परियोजनाओं को अपनी ऊर्जा और समय का योगदान कर मूर्त रूप दें।










“प्रस्तुति-खुला मंच“ फरीदाबाद इकाई के तत्वावधान में कार्यक्रम का आयोजन
“प्रस्तुति -खुला मंच“ फरीदाबाद इकाई के तत्वावधान में कार्यक्रम का आयोजन ऑस्ट्रेलिया की प्रतिष्ठित साहित्यकार रीता कौशल के भारत आगमन पर उनके सम्मान में गोष्ठी का आयोजन 18 मार्च को फरीदाबाद सैक्टर 46 में किया गया।वरिष्ठ साहित्यकार डॉ वेद व्यथित जी के खण्ड काव्य “अहिल्या “ का भी लोकार्पण व उस पर चर्चा हुई।। वेद […]
डियर मोमोज (व्यंग्य)
डियर मोमोज (व्यंग्य) मोमोज के उस सफेद, चिपचिपे और रहस्यमयी व्यक्तित्व की शारीरिक संरचना किसी दार्शनिक गुत्थी से कम नहीं है, जिसे देखकर लगता है कि मैदा अपनी मुक्ति के लिए किसी नेपाली बाबा की शरण में आया है। वह मैदा, जिसे डॉक्टर और डाइटीशियन ‘आंतों का परमानेंट फेविकोल’ घोषित कर चुके हैं, मोमोज वाले […]
पत्र-साहित्य का अकाल सांस्कृतिक क्षरण है।
पत्र-साहित्य का अकाल सांस्कृतिक क्षरण है। राजस्थान की वरिष्ठ साहित्यकार बसंती पँवार को ” संभवम्” सम्मान से नवाजा गया – इस अवसर पर बोलते हुए–पत्र- साहित्य का अकाल सांस्कृतिक क्षरण है– प्रोफेसर बीना शर्मा कल दिनांक 10 मार्च को आगरा की बहुप्रसंशित ” संभवम् ” संस्था ने राजस्थान की वरिष्ठ साहित्यकार बसंती पँवार जी को […]
‘बीपीए फाउंडेशन एवं इंडिया नेटबुक्स’ के संयुक्त तत्वाधान में “साहित्यकार सम्मानोत्सव – 2026” का भव्य आयोजन
‘बीपीए फाउंडेशन एवं इंडिया नेटबुक्स’ के संयुक्त तत्वाधान में “साहित्यकार सम्मानोत्सव – 2026” का भव्य आयोजन पूर्वी दिल्ली के मयूर विहार स्थित होटल क्राउन प्लाजा के सभागार में “बीपीए फाउंडेशन एवं इंडिया नेटबुक्स” के संयुक्त तत्वाधान में “साहित्यकार सम्मानोत्सव – 2026” का भव्य आयोजन किया गया।मंचासीन अन्य गणमान्य विभूतियों में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त […]
हिन्दी भवन में कृतियों का लोकार्पण, स्नेह मिलन एवं सम्मान समारोह का भव्य आयोजन सम्पन्न
हिन्दी भवन में कृतियों का लोकार्पण, स्नेह मिलन एवं सम्मान समारोह का भव्य आयोजन सम्पन्न दिनांक 28.02.2026 को नई दिल्ली के आईटीओ स्थित हिन्दी भवन के सभागार में उद्यमी, समाजसेवी एवं साहित्यकार डॉ अंजू क्वात्रा रचित नवीनतम कृति “शब्दों का सफर” तथा उन्हीं की पोती नवांकुर सुश्री प्रनिका क्वात्रा की सृजित प्रथम कृति “तितली के […]
हिंदी संस्कार की भाषा है।
हिंदी संस्कार की भाषा है। हिंदी संस्कार की भाषा है – सुधाकर पाठक “हिंदी भारतीय संस्कृति की वाहक होने के कारण संस्कार की भाषा है| यह विद्यार्थियों को एक सच्चा-अच्छा मनुष्य बनाने का प्रयास करती है| श्री राम कॉलेज की हिंदी साहित्य सभा स्पंदन जैसे आयोजनों के माध्यम से वर्षों से यही कार्य कर रही […]
अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के उपलक्ष्य में ‘पंजाबी कविता वाचन’ कार्यक्रम सम्पन्न
अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के उपलक्ष्य में ‘पंजाबी कविता वाचन’ कार्यक्रम सम्पन्न केंद्रीय हिंदी संस्थान, दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा और भारतीय भाषा मंच के तत्वावधान में वैश्विक हिंदी परिवार द्वारा अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के उपलक्ष्य में ऑनलाइन पंजाबी कविता वाचन कार्यक्रम करवाया गया l प्रतियोगिता के राष्ट्रीय संयोजक श्री अनिल जोशी, डॉ अनीता वर्मा और […]
हिंदी शुद्ध क्यों नहीं चाहिए
हिंदी शुद्ध क्यों नहीं चाहिए मेरे पिता का बचपन पुणे में बीता इसलिए मेरा भी पुणे से लगाव रहा। यह बात अंतरराष्ट्रीय हिंदी केंद्र रबींद्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय, भोपाल के निदेशक जवाहर कर्नावट ने कही। शुक्रवार को पुणे में उन्होंने श्रोताओं से तीखा सवाल पूछा कि हमें हवा शुद्ध चाहिए, भोजन शुद्ध चाहिए, पानी शुद्ध चाहिए […]
पक्के रंग और कच्चे मन के किस्से (व्यंग्य)
पक्के रंग और कच्चे मन के किस्से (व्यंग्य) हमारे यहाँ होली कैलेंडर की तारीखों से नहीं, बल्कि मोहल्ले की उस पुरानी दीवार पर पड़ने वाले नीले-लाल धब्बों से शुरू होती थी। वह दीवार जिसे साल भर कोई नहीं देखता था, होली आते ही वह किसी आधुनिक पेंटिंग जैसी दिखने लगती। यादें धूल की तरह होती […]
