गोवा में सजी ‘सुर और साज़’ की यादगार शाम, शीन काफ़ निज़ाम से हुई आत्मीय गुफ़्तगू

गोवा। कुछ शामें बीत जाती हैं, जबकि कुछ अपनी स्मृतियों में लंबे समय तक ठहरी रहती हैं। गोवा में आयोजित ‘सुर और साज़’ की पहली शाम भी ऐसी ही एक यादगार संध्या रही, जो शायरी, साहित्य, विचार, आत्मीयता और खूबसूरत संवाद से सजी रही। इस अवसर पर पद्मश्री सम्मानित उर्दू कवि एवं साहित्यकार शीन काफ़ निज़ाम की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम को विशेष बना दिया।

प्रभा खैतान फ़ाउंडेशन द्वारा अहसास वुमन, गोवा के सहयोग से आयोजित इस विशेष साहित्यिक संध्या में शीन काफ़ निज़ाम के साथ श्रीमती श्रुति जैसवाल जुवारकर ने आत्मीय एवं सार्थक संवाद किया। बातचीत के दौरान शायरी, साहित्य, जीवन-अनुभवों, स्मृतियों, रचनात्मकता, भाषा और सुनने की कला जैसे विविध विषयों पर विचार साझा किए गए।

इस गुफ़्तगू की खासियत यह रही कि श्रोताओं को केवल एक प्रसिद्ध शायर के साहित्यिक व्यक्तित्व से परिचित होने का अवसर नहीं मिला, बल्कि उनके सृजन के पीछे मौजूद संवेदनशील मनुष्य, उसके अनुभवों और उसकी रचनात्मक यात्रा को भी करीब से समझने का अवसर मिला। संवाद के दौरान किस्सों और अनुभवों के साथ विचारों की सहज प्रस्तुति ने पूरे वातावरण को आत्मीय बना दिया।

कार्यक्रम में भाषा और संवेदना के संबंध पर भी विशेष रूप से चर्चा हुई। यह बात उभरकर सामने आई कि किसी भाषा को समझने का रास्ता केवल उसके शब्दों और पहचान से नहीं, बल्कि एहसास, सुनने, समझने और जुड़ने की क्षमता से होकर गुजरता है। विचारों, अनुभवों, सहज मुस्कुराहटों और गहरी बातों से भरी इस बातचीत ने उपस्थित श्रोताओं को अंत तक बांधे रखा। औपचारिक सत्र समाप्त होने के बाद भी लोगों के बीच संवाद का सिलसिला जारी रहा।

कार्यक्रम के दौरान शीन काफ़ निज़ाम को स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया। यह सम्मान श्रीमती नीलिमा मिराजकर, सन एस्टेट्स की स्वामिनी, द्वारा प्रदान किया गया।

हिल्टन गोवा रिज़ॉर्ट, सैपेम, कैंडोलिम में आयोजित यह संध्या साहित्य, शायरी, विचार और मानवीय जुड़ाव का सुंदर उत्सव बन गई। कार्यक्रम के समापन पर श्रीमती श्रुति जैसवाल जुवारकर ने धन्यवाद ज्ञापन किया और सभी अतिथियों, सहयोगियों तथा कार्यक्रम को सफल बनाने में योगदान देने वाले सभी लोगों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया।

‘सुर और साज़’ की यह पहली शाम अपने पीछे साहित्य और संवाद की ऐसी स्मृतियाँ छोड़ गई, जिन्हें उपस्थित लोग लंबे समय तक याद रखेंगे। सचमुच, यह एक ऐसी शाम थी, जिसे कोई जल्दी ख़त्म होते नहीं देखना चाहता था।

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