गगन गिल के रचना-संसार पर वैश्विक हिंदी परिवार का विशेष संवाद संपन्न

रविवार, दिनांक 19 जुलाई 2026, वैश्विक हिंदी परिवार, केन्द्रीय हिन्दी संस्थान, भारतीय भाषा मंच, अंतरराष्ट्रीय सहयोग परिषद एवं वातायन के संयुक्त तत्वावधान में साहित्य अकादमी सम्मानित वरिष्ठ कवयित्री एवं लेखिका गगन गिल के रचना-संसार, लेखन-शैली, सृजन-प्रक्रिया और साहित्यिक दृष्टि पर एक विशेष ऑनलाइन संवाद का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम में भारत सहित जापान, कनाडा, ब्रिटेन, जर्मनी, नीदरलैंड, उज्बेकिस्तान आदि देशों के साहित्यकारों, शोधार्थियों और हिंदी प्रेमियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। कार्यक्रम का संचालन कनाडा की प्रतिष्ठित साहित्यकार एवं वैश्विक हिंदी परिवार की अंतरराष्ट्रीय संयोजिका डॉ. शैलजा सक्सेना ने किया, जबकि प्रारंभिक बीज वक्तव्य सुश्री अनीता वर्मा ( समीक्षक व स्तंभकार ) ने प्रस्तुत किया। समाहार वक्तव्य वैश्विक हिंदी परिवार के अध्यक्ष अनिल जोशी ने दिया। संवाद का संचालन करते हुए डॉ. शैलजा सक्सेना ने गगन गिल के साहित्यिक व्यक्तित्व और कृतित्व का विस्तृत परिचय दिया। उन्होंने उनकी प्रमुख कृतियों, रचना-दृष्टि, भाषा, स्त्री-अनुभव, आध्यात्मिकता और मानवीय संवेदनाओं पर आधारित लेखन के विविध पक्षों को रेखांकित करते हुए क्रमबद्ध प्रश्नों के माध्यम से उनके सृजन-संसार को सामने रखा। संवाद में गगन गिल ने अपने लेखन की प्रेरणा, रचना-प्रक्रिया, स्त्री-विमर्श, भाषा, साहित्य और जीवन-दर्शन पर विस्तार से विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि साहित्य किसी पूर्वनिर्धारित योजना का परिणाम नहीं, बल्कि गहन जीवनानुभव और आत्मसंवाद से जन्म लेता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि लेखक के लिए सबसे बड़ी चुनौती अपने भीतर के सत्य को पहचानना और उसे ईमानदारी से अभिव्यक्त करना है। उन्होंने स्त्री-विमर्श को व्यापक मानवीय दृष्टि से जोड़ते हुए कहा कि साहित्य का उद्देश्य मनुष्य की संवेदना का विस्तार करना है। संवाद के दौरान गगन गिल ने अपनी चर्चित कृति ‘अवाक’ की रचना-यात्रा, कैलाश-मानसरोवर यात्रा के अनुभव, चेतना और अवचेतना के संबंध तथा अपने द्वारा प्रतिपादित ‘आठवें स्वर’ की अवधारणा पर भी विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सृजन की प्रक्रिया बाहरी घटनाओं से अधिक भीतर की अनुभूतियों से संचालित होती है और लेखक को अपनी अंतःचेतना पर विश्वास रखना चाहिए।

कार्यक्रम के आरंभ में सुश्री अनीता वर्मा ने सभी दर्शकों का स्वागत करते हुए कहा कि वैश्विक हिंदी परिवार पिछले छह वर्षों से प्रत्येक रविवार नियमित साहित्यिक संवादों का आयोजन कर रहा है। उन्होंने इस विशेष संवाद को वैश्विक हिन्दी परिवार की एक महत्त्वपूर्ण पहल बताते हुए कहा कि इसका उद्देश्य गगन गिल के रचना-संसार, उनकी साहित्यिक दृष्टि और लेखन-यात्रा को निकट से समझना है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के दिनों की स्मृतियों को साझा करते हुए गगन गिल की गंभीर रचनाशीलता, पत्रकारिता, हार्वर्ड विश्वविद्यालय की फेलोशिप तथा उनकी चर्चित कृतियों का उल्लेख किया और कहा कि उनका साहित्य भारतीय संवेदना को वैश्विक परिप्रेक्ष्य प्रदान करता है। समाहार वक्तव्य में अनिल जोशी ने कहा कि यह संवाद केवल गगन गिल के साहित्य को समझने का अवसर नहीं था, बल्कि उनकी रचना-प्रक्रिया, सृजन-दृष्टि और साहित्यिक चिंतन को जानने का भी एक महत्त्वपूर्ण माध्यम सिद्ध हुआ। उन्होंने डॉ. शैलजा सक्सेना की गहन तैयारी, सुश्री अनीता वर्मा के प्रभावशाली बीज वक्तव्य तथा गगन गिल के विचारपूर्ण उत्तरों की सराहना की। उन्होंने कहा कि जापान, कनाडा, ब्रिटेन, जर्मनी, नीदरलैंड, उज्बेकिस्तान सहित अनेक देशों तथा प्रश्नोत्तर सत्र में देश-विदेश से जुड़े साहित्यकारों, अध्यापकों, शोधार्थियों और पाठकों ने अनेक महत्त्वपूर्ण प्रश्न पूछे, जिनका गगन गिल ने अत्यंत आत्मीयता, स्पष्टता और गहन संवेदनशीलता के साथ उत्तर दिया। इस सत्र ने संवाद को और अधिक सार्थक एवं विचारोत्तेजक बना दिया।
रिपोर्ट :— अजय शर्मा
