बर्मिंघम में महावाणिज्य दूतावास द्वारा भव्य हिंदी दिवस एवं सांस्कृतिक संध्या का आयोजन

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२८ अक्टूबर को बर्मिंघम स्थित भारत के महावाणिज्य दूतावास में हिंदी दिवस के अवसर पर भाषा, साहित्य, संस्कृति और साझा विरासत से सजी एक विशेष संध्या का आयोजन हुआ, जिसमें भारतीय समुदाय ने बड़ी संख्या में उत्साहपूर्वक सहभागिता की।

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कार्यक्रम का शुभारंभ माननीय महावाणिज्य दूत के स्वागत संबोधन से हुआ, जिसके पश्चात माननीय गृह मंत्री जी का हिंदी दिवस संदेश पढ़ा गया और सभी ने मिलकर देशभक्ति की भावना से ओत-प्रोत वंदे मातरम् का सामूहिक गायन किया।

कार्यक्रम में “मिडलैंड्स और आज के विश्व में संस्कृत की प्रासंगिकता एवं महत्त्व” विषय पर विशेष व्याख्यान हुआ।

इस अवसर पर ‘भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में प्रवासी भारतीयों के योगदान’ पर एक परिचर्चा भी आयोजित की गई जिसमें डॉ. वंदना मुकेश ने ब्रिटेन के प्रवासी भारतीयों की गतिविधियों पर प्रकाश डाला। श्री सौरभ निर्मल ने ग़दर पाटी पर तथा डॉ. नेहा गुप्ता ने सिस्टर निवेदिता पर महत्वपूर्ण जानकारी दी । इस अवसर पर गीतांजलि बहुभाषीय साहित्यिक समुदाय के संस्थापक डॉ. कृष्णकुमार द्वारा संपादित पुस्तक भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में प्रवासी भारतीयों के योगदान’ की प्रति डॉ. वंदना मुकेश ने संस्था की ओर से उपस्थित सदस्यों के साथ की प्रधान कौंसिल डॉ. वेंकटचलम मुरुगन को भेंट की।

समारोह में महावाणिज्य दूतावास द्वारा आयोजित हिंदी निबंध, कविता एवं गीत गायन प्रतियोगिताओं के प्रतिभागियों और विजेताओं को भी सम्मानित किया गया। राखी बंसल (निबंध), माधवी गुडिपति (कविता), आचार्य उमेश यादव एवं ध्रुव नागोरी (गीत गायन) को उनकी उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया गया।

हिंदी, साहित्य, संस्कृत, संगीत, इतिहास और भारतीय समुदाय की जीवंत सहभागिता से सजी यह संध्या भारत की समृद्ध भाषाई एवं सांस्कृतिक विरासत के उत्सव के रूप में यादगार रही।

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