साहित्य, संवेदना और सृजन का सुंदर संगम : साहित्य संगम मंच की मासिक काव्यगोष्ठी

दिनांक 26.05.2026 को साहित्यसंगममंच की मासिक काव्यगोष्ठी अत्यंत गरिमामयी एवं शानदार वातावरण में सफलतापूर्वक सम्पन्न हुई। यह आयोजन साहित्य, संवेदनाओं और रचनात्मक अभिव्यक्तियों का सुंदर संगम रहा, जिसमें अनेक प्रतिष्ठित रचनाकारों एवं साहित्य प्रेमियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम का वातावरण साहित्यिक ऊर्जा, आत्मीयता और सृजनात्मक उत्साह से परिपूर्ण था। काव्यगोष्ठी की अध्यक्षता मंच की संस्थापिका आदरणीया शिखा खुराना जी ने अत्यंत प्रभावशाली ढंग से की। उनके साहित्य प्रेम, सरल व्यक्तित्व एवं साहित्यकारों के प्रति सम्मान की भावना ने कार्यक्रम को विशेष ऊँचाई प्रदान की। कार्यक्रम का संयोजन आदरणीया अल्का गर्ग जी द्वारा अत्यंत सुव्यवस्थित एवं सराहनीय रूप से किया गया। वहीं आदरणीया सुनीला नारंग जी ने अपने मधुर, प्रभावशाली एवं सहज संचालन से पूरे आयोजन को जीवंत बनाए रखा और श्रोताओं को अंत तक बांधे रखा। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में आदरणीया अल्का सिन्हा जी की गरिमामयी उपस्थिति कार्यक्रम का विशेष आकर्षण रही। अल्का सिन्हा जी साहित्य जगत का एक चमकता हुआ सितारा हैं, जिनका नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है। उनकी अनेक महत्वपूर्ण कृतियाँ प्रकाशित हो चुकी हैं तथा उन्हें साहित्य क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान हेतु अनेक प्रतिष्ठित पुरस्कारों एवं सम्मानों से सम्मानित किया जा चुका है। उनके प्रेरणादायी विचारों एवं साहित्यिक अनुभवों ने उपस्थित सभी रचनाकारों को नई ऊर्जा एवं दिशा प्रदान की। कार्यक्रम में उपस्थित सभी कवियों एवं रचनाकारों ने अपनी उत्कृष्ट रचनाओं का प्रभावशाली काव्य पाठ किया। किसी ने श्रृंगार रस से श्रोताओं का मन मोह लिया तो किसी ने सामाजिक सरोकारों, मानवीय संवेदनाओं और जीवन के विविध पहलुओं को अपनी कविताओं के माध्यम से अत्यंत सुंदर ढंग से प्रस्तुत किया। हर प्रस्तुति में भाव, भाषा और अभिव्यक्ति की अद्भुत छटा देखने को मिली। श्रोताओं ने भी प्रत्येक रचना का भरपूर आनंद लिया तथा तालियों की गड़गड़ाहट से रचनाकारों का उत्साहवर्धन किया। ऐसी साहित्यिक काव्यगोष्ठियों में सम्मिलित होकर न केवल साहित्य के विविध आयामों को समझने का अवसर मिलता है, बल्कि वरिष्ठ साहित्यकारों के अनुभवों से बहुत कुछ सीखने को भी मिलता है। यह आयोजन साहित्य प्रेमियों के लिए प्रेरणा, सीख और आत्मिक आनंद का सुंदर माध्यम बना।
अंत में आदरणीया शिखा खुराना जी का हृदय से बहुत-बहुत आभार एवं धन्यवाद, जिन्होंने मुझे इस सुंदर एवं प्रेरणादायी साहित्यिक आयोजन का हिस्सा बनने का अवसर प्रदान किया। साहित्यसंगममंच निरंतर इसी प्रकार साहित्य सेवा करता रहे, यही मंगलकामना है।
रिपोर्ट:— सीमा पूरबा
