सुधा मूर्ति की पुस्तक “टाइड्ज़ ऑफ टाइम ’ का भव्य लोकार्पण”


हाल ही में एक अत्यंत गरिमामय एवं ऐतिहासिक साहित्यिक-सांस्कृतिक समारोह में राज्यसभा सांसद एवं इन्फोसिस फाउंडेशन की अध्यक्षा, पद्म विभूषण सम्मानित समाजसेवी एवं लेखिका सुधा मूर्ति जी की नवीन पुस्तक “टाइड्ज़ ऑफ टाइम : भारत्स हिस्ट्री थ्रू म्यूरल्स इन हाउसेज़ इन पार्लियामेंट” का भव्य लोकार्पण संपन्न हुआ। लाल और सुनहरे आवरण से सुसज्जित यह पुस्तक भारतीय संसद भवनों में स्थापित भित्ति-चित्रों के माध्यम से भारत के समृद्ध इतिहास, संस्कृति और सभ्यता की अद्भुत यात्रा का दस्तावेज प्रस्तुत करती है। इस विशेष अवसर पर भारत के नव नियुक्त उच्चायुक्त, उद्योगपति नारायण मूर्ति, ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री ऋषि सुनक एवं उनकी पत्नी अक्षता मूर्ति, बैरोनेस उषा प्रशार, लॉर्ड राज लूम्बा सहित अनेक प्रतिष्ठित अतिथियों एवं गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा को और अधिक बढ़ा दिया। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण स्वयं सुधा मूर्ति जी का उद्बोधन रहा। उन्होंने पुस्तक की परिकल्पना, संसद भवनों में स्थित भित्ति-चित्रों के ऐतिहासिक महत्व तथा उनके माध्यम से भारतीय इतिहास के विभिन्न कालखंडों को अत्यंत रोचक शैली में प्रस्तुत किया। उनकी सहज, सरल और आत्मीय अभिव्यक्ति ने उपस्थित श्रोताओं को आरंभ से अंत तक बांधे रखा। उनके वक्तव्य के दौरान बार-बार गूंजती तालियों ने यह प्रमाणित किया कि श्रोता उनके विचारों और प्रस्तुति से कितने प्रभावित थे। सुधा मूर्ति जी ने बताया कि संसद भवन केवल लोकतंत्र का केंद्र नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक चेतना का भी प्रतीक है। वहाँ स्थापित भित्ति-चित्र भारत की हजारों वर्षों की सभ्यता, संघर्ष, उपलब्धियों और सांस्कृतिक विरासत को जीवंत रूप में प्रस्तुत करते हैं। उनकी पुस्तक इन चित्रों के पीछे छिपी ऐतिहासिक कथाओं और संदर्भों को आम पाठकों तक पहुँचाने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है। कार्यक्रम का उत्कृष्ट संचालन डॉ. नंदकुमार जी तथा उनकी समर्पित टीम ने किया। शांति वेंकटेश, पार्वती जी और अन्य सहयोगियों ने आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सुव्यवस्थित प्रबंधन, आत्मीय आतिथ्य और गरिमामय वातावरण ने समारोह को यादगार बना दिया। इस अवसर पर प्रसिद्ध कवयित्री एवं साहित्यकार डॉ. कीर्ति काले तथा उनके पति श्रीकांत जी भी उपस्थित रहे। साहित्य, संस्कृति, इतिहास और सार्वजनिक जीवन से जुड़े अनेक विशिष्ट व्यक्तियों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को एक विशिष्ट बौद्धिक एवं सांस्कृतिक आयाम प्रदान किया। समारोह के अंत में सभी अतिथियों के लिए रात्रिभोज की व्यवस्था की गई। स्वादिष्ट व्यंजनों के बीच अनौपचारिक संवादों का सिलसिला देर तक चलता रहा। इस प्रकार ज्ञान, इतिहास, साहित्य और आत्मीयता से परिपूर्ण यह आयोजन सभी उपस्थित जनों के लिए एक अविस्मरणीय अनुभव बन गया। यह कार्यक्रम न केवल एक पुस्तक लोकार्पण समारोह था, बल्कि भारतीय इतिहास, सांस्कृतिक विरासत और संसदीय परंपराओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने वाला एक महत्वपूर्ण अवसर भी सिद्ध हुआ।
रिपोर्ट :— अजय शर्मा
