पूर्वोत्तर भारत की जीवित सांस्कृतिक विरासत से साक्षात्कार

राष्ट्रीय सांस्कृतिक मानचित्रण मिशन (एन.एम.सी.एम.) एवं उत्तर-पूर्वी हस्तशिल्प एवं हथकरघा विकास निगम लिमिटेड (एन.ई.एच.एच.डी.सी.) के सहयोग से आयोजित प्रदर्शनी “लिविंग हेरिटेज इन मेटल, बैम्बू एंड क्ले : ट्रेडिशनल यूटेन्सिल्स ऑफ नॉर्थईस्ट इंडिया” का शुभारम्भ पद्मश्री टेची गुबिन एवं आईजीएनसीए के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने किया। प्रदर्शनी में धातु, बांस और मिट्टी से निर्मित पूर्वोत्तर भारत के पारम्परिक बर्तनों के माध्यम से वहां की लोकसंस्कृति, जीवन-पद्धति और प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व की अनूठी परम्परा को प्रस्तुत किया गया। उद्घाटन के उपरांत अग्रगामी डांस एंड सिने ग्रुप की मनोहारी सांस्कृतिक प्रस्तुति ने पूर्वोत्तर की जीवंत सांस्कृतिक छटा से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। केंद्र के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने कहा कि परम्परागत बर्तनों की संस्कृति धीरे-धीरे हमारे घरों से लुप्त हो रही है और यह प्रदर्शनी हमें अपनी जड़ों तथा पारम्परिक ज्ञान के निकट ले जाने का कार्य करेगी। पद्मश्री टेची गुबिन ने कहा कि सांस्कृतिक आदान-प्रदान आपसी समझ और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करता है तथा पूर्वोत्तर भारत की संस्कृति को देशभर में व्यापक रूप से परिचित कराया जाना चाहिए।

उर्वरक विभाग की संयुक्त सचिव सुश्री बंदना प्रेयशी ने कहा कि पूर्वोत्तर भारत में संस्कृति केवल उत्सवों तक सीमित नहीं, बल्कि लोगों के दैनिक जीवन और स्वभाव का अभिन्न हिस्सा है। केंद्र के डीन प्रो. (डॉ.) रमेश चंद्र गौड़ ने सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में दस्तावेज़ीकरण के महत्व पर बल देते हुए कहा कि आने वाली पीढ़ियों के लिए परम्पराओं का प्रलेखन अत्यंत आवश्यक है। एन.एम.सी.एम. के निदेशक डॉ. मयंक शेखर ने कार्यक्रम के बारे में जानकारी दी। एनईएचएचडीसी के महेंद्र जोशी भी मौजूद रहे। इस अवसर पर “बेल-मेटल क्राफ्ट ऑफ असम” एवं “चितेरी आर्ट ऑफ बुन्देलखण्ड” मोनोग्राफ का लोकार्पण भी किया गया।
