341वाँ : एक_शेर_अर्ज़_किया_है, अंतरराष्ट्रीय तरही मुशायरा

एक_शेर_अर्ज़_किया_है, पटल के साप्ताहिक 2 तरही मिसरों पर आधारित डिजिटल_वीडियो_गोष्ठी का 341वाँ मुशायरा 24 अक्टूबर, 2026 को आयोजित किया गया। गोष्ठी की अध्यक्षता और संयोजन न्यूयॉर्क, अमेरिका से अशोक सिंह ने किया। आज का मुशायरा इन दो मिसरों पर आधारित था:
687: तुम तो ज़ालिम के तरफ़दार नहीं थे पहले….
688: कि बचकर परिन्दा किधर जाएगा….
क़रीब ढाई घंटे चले इस शानदार कार्यक्रम में विभिन्न देशों से 13 लोगों ने भाग लिया । इस दौरान 23 नई ग़ज़लें सुनाई गईं। इस ख़ूबसूरत शायरी का आनंद आप यू ट्यूब पर भी उठा सकते हैं।
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https://youtu.be/A2UfdvmF3ns
मुशायरे में भारत से श्रीमती रूबी मोहंती (ग्रेटर नोएडा), के॰ पी॰ सक्सेना (रायपुर), डॉ० ख़ुर्रम नूर (ग्रेटर नोएडा), श्रीमती प्रज्ञा त्रिवेदी (रायपुर), श्रीमती नीलिमा पांडेय (मुंबई), श्रीमती नीना सहर (गुरुग्राम), अमेरिका से श्रीमती मधु शर्मा, नई दिल्ली से श्रीमती ममता किरण, अमेरिका से सुरेंद्र कौशिक, ग्रेटर नोएडा से मनोज अबोध, छत्तीसगढ़ रायपुर से श्रीमती वर्षा बोपचे, दिल्ली से लक्ष्मी शंकर वाजपेयी और अमेरिका से अशोक सिंह ने अपनी प्रस्तुति से आभासी श्रोताओं को वाह वाह करने पर मजबूर कर दिया ।
यह कार्यक्रम भी पिछले मुशायरों की तरह शाइ’री की बेहतरीन पेशकश के साथ नई बुलंदियों को छूता हुआ था। हिंदी और उर्दू तरही ग़ज़लों से सजी हुई यह महफ़िल अदब की दुनिया में अपना अलग ही मुक़ाम रखती है।
