कविताई सिंगापुर में दिनेश बावरा का सम्मान, कविता और हास्य का अनूठा कार्यक्रम सम्पन्न

12 जुलाई 2026 | सिंगापुर प्रख्यात हास्य कवि दिनेश बावरा के सिंगापुर प्रवास के अवसर पर 12 जुलाई 2026 को ‘कविताई सिंगापुर’ द्वारा उनके सम्मान में एक विशेष काव्य-संध्या एवं कवि-गोष्ठी का आयोजन किया गया। लगभग चार घंटे तक चला यह आत्मीय साहित्यिक आयोजन उपस्थित कवियों और श्रोताओं को भाव, हास्य और आत्मीय संवाद की ऐसी यात्रा पर ले गया, जिसकी स्मृतियाँ सबके हृदय में लंबे समय तक साथ रहेंगी। अपनी सहज विनोदप्रियता, तीक्ष्ण बुद्धि और अद्भुत मंचीय करिश्मे से दिनेश बावरा जी ने आरम्भ से ही पूरे सभागार को बाँधे रखा। प्रायः एक हास्य कवि के रूप में पहचाने जाने वाले दिनेश जी ने अपनी भक्ति, प्रेम और संवेदनाओं से ओतप्रोत रचनाओं का भी पाठ किया। उनकी बहुआयामी काव्य-यात्रा ने श्रोताओं को हँसाया भी, भाव-विभोर भी किया और अंतर्मन को स्पर्श भी किया। उनके हास्य की सबसे बड़ी विशेषता उसकी शालीनता है। उनका व्यंग्य कटु नहीं, बल्कि मुस्कान के साथ आत्मचिंतन का अवसर देता है। उनके शब्दों में सादगी है, प्रस्तुति में गरिमा है और व्यक्तित्व में ऐसा अपनापन है कि श्रोता सहज ही उनसे जुड़ जाते हैं। इस आयोजन का सबसे भावपूर्ण पक्ष यह रहा कि दिनेश जी ने केवल अपनी रचनाएँ ही नहीं सुनाईं, बल्कि सिंगापुर के स्थानीय कवियों को पूरे मनोयोग से सुना। उन्होंने प्रत्येक रचनाकार का उत्साहवर्धन किया, उनकी रचनाओं की सराहना की और एक भाई तथा मार्गदर्शक की आत्मीयता से उनका मनोबल बढ़ाया। किसी प्रतिष्ठित कवि की यही उदारता उसे और अधिक सम्माननीय बना देती है। यही पारस्परिक आत्मीयता और साहित्यिक आदान-प्रदान इस गोष्ठी की सबसे बड़ी उपलब्धि रही। यह केवल एक काव्य-पाठ नहीं, अपितु अनुभवों, संवेदनाओं और स्नेह का उत्सव बन गया, जहाँ कविता ने दिलों को जोड़ा और हँसी ने दूरियों को मिटा दिया। कार्यक्रम का समापन आत्मीय रात्रिभोज, अनौपचारिक साहित्यिक चर्चाओं और पुनः मिलने के वादे के साथ हुआ। उपस्थित सभी साहित्यप्रेमियों के लिए यह संध्या एक अविस्मरणीय स्मृति बन गई।

रोते हुए चेहरों को पल भर में हँसा देते हैं,
फ़नकार ये ऐसे हैं, घर दिल में बना लेते हैं।
‘कविताई सिंगापुर’ हिन्दी कविता प्रेमियों का एक सक्रिय साहित्यिक मंच है, जो शार्दुला नोगजा के नेतृत्व में वर्षों से सिंगापुर में हिन्दी भाषा और साहित्य के संवर्धन हेतु सतत कार्यरत है। यह मंच न केवल स्थानीय रचनाकारों को अभिव्यक्ति का अवसर प्रदान करता है, बल्कि वैश्विक हिन्दी साहित्य से जुड़े एक सशक्त सेतु का कार्य भी करता है।
रिपोर्ट :— नलिनी गुप्ता
