प्रेमचंद जयंती पर एस.एन.डी.टी. महाविद्यालय में ‘महिला सशक्तिकरण और साहित्य’ विषय पर मा. सारा शर्मा (आई.पी.एस.) का प्रेरक व्याख्यान

पुणे, 31 जुलाई 2026 : एस.एन.डी.टी. कला और वाणिज्य महिला महाविद्यालय, पुणे के हिंदी विभाग एवं राष्ट्रीय सेवा योजना (एन.एस.एस.) विभाग के संयुक्त तत्वावधान में महान कथाकार मुंशी प्रेमचंद की जयंती के अवसर पर विशेष व्याख्यान, ‘हिंदी साहित्य अध्ययन संसद’ का उद्घाटन तथा एन.एस.एस. उद्बोधन कार्यक्रम का गरिमापूर्ण आयोजन महाविद्यालय के सभागार में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का उद्देश्य छात्राओं में हिंदी साहित्य के प्रति अभिरुचि विकसित करना, सामाजिक सरोकारों के प्रति संवेदनशीलता जागृत करना तथा महिला सशक्तिकरण के विविध आयामों पर सार्थक संवाद स्थापित करना था।

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि एवं प्रमुख वक्ता मा. सारा शर्मा (आई.पी.एस.), डी.आई.जी. ऑफ पुलिस, सी.बी.आई., फुलेनगर, पुणे थीं। उन्होंने ‘महिला सशक्तिकरण और साहित्य की भूमिका’ विषय पर अपने प्रेरक एवं विचारोत्तेजक व्याख्यान में सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी, अपने संघर्षपूर्ण जीवन-प्रवास, सफलता के मूल मंत्र तथा युवाओं के सामाजिक दायित्वों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी जीवन संघर्षों से भरा होता है, किंतु यही संघर्ष भविष्य की सफलता की मजबूत नींव बनते हैं। सफलता प्राप्त करने के लिए परिश्रम, लगन, आत्मविश्वास, अनुशासन और दृढ़ इच्छाशक्ति का निरंतर विकास आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि साहित्य केवल ज्ञान का स्रोत नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण का प्रभावी माध्यम है। साहित्य देशप्रेम, सामाजिक चेतना, मानवीय संवेदनाओं और नैतिक मूल्यों का संस्कार देता है। मुंशी प्रेमचंद के साहित्य का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि उनकी रचनाएँ सामाजिक यथार्थ, स्त्री सम्मान, समान अवसर तथा मानवीय संवेदना का सशक्त दस्तावेज हैं। आज की युवा पीढ़ी यदि इन मूल्यों को अपने जीवन में आत्मसात करे तो वह समाज और राष्ट्र के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है। उन्होंने छात्राओं से शिक्षा, आत्मनिर्भरता, सामाजिक उत्तरदायित्व और संवेदनशील नेतृत्व को जीवन का आधार बनाने का आह्वान किया।

इस अवसर पर ‘हिंदी साहित्य अध्ययन संसद’ का शुभारंभ किया गया तथा रचनात्मक लेखन, साहित्यिक विमर्श, अध्ययन-अध्यापन और समसामयिक विषयों पर संवाद की परंपरा को सुदृढ़ करने का संकल्प व्यक्त किया गया। साथ ही राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवकों को समाज सेवा, राष्ट्र निर्माण, नेतृत्व क्षमता तथा मानवीय मूल्यों के प्रति समर्पित रहने की प्रेरणा दी गई।

कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. (डॉ.) भरत व्हनकटे ने की। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में उन्होंने साहित्य, शिक्षा और सामाजिक उत्तरदायित्व के समन्वय पर बल देते हुए कहा कि महाविद्यालयीन जीवन विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण का महत्वपूर्ण चरण है। चुनौतियों का सकारात्मक रूप से सामना करने वाले विद्यार्थी ही समाज और राष्ट्र के विकास में सार्थक भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि महर्षि कर्वे द्वारा स्थापित यह महाविद्यालय छात्राओं के सर्वांगीण विकास के लिए प्रतिबद्ध है तथा हिंदी विभाग और राष्ट्रीय सेवा योजना विभाग उनके बौद्धिक, सामाजिक एवं व्यावसायिक विकास हेतु निरंतर कार्यरत हैं।

कार्यक्रम का प्रास्ताविक एवं अतिथि परिचय हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. शिवदत्ता वावळकर ने कराया। इस अवसर पर उपप्राचार्य प्रो. अंजली कदम, प्रो. मृणालिनी घाटगे, मराठी विभागाध्यक्ष डॉ. प्रिया जामकर, वरिष्ठ लिपिक श्री मुकुंद गोसावी, महाविद्यालय के प्राध्यापकगण, शिक्षकेत्तर कर्मचारी, एन.एस.एस. के कार्यक्रम अधिकारी, स्वयंसेवक तथा बड़ी संख्या में छात्राएँ उपस्थित थीं।

कार्यक्रम का प्रभावी संचालन प्रा. सुप्रिया शेरे ने किया तथा प्रा. वल्लभ मुद्राळे ने आभार व्यक्त किया। आयोजन की सफलता में डॉ. शिवदत्ता वावळकर, डॉ. भक्ती हुबळीकर, प्रा. वल्लभ मुद्राळे, प्रा. सुप्रिया शेरे, मयुरी मोर्ये, स्वाती गच्चे एवं अश्विनी धायबर का विशेष सहयोग रहा।

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