प्रौद्योगिकी के प्रसार में हिंदी की भूमिका पर संगोष्ठी

कोलकाता में भारतीय इस्पात प्राधिकरण (SAIL) के अध्यक्षीय कार्यालय एवं नराकास उपक्रम-2 के संयुक्त तत्वावधान में ‘प्रौद्योगिकी के प्रसार में हिंदी की भूमिका’ विषय पर राजभाषा संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में SAIL के अधिकारियों, राजभाषा विभाग से जुड़े प्रतिनिधियों तथा विभिन्न प्रतिभागियों ने सक्रिय सहभागिता की।
संगोष्ठी के मुख्य वक्ता दुबई स्थित एल्गो टेक्नोलॉजीज के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं ‘रिस्किल नेशन’ के संस्थापक श्री बालेन्दु शर्मा दाधीच ने विषय पर अपना सारगर्भित वक्तव्य प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी का वास्तविक प्रसार तभी संभव है, जब उसका ज्ञान और उपयोग आमजन की भाषा में सहज एवं सरल रूप से उपलब्ध हो। हिंदी सहित भारतीय भाषाएँ तकनीकी ज्ञान को समाज के व्यापक वर्ग तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
श्री बालेन्दु शर्मा दाधीच ने अपने वक्तव्य में तकनीकी ज्ञान, नवाचार और डिजिटल संसाधनों को हिंदी के माध्यम से अधिकाधिक लोगों तक पहुँचाने की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि तकनीकी शब्दावली और आधुनिक तकनीकी सूचनाओं को सरल, सहज एवं बोधगम्य हिंदी में प्रस्तुत करने से डिजिटल तकनीक का दायरा और प्रभाव दोनों व्यापक हो सकते हैं। उन्होंने हिंदी को प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में केवल संप्रेषण का माध्यम ही नहीं, बल्कि ज्ञान के लोकतंत्रीकरण का प्रभावी साधन बताया।
संगोष्ठी के दौरान हिंदी और प्रौद्योगिकी के परस्पर संबंध, डिजिटल युग में भारतीय भाषाओं की प्रासंगिकता तथा तकनीकी संसाधनों के हिंदीकरण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर सार्थक विचार-विमर्श हुआ। प्रतिभागियों ने भी विषय से जुड़े अपने विचार साझा किए।
कार्यक्रम ने यह स्पष्ट किया कि प्रौद्योगिकी को जनसुलभ बनाने में हिंदी की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस सार्थक एवं विचारोत्तेजक आयोजन के लिए SAIL के अध्यक्षीय कार्यालय, नराकास उपक्रम-2, राजभाषा से जुड़े सभी अधिकारियों तथा समस्त प्रतिभागियों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया गया।
