डीपफेक की चुनौती और साइबर सुरक्षा के उपायों पर वैश्विक हिंदी परिवार की ऑनलाइन संगोष्ठी आयोजित

25 अक्टूबर, 2026। केंद्रीय हिंदी संस्थान, अंतरराष्ट्रीय सहयोग परिषद, वातायन-यूके तथा भारतीय भाषा मंच के संयुक्त तत्वावधान में वैश्विक हिंदी परिवार के साप्ताहिक कार्यक्रम के अंतर्गत ‘यंत्र बुद्धि के युग में डीपफेक’ विषय पर ऑनलाइन संगोष्ठी आयोजित की गई। कार्यक्रम में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बढ़ते प्रभाव, डीपफेक तकनीक के संभावित दुरुपयोग तथा साइबर सुरक्षा के उपायों पर विस्तार से चर्चा हुई।
कार्यक्रम का स्वागत लेखिका स्वरांगी साने ने किया।
मुख्य व्याख्यान में श्री बालेंदु शर्मा ‘दाधीच’ (सीईओ, एल्गो टेक्नॉलजीज, दुबई) ने डीपफेक तकनीक की कार्यप्रणाली, उसके बढ़ते उपयोग और उससे उत्पन्न साइबर सुरक्षा संबंधी चुनौतियों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि डीपफेक कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) पर आधारित ऐसी तकनीक है, जिसके माध्यम से किसी व्यक्ति की तस्वीर, आवाज और वीडियो को इस प्रकार बदला जा सकता है कि वह वास्तविक प्रतीत हो। उन्होंने वॉइस क्लोनिंग, फेस स्वैपिंग, लिप-सिंकिंग तथा कृत्रिम वीडियो निर्माण जैसी तकनीकों के उदाहरण देते हुए इनके दुरुपयोग से होने वाली आर्थिक धोखाधड़ी, पहचान की चोरी, राजनीतिक दुष्प्रचार और सामाजिक भ्रम की स्थितियों से अवगत कराया।
उन्होंने डीपफेक के सकारात्मक पक्षों पर चर्चा करते हुए शिक्षा, चिकित्सा, विज्ञान और फिल्म निर्माण जैसे क्षेत्रों में इसकी उपयोगिता भी बताई। साथ ही, उन्होंने डीपफेक की पहचान के लिए चेहरे के हावभाव, आँखों, होंठों, आवाज, प्रकाश और परछाई में दिखाई देने वाली असामान्यताओं पर ध्यान देने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि किसी भी संदिग्ध वीडियो, ऑडियो या संदेश पर बिना सत्यापन के विश्वास नहीं करना चाहिए और न ही उसे आगे साझा करना चाहिए। उन्होंने डिजिटल जागरूकता, सतर्कता और जिम्मेदार तकनीकी उपयोग को साइबर धोखाधड़ी से बचाव का महत्वपूर्ण माध्यम बताया।
कार्यक्रम के अध्यक्ष डॉ. गौरव गुप्ता (वैज्ञानिक ‘एफ’ एवं साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ) ने अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में साइबर सुरक्षा के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज के डिजिटल युग में साइबर सुरक्षा केवल मोबाइल और कंप्यूटर तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि स्मार्ट उपकरणों, कारों के सेंसर, वाई-फाई राउटर और अन्य डिजिटल माध्यमों की सुरक्षा भी उतनी ही आवश्यक है। उन्होंने व्यक्तिगत जानकारी, आधार एवं पैन कार्ड जैसे दस्तावेजों तथा सोशल मीडिया पर साझा की जाने वाली निजी तस्वीरों के प्रति सतर्क रहने की सलाह दी।
उन्होंने फिजिकल सिम पर पिन लगाने, अनजान लिंक और यूएसबी उपकरणों से बचने, सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशनों का सावधानीपूर्वक उपयोग करने तथा ऑनलाइन भुगतान के समय प्राप्तकर्ता का नाम जाँचने जैसे महत्वपूर्ण सुझाव दिए। उन्होंने कहा कि अनजान स्रोतों से प्राप्त वीडियो कॉल, संदेश या धनराशि के मामलों में जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की स्थिति में संबंधित बैंक अथवा साइबर सुरक्षा एजेंसियों को सूचित करना चाहिए। उन्होंने साइबर अपराध की शिकायत के लिए हेल्पलाइन नंबर 1930 और राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल का उपयोग करने की जानकारी भी दी। अंत में उन्होंने परिवार के सभी सदस्यों को साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक करने और डिजिटल माध्यमों का सतर्क एवं जिम्मेदार उपयोग करने पर बल दिया।
विशिष्ट अतिथि श्री अवतंश कुमार (भाषाविद्, समालोचक एवं प्रेसीडेंट, इंडिका इंक., यूएसए) ने भारतीय ज्ञान परंपरा में संवाद, तर्क-वितर्क और विचार-विमर्श की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने मुख्य वक्ता श्री बालेंदु शर्मा ‘दाधीच’ द्वारा कृत्रिम बुद्धिमत्ता के लिए ‘यंत्र बुद्धि’ शब्द के प्रयोग की सराहना करते हुए कहा कि तकनीकी विषयों को भारतीय भाषाओं में सहज रूप से प्रस्तुत करना समय की आवश्यकता है। अपने भाषा-विज्ञान एवं संगणकीय भाषाविज्ञान के अनुभवों को साझा करते हुए उन्होंने प्राकृतिक भाषा संसाधन (NLP), वाक् पहचान और मशीनी अनुवाद जैसे क्षेत्रों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि भाषा और तकनीक का समन्वय ज्ञान के नए अवसरों के द्वार खोलता है। साथ ही, उन्होंने तकनीकी विकास के साथ मानवीय विवेक, भाषायी संवेदनशीलता और आलोचनात्मक दृष्टि बनाए रखने की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यक्रम का प्रभावी संयोजन एवं संचालन श्री शिवकुमार निगम, संयुक्त निदेशक, इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय तथा पूर्व राजभाषा अधिकारी, भारतीय उच्चायोग, पोर्ट ऑफ स्पेन ने किया। उन्होंने विषय से जुड़े विभिन्न पहलुओं को सुव्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करते हुए वक्ताओं और प्रतिभागियों के बीच सार्थक संवाद स्थापित किया।
अंत में डॉ. वरुण कुमार (पूर्व रेल निदेशक, भारत सरकार) ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। उन्होंने सभी वक्ताओं, अतिथियों, आयोजक संस्थाओं और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। इस प्रकार डीपफेक तकनीक के प्रति जागरूकता और साइबर सुरक्षा के व्यावहारिक उपायों पर सार्थक चर्चा के साथ संगोष्ठी संपन्न हुई।
रिपोर्ट : अजय शर्मा
