हंगेरियन लोककथा दिवस कार्यक्रम सम्पन्न
लोककथाएँ हमेशा से जादुई रही हैं। ये कहानियाँ सदियों से चली आ रही हैं और आज तक अपना आकर्षण नहीं खो पाई हैं। आज भी दादा-दादी अपने पोते-पोतियों को लोककथाएँ सुनाते हैं। जातक और पंचतंत्र की कालातीत भारतीय लोककथाओं की तरह ही, हंगेरियन लोककथाएँ जादू, हँसी और बुद्धिमानी को दर्शाती हैं।
हाल ही में नई दिल्ली में हंगेरियन लोककथा दिवस मनाया गया। यह हर साल 30 सितंबर को दुनिया भर में प्रसिद्ध हंगेरियन लेखक Elek Benedek (1859 – 1929) के जन्मदिन के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। Elek Benedek एक प्रसिद्ध हंगेरियन कहानीकार थे, जिन्होंने हंगेरियन लोककथाएं एकत्रित करने के लिए देश और विदेश में अनेक यात्राएँ की। हंगेरियन लोग उन्हें Grandpa Elek कहते हैं। कुछ हंगेरियन लोक कथाओं का मंचन त्रिवेणी कला संगम, मंडी हाउस में, NGO – MIMA के बाल कलाकारों द्वारा, MANCH के बैनर तले किया गया। हंगेरियन सांस्कृतिक केंद्र की निदेशक, डॉ. Mariann Erdő ने इस अद्भुत नाट्य शो का संयोजन किया। इस थिएटर शो का निर्देशन विक्रम सिंह ने किया और इसे हंगरी के Liszt इंस्टीट्यूट द्वारा प्रस्तुत किया गया। हालांकि अधिकांश दर्शक किशोर थे, लेकिन दादा-दादी की मौजूदगी ने ने इस शाम को यादगार बनाया। ।
रिपोर्ट : इन्दुकांत आंगिरस


