
भारत के पहले लेखक गांव, देहरादून में दिनांक 3, 4 एवं 5 नवंबर 2025 को संपन्न हुए स्पर्श हिमालय महोत्सव 2025 (अंतर्राष्ट्रीय साहित्य, संस्कृति एवं कला समारोह)* अनुभव, उपलब्धियां एवं चिंतन विषय पर “सृजनी ग्लोबल, हिमालय विरासत ट्रस्ट एवं SHM 2025” के द्वारा एक भव्य ऑनलाइन कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
इस भव्य आयोजन के मुख्य अतिथि मॉरीशस के पूर्व राष्ट्रपति महामहिम माननीय H. E Prithvirajsing Roopun जी थे।
आयोजन की अध्यक्षता माननीय Dr.Ramesh Pokhriyal Nishank जी (पूर्व मुख्यमंत्री, उत्तराखंड एवं पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री, भारत सरकार) ने की।
जर्मनी की सुप्रसिद्ध शिक्षाविद, साहित्यकार एवं मीडिया प्रोफेशनल डॉ शिप्रा शिल्पी सक्सेना के संयोजन, चीन से सुप्रसिद्ध शिक्षाविद DrVivek Mani Tripathi Keertivardhan एवं भारत से हिमालय विरासत ट्रस्ट की संयोजक सुश्री आशना कन्डियाल नेगी के सशक्त संचालन में 100 से भी अधिक देश विदेश के बुद्धिजीवियों ने वर्चुअल सभा में अपने- अपने अनुभव साझा किए गए।
कार्यक्रम का प्रारंभ डॉ शिप्रा शिल्पी ने विश्व के प्रथम लेखक गांव एवं स्पर्श हिमालय महोत्सव की महत्वपूर्ण विशेषताओं का उल्लेख करते हुए किया_
“शब्दार्थस्य साधना विलसति हिमगिरौ।
लेखक ग्रामे समृद्धिः संस्कृतः यत्र जायते।
रचनास्वादः शुद्धि: आत्मा च प्रकृतिः,
तत्र एव जीवनः पुष्यति चिन्तनम्॥
उन्होंने कहा आज के इस आयोजन का उद्देश्य मात्र माननीय निशंक जी और इस महोत्सव से संबद्ध प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष साहित्य सेवियों के प्रति आभार प्रकट करना ही नहीं है, जिन्होंने अपनी निष्ठा एवं लगन से इस महोत्सव को अविस्मरणीय बना दिया है, वरन देश विदेश से जुड़े समस्त महनीय विद्वतजनों के अनुभवों से भविष्य के आयोजनों को और भी अधिक सारगर्भित एवं सुनियोजित बनाना है।
इसके बाद स्पर्श हिमालय महोत्सव 2025 के संयोजक डॉ. Bechain Kandiyal ने महोत्सव की संस्था गतिविधियों, आयोजन व्यवस्थाओं एवं उपलब्धियों पर विस्तृत रूप से प्रकाश डाला।
मुख्य अतिथि महामहिम राष्ट्रपति पृथ्वीराजसिंह रूपन जी का स्वागत सृजनी ग्लोबल की को फाउंडर सुप्रसिद्ध लेखिका प्राची चतुर्वेदी रंधावा (कनाडा) ने किया।
महामहिम राष्ट्रपति महोदय श्री पृथ्वीराजसिंह रूपन जी ने माननीय निशंक जी का धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा : “स्पर्श हिमालय महोत्सव उनके हृदय को स्पर्श कर गया। अत्यंत विचारपूर्ण, कला, साहित्य, संस्कृति, विज्ञान, दर्शन, आध्यात्म, योग एवं संगीत आदि की दृष्टि से ये एक अत्यंत अनूठा एवं महत्वपूर्ण आयोजन था, जो मेरे लिए अविस्मरणीय है। मै लेखक गांव से जुड़कर गौरवान्वित हूं और मात्र महोत्सव ही नहीं आगामी सभी आयोजनों में जो भी सहयोग कर सकता हूं वो अवश्य करना चाहूंगा। आज के इस भव्य वर्चुयल आयोजन से जोड़ने के लिए डॉ शिप्रा शिल्पी एवं प्राची रंधावा जी का आभार व्यक्त करता हूं एवं देश विदेश के बुद्धजीवियों के अनुभवों को सुनकर अत्यंत उत्साहित हूं।”
लगभग 3:30 घंटे से अधिक समय तक चली इस सभा में लगभग 100 से भी अधिक प्रबुद्धजनों ने अपने अनुभव एवं सुझाव व्यक्त किए। जिनमें प्रवासी विचारकों, शिक्षाविदों एवं साहित्यकारों में मुख्य रूप से श्री Tejendra Sharma जी, (ब्रिटेन), प्रो. पुष्पिता अवस्थी जी, (नीदरलैंड), सुश्री Prachi Randhawa, (कनाडा), डॉ विवेक मणि त्रिपाठी (चीन), सुश्री Annada Patni जी, (अमेरिका), प्रो. उल्फत महिबोवा जी (उज़्बेकिस्तान), सुश्री जरीनारखमूतोलीविया (कजाकिस्तान), डॉ ब्रेसिल.एन. विताना (श्री लंका), सुश्री Aradhana Jha Shrivastava (सिंगापुर), डॉ Mansi Sharma, (कतर), डॉ Durga Sinha जी(अमेरिका), Shailja Saksena (कनाडा), श्री Charles S Thomson (आस्ट्रेलिया),सुश्री Shikha Rastogi (थाईलैंड), श्री बीर बहादुर महतो (नेपाल) जी ने अपने महत्वपूर्ण सुझाव एवं अनुभवों को साझा किया।
साथ ही भारत से भी सुप्रसिद्ध साहित्यकार, शिक्षाविदों एवं चिंतकों वैश्विक हिंदी परिवार के संस्थापक श्री Anil Joshi, प्रसिद्ध साहित्यकार सुश्री अलका सिन्हा, ABS 4 एवं प्रज्ञान विश्वम पत्रिका के संपादक पंडित सुरेश नीरव, हिंदी साहित्य अकादमी के पूर्व सचिव श्री Rishi Kumar Sharma, डॉ दीप्ति अग्रवाल, सुश्री सुनीता पाहुजा जी, स्पर्श हिमालय विश्वविद्यालय के डीन डॉ प्रदीप कोठियाल, श्री विनय शील चतुर्वेदी जी, पंजाब यूनिवर्सिटी से डॉ किरण खन्ना, डॉ नमिता राकेश, डॉ Ved Parkash Vats, सुश्री अंजू वेद, प्रो. सुशील कुमार शर्मा, डॉ ऊषा उपाध्याय, सुश्री भारती ढीमरी, सुश्री प्रिया राय, चित्रकार श्री अरुण कुमार पाठक, प्रो. डॉ अजयपालसिंह शेखावत, डॉ विनय कुमार शर्मा, पूजा पोखरियाल, आशना नेगी कंडियाल आदि अनेक गुनीजनो की महनीय उपस्थिति एवं अनुभवों ने कार्यक्रम को समृद्धता प्रदान की।
कार्यक्रम के अंत में माननीय डॉ रमेश पोखरियाल निशंक जी ने अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में सर्वप्रथम महामहिम पूर्व राष्ट्रपति श्री पृथ्वीराज सिंह रूपन जी को हृदय की गहराइयों से धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने कहा एक राजनीतिज्ञ होने के नाते मै व्यस्तताओं को समझता हूं, किंतु माननीय महामहिम राष्ट्रपति महोदय का 2 दिनों तक महोत्सव में रहना, उत्साहपूर्ण सहभागिता एवं आज इस वर्चुअल आयोजन में 3 घंटे से भी अधिक समय तक जुड़े रहना, उनके साहित्य कला संस्कृति के प्रति लगाव एवं उनके सुंदर मन को दिखाता है। ऐसे अकलुषित मनों से छलके भाव अमृत के समान दूर तक और देर तक अपना प्रभाव बनाए रखते है।
इसके साथ ही माननीय निशंक जी ने आयोजन में उपस्थित एक एक अतिथियों का नाम लेकर उनके अनुभवों एवं सुझावों पर अपने विचारों को व्यक्त किया। उन्होंने कहा लेखक गांव विश्व के हर उस व्यक्ति का अपना गांव है, जिसके अंदर सृजन की छटपटाहट है, जो किसी भी क्षेत्र में कुछ सकारात्मक करना चाहता है। ये गंतव्य स्थल हम सब का है इसे कैसे संजोये, कैसे और बेहतर सवारे ये हमे मिलकर सोचना होगा। यहां मिलकर हम मन की खुशियों को बांट सकते है, भावो को आकार दे सकते है। हमे विश्व के हर देश को जहां हिंदी एवं संस्कृत तथा भारतीय संस्कृति के प्रति लोग समर्पित है, उन्हें लेखक गांव से जोड़ना होगा।
इस अवसर पर उन्होंने लेखक गांव से जुड़ी आगामी योजनाओं पर भी चर्चा की एवं नालंदा पुस्तकालय एवं पुस्तकों से जुड़ने के लिए सभी को प्रेरित भी किया। अपने वक्तव्य के अंत में उन्होंने डॉ शिप्रा शिल्पी, डॉ विवेक मणि त्रिपाठी, डॉ बेचैन कंडियाल एवं आशना नेगी का सफल भव्य आयोजन हेतु विशेष आभार व्यक्त किया।
स्पर्श हिमालय महोत्सव के सचिव डॉ बालकृष्ण चमोली जी ने कार्यक्रम के अंत में सभी का धन्यवाद ज्ञापन किया।
डॉ शिप्रा शिल्पी ने कार्यक्रम का समापन करते हुए डॉ विदुषी निशंक जी को विशेष आभार व्यक्त करते हुए कहा : किसी भी महोत्सव की सफलता उसके नेतृत्वकर्ता, उद्देश्य और अप्रत्यक्ष रूप से कार्य कर रही उसकी टीम की निष्ठा, लगन और समर्पण पर निर्भर करती है। स्पर्श हिमालय महोत्सव 2025 की भव्य सफलता समर्पण एवं निष्ठाओं का प्रत्यक्ष प्रमाण है। आइए मिलकर चले “सृजन की ओर”।
ज्ञातव्य हो इस ऐतिहासिक स्पर्श हिमालय महोत्सव में अध्यक्ष के रूप में लेखक गांव में पधारे मॉरीशस के पूर्व राष्ट्रपति माननीय पृथ्वीराज सिंह रूपन एवं लेखक गांव के अध्यक्ष डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ जी का पूरे समय तक सानिध्य एवं आशीर्वाद भी प्राप्त हुआ। 65 देशों के शिक्षाविदों, साहित्यकारों, विचारकों, कलाकारों एवं शोधार्थियों ने इस कार्यकम में प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से सहभागिता की। विश्व के अनेक विश्विद्यालयों के छात्रों ने इससे प्रत्यक्ष एवं वर्चुअल माध्यम से जुड़कर इस ज्ञान गंगा का भरपूर लाभ उठाया।
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रिपोर्ट – डॉ शिप्रा शिल्पी सक्सेना, कोलोन, जर्मनी
