श्री अनिल जोशी के जन्मदिवस पर साहित्यकारों और हिंदीप्रेमियों ने दी आत्मीय बधाई
विश्वभर में हिंदी की ध्वजा ले जाने वाले वैश्विक हिंदी परिवार के अध्यक्ष अनिल जोशी के के जन्म दिवस पर मित्रों, शुभचिंतकों, साहित्यकारों और भाषा प्रेमियों द्वारा उनके घर पहुँच कर बधाई दी। इस अवसर पर आयोजित संगोष्ठी में प्राप्त शुभकामना और आत्मीयता के प्रति आदरणीय अनिल जोशी जी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा…… हमें पता ही नहीं चलता कि हमारे साथ के बीज, नन्हे पौधे कब वृक्ष बन गए हैं। फूलों से भरे हैं। उनकी सुगंध विभिन्न दिशाओं में फैल रही है।
परिवेश उनकी रचनाओं की स्वर लहरियों से गुंजित है। अब वे नाम समय की शिला पर बहुत गहराई से अंकित हो गए हैं। कल मेरे जन्मदिन की रचना गोष्ठी में मेरे निवास पर ऐसा ही एहसास हुआ। हमारे लंबे समय के साथी नरेश शांडिल्य, अलका सिन्हा, ममता किरण वाजपेयी, शशिकांत, अनिल मीत, ताराचंद नादान, हर्षवर्धन आर्य ऐसे ही सशक्त और वरिष्ठ हस्ताक्षर हैं। प्रखर शर्मा जी भी अपनी छाप छोड़ रहे हैं। वयम संस्था की तरफ से वरिष्ठ साथियों नरेश शांडिल्य के साथ सभी सदस्यों का विशेष आभार कि इस अवसर पर मेरा सुंदर चित्र भेंट स्वरूप प्रदान कर सम्मान किया। संकल्प का दिल्ली में होना ही विशेष था। अभिनय तो उसकी रगों में है। उसकी प्रस्तुति की गहराई, भावों का उतार-चढ़ाव और अभिनय की विविधता ड्राइंग रूम को भी थियेटर बना देती है। प्रतिबिंब जी ने विवेकानंद की प्रासंगिकता को जीवंत कर दिया। मनोज सिन्हा जी ने रामदरश जी के गीत को गाकर पिता के चित्र लोगों के समक्ष खड़े किए, तो शिवम जी, सुमित जी, रत्न जी, अजय जी के साथ उनकी बहन की उपस्थिति आत्मीय थी। शिवम जी के बच्चों ने तो महफ़िल में रौनक ला दी। जब सरोज जी के पास प्रबंध होता है तो कार्यक्रम का सफल संयोजन होना निश्चित है।


