‘एक शेर अर्ज किया है’ के 338वें मुशायरे में सजी तरही ग़ज़लों की महफ़िल
महफिल तो तेरी सुनी न हुई,
कुछ उठ भी गए ,कुछ आ भी गए ।
०३ अक्टूबर, २०२६ को ‘एक शेर अर्ज किया है ‘ पटल के साप्ताहिक “दो तरही “मिसरों पर आधारित डिजिटल वीडियो गोष्ठी का ३३८वां मुशायरा आयोजित किया गया।
यह मुशायरा “यार मै दुध का धुला कब था और महफिल तो तेरी सुनी न हुई, कुछ उठ भी गए कुछ आ भी गए।” मिसरों पर आधारित थी। गोष्ठी की अध्यक्षता और संयोजन न्यूयार्क, अमेरिका से अशोक सिंह ने किया।
कार्यक्रम में रुबी मोहन्ती, के़. पी. सक्सेना, भावना कुँवर, प्रगीत कुँवर, कौशर भुट्टो, सुरेन्द्र कौशिक, सुषमा मल्होत्रा, ईला कुमार, वर्षा बोपसे, मधु शर्मा, ममता किरण, मनोज अबोध, राजेन्द्र निगम, खुर्रम नुर लक्षमी शंकर बाजपेई, अशोक सिंह आदि की भागीदारी ने बाईस नई गज्लें पेश की।
ईस कार्यक्रम ने भी पिछले मुशायरों की तरह शायरी की बेहतरीन पेशकश के साथ नई बुलंदियों को छुआ। हिंदी और उर्दू तरही गजलों से सजी हुई यह महफिल अदब की दुनिया में अपना अलग ही मुकाम रखती है।

