“इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र में ‘समीक्षा वार्ता’ के संघ शताब्दी विशेषांक का लोकार्पण, राष्ट्रचेतना और समीक्षा पर हुआ सार्थक विमर्श”


दिनांक 2 जुलाई 2026 को संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार से सम्बद्ध इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र , दिल्ली ने अपने समवेत सभागार में समीक्षा वार्ता के संघ शताब्दी वर्ष पर केन्द्रित विशेषांक का लोकार्पण संपन्न हुआ। स्वागत वक्ता के रूप में प्रो. रमेशचंद्र गौंड़ (डीन, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र,दिल्ली) ने समीक्षावार्ता पत्रिका की विशिष्टता को ऊजागर करते हुए मंचासीन अतिथियों का परिचय कराते हुए उनका स्वागत किया एवं कार्यक्रम की महत्वत्ता पर प्रकाश डाला। बीज वक्ता के रूप में प्रो. सत्केतु सांकृत (प्रोक्टर एवं डीन अकादमिक अफेयर,साहित्य अध्ययन पीठ, डॉ. बी. आर अंबेडकर विश्वविद्यालय, दिल्ली) ने पत्रिका से अपने भावानात्मक लगाव को साझा करते हुए कहा कि यह प्रस्तुत पत्रिका का आरंभ पिता जी के श्रम एवं कठिन तप से हुआ है जिससे आगे बढाने का कार्य मेरे और मेरी धर्मपत्नी के द्वारा हो रहा है। उन्होंने आगे कहा कि कुछ विचार समाज में कीचड़ की तरह फैले होते हैं जो समाज को दूषित करते हैं जिसे साफ करना अनिवार्य धर्म है। इसलिए यह विशेषांक ‘संघ शताब्दी’ रखा गया, जिन्हें भी संघ को लेकर भ्रांतियां है, यह अंक उनकी समस्त भ्रांतियों का निराकरण करेगा। डॉ.अभिषेक टण्डन (प्राध्यपक एवं प्रभारी – युवा मोर्चा भाजपा दिल्ली) ने अपने वक्तव्य का आरंभ करते हुए कहा कि यह अंक बेहद महत्वपूर्ण है। जिसमें संघ केंद्रित पुस्तकों का अपना विशेषांक बनाया। मैं स्वंय ही अखिल भारतीय विधार्थी परिषद का कार्य करता रहा हूं। इन पुस्तकों से मुझे प्रेरणा मिलती रही है। श्री अनंत विजय (संपादक-फीचर, दैनिक जागरण राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित फिल्म समीक्षा) ने अपना वक्तव्य प्रारंभ करते हुए कहा कि मैं समीक्षा वार्ता से 1967 से परिचित हूं जब गोपाल राय जी पत्रिका निकालते थे। मैं बेहद उत्सुकता से समीक्षावार्ता के अंको की प्रतीक्षा करता था। गोपाल राय की यह पत्रिका समीक्षा के मानक तय करती थी। उन्होंने सभी को पत्रिका के माध्यम से समीक्षा करने का सऊर दिया। उन्होंने कहा कि पत्रिका में उन्हीं पुस्तकों की समीक्षा होती थी जो समाज के लिए उपयोगी एवं सृजन की दृष्टि से महत्वपूर्ण समझी जाती थी। उन्होंने समीक्षा के माध्यम से पुस्तक को पढ़ने का ढंग दिया। डॉ.आनंदवर्धन ने प्रमुख वक्ता के रूप में वक्तव्य देते हुए संघ की कार्यप्रणाली एवं उसकी मूलचेतना पर प्रकाश डाला। आगे उन्होंने ओम प्रकाश पांडेय की पुस्तक भारत वैभव से उदाहरण प्रस्तुत करते हुए भारतबोध के सूत्रो की व्याख्या की। श्री राम बहादुर राय (पत्रकार और राष्ट्रवादी विचारक एवं पद्मभूषण सम्मान से सम्मानित ) ने अध्यक्षीय वक्तव्य देते हुए पत्रिका के कुछ अंशो पर प्रकाश डाला। पत्रिका के माध्यम से पुस्तकों के प्रति उत्पन्न होने वाले आकर्षण की विवेचना की। समीक्षा वार्ता पढ़ते हुए यह लगा कि जिस भी पुस्तक की समीक्षा पढ़ रहा था तो ऐसा सोच रहा था वह पुस्तक मेरे पास होनी चाहिए। कार्यक्रम का धन्यवाद ज्ञापन करते हुए डॉ.रागिनी सांकृत ( संपादक – समीक्षा पत्रिका ) ने कहा कि समीक्षावार्ता मेरे लिए महज पत्रिका नहीं है बल्कि यह मेरे लिए भावानात्मक विषय है। कार्यक्रम का कुशल संचालन डॉ. महेंद्र प्रजापति (असिस्टेंट प्रोफेसर, डॉ. बी आर अंबेडकर विश्वविद्यालय, दिल्ली) ने किया। कार्यक्रम में विधार्थी, शोधार्थी एवं प्राध्यापक सहित सुधि श्रोताओं की उपस्थिति रही।
