‘विकसित भारत 2047’ के लिए शिक्षा पर पुणे में राष्ट्रीय मंथन

शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास, नई दिल्ली की तीन दिवसीय राष्ट्रीय बैठक के प्रथम दिवस पर राष्ट्रीय संचालन समिति की बैठक एवं “विकसित भारत @2047 के लिए शिक्षा” विषयक राष्ट्रीय शैक्षिक संगोष्ठी का आयोजन श्रीमती नाथीबाई दामोदर ठाकर्सी महिला विश्वविद्यालय, पुणे एवं डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, लोनेरे के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न हुआ।
प्रथम सत्र में आयोजित राष्ट्रीय संचालन समिति की बैठक में देशभर से न्यास के 40 से अधिक प्रमुख कार्यकर्ताओं ने सहभागिता की। बैठक में संगठनात्मक एवं कार्यक्रमात्मक विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई तथा आगामी वर्षों की कार्ययोजना पर विचार-विमर्श हुआ। बैठक में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन, वैदिक गणित के व्यापक प्रसार, भारतीय भाषाओं के संवर्धन एवं शिक्षण में उनके प्रभावी उपयोग, प्रबंधन शिक्षा में भारतीय दृष्टि के समावेश, भारतीय ज्ञान परंपरा आधारित शोध तथा शिक्षा क्षेत्र में जनजागरण के विविध आयामों पर गंभीर मंथन किया गया। साथ ही विभिन्न प्रांतों में संचालित गतिविधियों की समीक्षा करते हुए आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा भी निर्धारित की गई।
बैठक में शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के राष्ट्रीय सचिव डॉ. अतुल कोठारी, राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष श्री सुरेश गुप्ता, राष्ट्रीय संयोजक श्री ए. विनोद, राष्ट्रीय सह-संयोजक श्री संजय स्वामी, श्री ओम शर्मा एवं श्री राजेश्वर पराशर, राष्ट्रीय सहसचिव सुश्री सविता सैहंगर सहित अनेक वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित रहे।
सायंकाल 6 बजे “विकसित भारत @2047 के लिए शिक्षा” विषय पर राष्ट्रीय शैक्षिक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि महाराष्ट्र शासन के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा तथा संसदीय कार्य मंत्री मा. श्री चंद्रकांत (दादा) पाटिल थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता पुणे प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलपति मा. प्रो. सुनील भिरुड़ ने की तथा मुख्य वक्ता के रूप में शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के राष्ट्रीय सचिव डॉ. अतुल कोठारी उपस्थित रहे।

अपने उद्बोधन में मा. श्री चंद्रकांत (दादा) पाटिल ने विकसित भारत के निर्माण में शिक्षा की केंद्रीय भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत को 2047 तक विश्व में ज्ञान, नवाचार और सांस्कृतिक नेतृत्व प्रदान करने वाला राष्ट्र बनाने के लिए शिक्षा को भारतीय मूल्यों, कौशल और आधुनिक आवश्यकताओं के साथ जोड़ना होगा। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति को इस दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताते हुए उसके प्रभावी क्रियान्वयन की आवश्यकता पर बल दिया।
मुख्य वक्ता डॉ. अतुल कोठारी ने विकसित भारत की संकल्पना को भारतीय दृष्टि से स्पष्ट करते हुए कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं, बल्कि राष्ट्रनिर्माण, चरित्र निर्माण और समाज के प्रति उत्तरदायित्व की भावना विकसित करना है। उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा, मातृभाषा आधारित शिक्षा, मूल्यपरक शिक्षा तथा शोध और नवाचार को विकसित भारत की आधारशिला बताया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति भारत को ज्ञान महाशक्ति बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करती है।
कार्यक्रम में विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति, शिक्षाविद, प्राध्यापक, शोधार्थी एवं शिक्षा क्षेत्र से जुड़े अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। संगोष्ठी में विकसित भारत के लक्ष्य की प्राप्ति हेतु शिक्षा की भूमिका पर सार्थक एवं व्यापक चर्चा हुई।
इस अवसर पर शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के पश्चिम महाराष्ट्र प्रांत संयोजक डॉ. चंद्रकांत गुलेड एवं पश्चिम महाराष्ट्र प्रांत अध्यक्ष श्री अनिल महाजन ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए बताया कि आगामी दो दिनों में देशभर से आए प्रांत संयोजकों एवं पदाधिकारियों के साथ संगठनात्मक, शैक्षिक एवं राष्ट्रीय विषयों पर विस्तृत चर्चा की जाएगी।
चंद्रकांत गुलेद
प्रांत संयोजक, पश्चिम महाराष्ट्र प्रांत
