मैथिली सोसायटी द्वारा ‘जानकी नवमी महोत्सव’ सिंगापुर 2026 के तीसरे संस्करण का सफल आयोजन

सिंगापुर स्थित आर्य समाज भवन में मैथिली सोसायटी (सिंगापुर) के द्वारा जानकी नवमी महोत्सव 2026 का सफल आयोजन किया गया। मैथिली भाषा, मिथिलाक्षर लिपि, लोक-संस्कृति, लोक-कला, लोक-संगीत और मिथिला की समृद्ध परंपरा को संरक्षित एवं संवर्धित करने के उद्धेश्य से गठित मैथिली सोसायटी (सिंगापुर) के द्वारा पिछले तीन वर्षों से लगातार माँ जानकी के अवतरण दिवस का आयोजन हर्षोल्लास के साथ किया जा रहा है।

मैथिली सोसायटी (सिंगापुर) की रचनात्मक निदेशक श्रीमती आराधना झा श्रीवास्तव ने जानकी नवमी महोत्सव सिंगापुर के आयोजन की प्रेरणा के बारे में बताते हुए कहा कि, रामनवमी की महिमा से तो जग परिचित हैं किन्तु वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को माता सीता के प्राकट्य दिवस के प्रति अपेक्षाकृत उदासीनता का भाव रहता है।

माता सीता के नाम से स्वयं को जोड़कर परिचय देने वाले मैथिल जनों के साथ ही स्थानीय भारतीय समुदाय को माँ जानकी, मैथिली भाषा और मिथिला की समृद्ध सांस्कृतिक चेतना से परिचित करवाने के व्यापक उद्देश्य के वर्ष 2024 में जानकी नवमी महोत्सव सिंगापुर की पहल की गई।

मैथिली सोसायटी (सिंगापुर) के संस्थापक श्री अंजनी कुमार चौधरी ने इसकी स्थापना और उद्देश्य के बारे में बताते हुए  अब तक की यात्रा, सहयात्री एवं सहयोगियों के योगदान की विस्तार से चर्चा की। ‘मैथिल्स इन सिंगापुर’ के नाम से पहचान बनाने वाला यह सामुदायिक समूह अप्रैल 2026 में मैथिली सोसायटी (सिंगापुर) के रूप में पंजीकृत हो चुका है। ‘जानकी नवमी महोत्सव सिंगापुर 2026’, नव गठित मैथिली सोसायटी (सिंगापुर) का पहला आधिकारिक सांस्कृतिक एवं सामुदायिक आयोजन था। इस अवसर पर प्रबंधन-समिति के अध्यक्ष डॉ. सुमित कुमार सोनू, सचिव श्रीमती मनीषा मिश्रा एवं कोषाध्यक्ष श्री राजीव मिश्रा के साथ ही, कोर समिति के सभी सदस्यों – श्रीमती ममता मंडल, श्री समीर कुमार, श्रीमती ममता झा, श्रीमती अर्चना झा एवं श्री संदीप झा का उपस्थित अतिथियों से औपचारिक परिचय करवाया गया।

माँ जानकी के अवतरण दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित इस आनंदोत्सव में मैथिल समुदाय के साथ ही स्थानीय समुदाय के गणमान्य प्रतिनिधियों की भी भागीदारी रही। भारतीय उच्चायोग सिंगापुर में द्वितीय सचिव के रूप में कार्यरत श्री अरविंद श्रीवास्तव अपनी पत्नी श्रीमती ज्योति श्रीवास्तव के साथ कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में सम्मिलित हुए। अपने उद्बोधन में उन्होंने सिंगापुर के स्थानीय भारतीय समुदाय द्वारा आयोजित हो रहे सांस्कृतिक कार्यक्रमों के महत्त्व को रेखांकित करते हुए आयोजकों और सहभागियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दी। विशिष्ट अतिथि के रूप में पधारे डीएवी हिंदी स्कूल सिंगापुर के प्रधानाचार्य और आर्य समाज सिंगापुर के संस्थापक आदरणीय श्री ओम प्रकाश राय ने कहा कि, अपने सुदीर्घ जीवनकाल में यह पहला अवसर है जब वे माता सीता के जन्मोत्सव में सम्मिलित हुए हैं। नई पीढ़ी में अपनी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक धरोहर के प्रति जागरूकता एवं समर्पण को देखकर उन्हें सुखद अनुभूति हुई। मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथि का सम्मान मिथिला चित्रकला से सजे दोपटा के द्वारा किया गया। बिझार सिंगापुर की अध्यक्ष श्रीमती शिवानी खीरवाल और भोजपुरी एसोसिएशन सिंगापुर के अध्यक्ष श्री अरुण दीक्षित ने सपत्नी कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।

दीप प्रज्ज्वलन के समय तनुष झा एवं अथर्व कोरलवाला द्वारा विघ्नहर्ता भगवान विनायक की वन्दना और आन्या अंजनी चौधरी द्वारा माता सीता की आराधना के साथ इस सांस्कृतिक कार्यक्रम का शुभारम्भ किया गया। श्री पार्थ कोरलवाला ने माता सीता को समर्पित मैथिली गीत, ‘मिथिला के धिया सिया’ का सुमधुर गायन किया और उनकी धर्मपत्नी श्रीमती क्षमा कोरलवाला ने माता सीता के जन्मोत्सव गीत पर सुंदर नृत्य प्रस्तुति दी। रायशा मिश्रा और रिद्धिमा मिश्रा ने अपनी माँ श्रीमती रितु मिश्रा के साथ भावार्थ बताते हुए ‘जनकपुरी आज आनंद छायो री’ गीत के गायन से सबका मन मोह लिया। ईनिका झा ने अपनी माँ श्रीमती अर्चना झा और नानी आदरणीय मंजू झा के साथ माँ भगवती से सुधि लेने की सुंदर प्रार्थना की। वागीशा वाणी और ईप्शिता वाणी ने अपनी माँ श्रीमती अर्चना कुमारी के साथ मिथिला महिमा गीत पर भरतनाट्यम् और कत्थक, इन दोनों शास्त्रीय नृत्य-शैलियों के सुंदर समन्वय पर आधारित मनमोहक नृत्य की प्रस्तुति से दर्शकों की प्रशंसा बटोरी।  सक्षम पोद्दार ने अपनी पहली मंचीय प्रस्तुति में ‘श्रीरामचन्द्र कृपालु भजु मन’ की धुन पर अपने सुरीले बाँसुरी-वादन से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। आद्या श्रीवास्तव ने भरतनाट्यम् नृत्य शैली में श्रीराम और माता सीता के अनन्य भक्त संकटमोचन हनुमान जी के कीर्तन की मनमोहक प्रस्तुति दी। मुख्य अतिथि श्री अरविन्द श्रीवास्तव एवं विशिष्ट अतिथि श्री ओमप्रकाश राय के द्वारा जानकी नवमी महोत्सव सिंगापुर 2026 में अपना कलात्मक योगदान देने वाले सभी युवा कलाकारों एवं आदरणीय मंजू झा को स्मृति-चिह्न से सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण – मिथिला की पारंपरिक वेशभूषा में पधारे श्री राजीव मिश्रा और श्री पंकज राय का जीवंत संचालन रहा जिसमें निहित हास-परिहास की दर्शकों ने मुक्त कंठ से प्रशंसा की। श्री पंकज राय ने अपनी विशिष्ट शैली में जनकपुर संस्मरण और अपने बचपन के किस्सों की रोचक प्रस्तुति से दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया। श्री अंजनी कुमार चौधरी ने माता सीता के प्राकट्य उत्सव पर आधारित स्वरचित कविता की लयबद्ध प्रस्तुति से दर्शकों का मन मोह लिया। श्रीमती आराधना झा श्रीवास्तव ने जानकी नवमी विशेष स्वरचित मैथिली गीत से दर्शकों को भाव विभोर कर दिया। जानकी नवमी महोत्सव सिंगापुर के आयोजन की प्रेरणा के बारे में बताते हुए उन्होंने माता सीता को समर्पित पौराणिक संदर्भों की चर्चा करने के साथ ही,  मैथिली भाषा में रचित ‘जानकी रामायण’ एवं ‘मिथिला भाषा रामायण’ में माता सीता के प्राकट्य से जुड़े प्रसंगों का उल्लेख किया।

श्रद्धासुमन के अन्तर्गत श्री राजीव मिश्रा, श्री पंकज राय, श्रीमती क्षमा कोरलवाला और श्रीमती मनीषा मिश्रा ने अपने जन्मदाता एवं जन्मदात्री की पुण्य स्मृतियों को साझा किया। वागीशा वाणी ने श्रीमती मनीषा मिश्रा के बाबूजी हिंदी और मैथिली के प्रसिद्ध साहित्यकार स्वर्गीय श्री कीर्तिनारायण मिश्र की लिखी हुई मैथिली बाल कविता – प्रणाम बाबा का पाठ किया। इसके बाद उन्होंने बुआ श्रीमती विभा कुमारी द्वारा अपने बाबूजी के लिए लिखी कविता का वाचन किया। व्यक्तिगत पीड़ा की इस साझेदारी ने मैथिली समाज को एक परिवार की तरह भाव बंधन में बाँध दिया। 

माँ जानकी की सामूहिक आरती और अगले वर्ष एक नई ऊर्जा के साथ माँ जानकी के अवतरण दिवस के आयोजन के संकल्प के साथ ही इस सांस्कृतिक कार्यक्रम का सुंदर समापन हुआ। मंच की साज-सज्जा श्रीमती रितु मिश्रा एवं तकनीकी संचालन श्री नवीन कुमार के द्वारा किया गया। उपस्थित अतिथियों और स्नेहिल मैथिलजनों ने मिथिला के पारंपरिक पकवानों के साथ सामुदायिक मिलन का भरपूर आनंद लिया और जानकी नवमी महोत्सव सिंगापुर 2026 की मधुर स्मृतियों को समेटकर हँसते-मुस्कुराते चेहरों के साथ अपने-अपने घरों की ओर चल दिए।

रिपोर्ट – आराधना झा श्रीवास्तव

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