गुजरात साहित्य अकादमी, गुजरात सरकार तथा भारतीय भाषा मंच के संयुक्त तत्वावधान में “भारतीय भाषा संगम 2.0” उत्सव का भव्य आयोजन स्टैच्यू ऑफ यूनिटी (केवड़िया, वडोदरा) में नर्मदा नदी के तट पर 28–29 अप्रैल को संपन्न हुआ

गुजरात साहित्य अकादमी, गुजरात सरकार तथा भारतीय भाषा मंच के संयुक्त तत्वावधान में “भारतीय भाषा संगम 2.0” उत्सव का भव्य आयोजन स्टैच्यू ऑफ यूनिटी (केवड़िया, वडोदरा) में नर्मदा नदी के तट पर 28–29 अप्रैल को संपन्न हुआ। यह दो दिवसीय आयोजन भारतीय भाषाओं के संवर्धन, संरक्षण और उनके माध्यम से विकसित भारत के निर्माण पर केंद्रित रहा। कार्यक्रम में देशभर से आए विद्वानों, साहित्यकारों और भाषा विशेषज्ञों ने विभिन्न आयामों पर गंभीर विमर्श किया।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में भारत सरकार के संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत उपस्थित रहे। साथ ही राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह ने भी कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई। पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ की उपस्थिति ने आयोजन को विशेष महत्व प्रदान किया। गुजरात साहित्य अकादमी के अध्यक्ष डॉ. भाग्येश झा और महासचिव डॉ. जयेंद्र सिंह जाधव ने आयोजन की रूपरेखा और उद्देश्य पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम में वैश्विक हिंदी परिवार के अध्यक्ष अनिल जोशी की उपस्थिति उल्लेखनीय रही। इस मंच पर विभिन्न सत्रों में भारतीय भाषाओं की वर्तमान स्थिति, उनके विकास की संभावनाएँ तथा डिजिटल युग में भाषाओं की भूमिका पर विचार-विमर्श किया गया। विशेष रूप से “विकसित भारत के निर्माण में भारतीय भाषाओं की भूमिका” विषय पर आयोजित परिसंवाद ने सभी प्रतिभागियों का ध्यान आकर्षित किया।
इस आयोजन में विशेषज्ञ वक्ताओं के रूप में दिल्ली से वैश्विक हिंदी परिवार के अध्यक्ष ऋषि कुमार शर्मा, पूर्व राजभाषा निदेशक (रेल मंत्रालय), डॉ. वरुण कुमार, जे.एन.यू. के भारतीय भाषा विभाग के अध्यक्ष प्रो. सुधीर प्रताप सिंह तथा दिल्ली विश्वविद्यालय के भारतीय भाषा विभाग के अध्यक्ष प्रो. रवि टेकचंदानी ने अपने विचार प्रस्तुत किए। इनके अतिरिक्त प्रो. सुमित मीणा, डॉ. शिवम शर्मा, डॉ. प्रखर शर्मा तथा पुणे से स्वरंगी साने भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे।
दो दिनों तक चले इस उत्सव में विभिन्न सत्रों, विचार-गोष्ठियों और संवाद कार्यक्रमों के माध्यम से भारतीय भाषाओं के महत्व को रेखांकित किया गया। वक्ताओं ने इस बात पर बल दिया कि भारतीय भाषाएँ केवल संप्रेषण का माध्यम ही नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक पहचान और राष्ट्रीय एकता की आधारशिला हैं। नई शिक्षा नीति और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से भाषाओं को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया।
समापन सत्र में यह निष्कर्ष निकला कि यदि भारत को वास्तव में विकसित राष्ट्र बनाना है, तो भारतीय भाषाओं को शिक्षा, प्रशासन और तकनीक के क्षेत्र में व्यापक रूप से अपनाना होगा। “भारतीय भाषा संगम 2.0” न केवल एक आयोजन रहा, बल्कि भारतीय भाषाओं के पुनर्जागरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध हुआ।

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