अमेरिका में शांति यात्रा (रिपोर्ट)

अमेरिका में बौद्ध भिक्षुओं की शांति यात्रा एक प्रेरणादायक घटना है, जहाँ भिक्षु टेक्सास से वाशिंगटन डीसी तक 3700 किमी की पादयात्रा कर शांति का संदेश फैला रहे हैं।
यात्रा का प्रारंभ यह “वॉक फॉर पीस”(Walk for peace) नामक यात्रा 26 अक्टूबर 2025 को फोर्ट वर्थ, टेक्सास से शुरू हुई, जिसमें ह्युंग डाओ विपश्यना भवना सेंटर के थेरवाद बौद्ध भिक्षु शामिल थे।
लगभग 108 दिनों में उन्होंने 2300 मील (3700 किमी)की दूरी तय की,जो बौद्ध परंपरा में आध्यात्मिक पूर्णता का प्रतीक है।
उनके साथ आलोका नाम का एक बचाव कुत्ता भी चला, जो यात्रा का प्रतीक बन गया ।
मार्ग और स्वागत: भिक्षुओं ने दक्षिणी राज्यों से गुजरते हुए बर्फीली ठंड और कठिन परिस्थितियों का सामना किया, फिर भी प्रतिदिन 20 मील पैदल चले।
वाशिंगटन डीसी पहुँचने पर हजारों लोगों ने उनका स्वागत किया—महिलाएँ फूल भेंट कर रही थीं, पुलिस बैच पहनकर सम्मान दे रही थी, और अमेरिकन यूनिवर्सिटी के एरिना में भव्य आयोजन हुआ।
कैथेड्रल स्टेप्स पर इंटरफेथ इवेंट में वेनरेबल भिक्खु पन्नकारा ने कहा, “यह जीवन भर याद रहने वाला क्षण है।”
शांति का संदेश: यह यात्रा शांति, करुणा, अहिंसा और विपश्यना ध्यान को बढ़ावा देने वाली थी,जो राजनीतिक कलह वाली अमेरिका में एकता का प्रतीक बनी।
सोशल मीडिया पर लाखों फॉलोअर्स ने इसे वायरल किया, और स्थानीय समुदायों ने मौन में उनका स्वागत किया।
भिक्षुओं ने लिंकन मेमोरियल पर समारोह के बाद टेक्सास लौटने की योजना बनाई।
शोध में प्रेरणा की किरण एवं उपसंहार:
बौद्ध भिक्षु क्या चाहते हैं –
क्या कोई राजपाट चाहते हैं?
क्या कोई पैसा चाहते हैं?
क्या कोई आश्रम बनाने के लिए जमीन चाहते हैं? कतई नहीं…!
वे चाहते हैं कि दुनिया को बेहतर जगह बनाएं..
लोगों के बीच आत्मीयता बनी रहे ताकि दुनिया में शांति और अमन सदा रहे। अतः यह यात्रा कोई राजनीतिक यात्रा न होकर सिर्फ एक आध्यात्मिक यात्रा रही है ।
और यह यात्रा साबित करती है कि सादगी और दृढ़ता से विश्व शांति का संदेश कहीं भी पहुँच सकता है ।
भारत जैसे देशों में हिंदी साहित्य प्रेमियों के लिए यह बौद्ध दर्शन की जीवंत मिसाल है, जो युवाओं को प्रेरित करेगी।
प्रस्तुति- डॉ महादेव एस कोलूर
