दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी में ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ की 84वीं वर्षगांठ पर संगोष्ठी आयोजित

नई दिल्ली। भारत छोड़ो आंदोलन की 84वीं वर्षगांठ के अवसर पर दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी द्वारा ‘भारत छोड़ो आंदोलन में युवाओं, महिलाओं एवं विद्यार्थियों की भूमिका’ विषय पर विशेष संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में स्वतंत्रता आंदोलन में युवाओं, महिलाओं और विद्यार्थियों के योगदान तथा वर्तमान समय में उनके राष्ट्र निर्माण में दायित्व पर विस्तार से चर्चा की गई।

कार्यक्रम की मुख्य वक्ता डॉ. काजल पवार ने भारत छोड़ो आंदोलन में युवाओं, महिलाओं एवं विद्यार्थियों की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत की स्वतंत्रता असंख्य स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग, संघर्ष और बलिदान का परिणाम है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन को व्यापक जन-आंदोलन बनाने में युवाओं, विद्यार्थियों और महिलाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही। उन्होंने अरुणा आसफ अली, सुचेता कृपलानी और उषा मेहता जैसी महान स्वतंत्रता सेनानियों के साहस, संघर्ष और योगदान को विशेष रूप से रेखांकित किया।

इस अवसर पर दिल्ली लाइब्रेरी बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सुमीत भसीन ने भारत छोड़ो आंदोलन के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस आंदोलन ने पूरे देश में स्वतंत्रता की भावना को नई शक्ति प्रदान की। देशवासियों ने एकजुट होकर स्वतंत्रता प्राप्ति के संकल्प को मजबूत किया।

डॉ. सुमीत भसीन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर दिए गए संदेश का उल्लेख करते हुए कहा कि आज देश को प्रगति में बाधक बुराइयों के विरुद्ध भी उसी दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ने की आवश्यकता है। उन्होंने ‘भ्रष्टाचार छोड़ो, परिवारवाद छोड़ो और जातिवाद छोड़ो’ जैसे संदेशों का उल्लेख करते हुए कहा कि देश को इन बुराइयों से मुक्त करना तथा राष्ट्र निर्माण में प्रत्येक नागरिक की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना समय की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि आजादी का अर्थ केवल विदेशी शासन से मुक्ति नहीं है, बल्कि देश और समाज को भ्रष्टाचार, परिवारवाद, जातिवाद, भेदभाव तथा अन्य सामाजिक कुरीतियों से मुक्त कर एक मजबूत, समृद्ध और विकसित राष्ट्र का निर्माण करना भी है। उन्होंने युवाओं और विद्यार्थियों से स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग, संघर्ष और राष्ट्रभक्ति से प्रेरणा लेकर राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।

कार्यक्रम के अंत में पुस्तकालय एवं सूचना अधिकारी ने मुख्य वक्ता, अतिथियों, पाठकों एवं सभी उपस्थितजनों के प्रति आभार व्यक्त किया। संगोष्ठी में दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी के अधिकारीगण, कर्मचारीगण, पाठक एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम ने स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास को नई पीढ़ी तक पहुँचाने और राष्ट्र निर्माण के प्रति युवाओं में जागरूकता बढ़ाने का महत्वपूर्ण संदेश दिया।

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