“उदंत मार्त्तण्ड” द्विशताब्दी समारोह के 200 वर्ष पूर्ण होने पर ऐतिहासिक राष्ट्रीय संगोष्ठी

भारतीय भाषा परिषद, कोलकाता के सौजन्य एवं आमंत्रण पर दिनांक 23 मई 2026 को आयोजित “उदंत मार्त्तण्ड द्विशताब्दी समारोह” में अतिथि वक्ता के रूप में सहभागिता करने का सुअवसर प्राप्त हुआ। “हिंदी पत्रकारिताः अतीत और भविष्य” विषय पर आयोजित यह राष्ट्रीय सेमिनार अत्यंत ज्ञानवर्धक, विचारोत्तेजक एवं ऐतिहासिक महत्व का आयोजन रहा। इस गरिमामयी कार्यक्रम में देशभर से आए विद्वानों, पत्रकारों, शिक्षाविदों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों की उल्लेखनीय उपस्थिति ने आयोजन को विशेष ऊँचाई प्रदान की। उल्लेखनीय है कि हिंदी के प्रथम समाचार पत्र “उदंत मार्त्तण्ड” का प्रकाशन 30 मई 1826 को कोलकाता से प्रारम्भ हुआ था। इस ऐतिहासिक उपलब्धि के 200 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित यह द्विशताब्दी समारोह हिंदी पत्रकारिता की समृद्ध परंपरा, उसके संघर्ष, विकास और भविष्य की संभावनाओं पर गंभीर विमर्श का महत्वपूर्ण मंच बना। कार्यक्रम में हिंदी पत्रकारिता की ऐतिहासिक यात्रा को स्मरण करते हुए उसके सामाजिक, सांस्कृतिक और लोकतांत्रिक योगदान पर विस्तृत चर्चा की गई। समारोह में देश के प्रख्यात पत्रकार एवं जनसत्ता के पूर्व संपादक आदरणीय श्री ओम थानवी जी की गरिमामयी उपस्थिति विशेष आकर्षण का केंद्र रही। उनके वक्तव्य ने पत्रकारिता के मूल्यों, निष्पक्षता और वर्तमान समय की चुनौतियों पर गंभीर चिंतन प्रस्तुत किया। वहीं एनडीटीवी के वरिष्ठ संपादक आदरणीय श्री प्रियदर्शन जी ने डिजिटल युग में पत्रकारिता के बदलते स्वरूप, भाषा की भूमिका तथा मीडिया की सामाजिक जिम्मेदारियों पर अपने विचार व्यक्त किए। भारतीय भाषा परिषद के निदेशक आदरणीय श्री शंभूनाथ जी ने हिंदी भाषा और पत्रकारिता के ऐतिहासिक विकास पर महत्वपूर्ण दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। इसके अतिरिक्त अनेक वरिष्ठ एवं प्रतिष्ठित स्थानीय पत्रकारों की सहभागिता ने कार्यक्रम को बहुआयामी स्वर प्रदान किया। इस विशेष अवसर पर हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्षों की गौरवशाली यात्रा पर आधारित एक महत्वपूर्ण पुस्तक का लोकार्पण भी सम्पन्न हुआ। पुस्तक में हिंदी पत्रकारिता के विकासक्रम, उसके प्रमुख पड़ावों, सामाजिक प्रभावों एवं समकालीन चुनौतियों का विस्तृत विवेचन किया गया है। यह लोकार्पण समारोह कार्यक्रम का अत्यंत महत्वपूर्ण एवं स्मरणीय क्षण रहा। कार्यक्रम में कोलकाता की विभिन्न साहित्यिक, सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों के साथ-साथ विश्वविद्यालयों के विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों की उत्साहपूर्ण भागीदारी देखने को मिली। विद्यार्थियों की जिज्ञासा, सहभागिता और संवाद ने यह सिद्ध किया कि हिंदी पत्रकारिता का भविष्य नई पीढ़ी के हाथों में सुरक्षित एवं संभावनाओं से परिपूर्ण है। राष्ट्रीय सेमिनार का संपूर्ण आयोजन अत्यंत सुव्यवस्थित, गरिमामयी एवं सार्थक रहा। कार्यक्रम के सफल आयोजन हेतु संयोजक आदरणीय श्री संजय जायसवाल जी तथा भारतीय भाषा परिषद, कोलकाता की समस्त टीम हार्दिक बधाई एवं साधुवाद की पात्र है। उनके प्रयासों ने हिंदी पत्रकारिता के इतिहास और उसके भविष्य पर गंभीर एवं सार्थक विमर्श के लिए एक प्रभावी मंच प्रदान किया। यह आयोजन न केवल हिंदी पत्रकारिता के गौरवशाली अतीत का उत्सव था, बल्कि उसके उज्ज्वल भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी सिद्ध हुआ।

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