शोध, नवाचार और अकादमिक उत्कृष्टता के लिए यूओयू व आरएनटीयू में समझौता

12 जुलाई 2026, हल्द्वानी। उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय, हल्द्वानी एवं रवींद्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय (आरएनटीयू), भोपाल के बीच शैक्षणिक एवं अनुसंधान सहयोग को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) संपन्न हुआ। यूओयू के कुलपति प्रो. (डॉ.) नवीन चंद्र लोहनी तथा रवींद्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) रवि प्रकाश दुबे की उपस्थिति में दोनों विश्वविद्यालयों के अधिकृत प्रतिनिधियों द्वारा समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। इस अवसर पर रवींद्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय की कुलसचिव डॉ. संगीता जौहरी भी उपस्थित रहीं।

प्रो. लोहनी ने कहा कि यह समझौता दोनों विश्वविद्यालयों के बीच ज्ञान, अनुभव एवं संसाधनों के आदान-प्रदान का सशक्त माध्यम बनेगा। उच्च शिक्षा के बदलते परिवेश में संस्थानों के बीच सहयोगात्मक प्रयास समय की आवश्यकता है। यह एमओयू विद्यार्थियों, शोधार्थियों एवं शिक्षकों के लिए नए अवसरों के द्वार खोलेगा तथा दोनों संस्थानों के बीच अकादमिक उत्कृष्टता को नई दिशा प्रदान करेगा। समझौते के अंतर्गत दोनों विश्वविद्यालय शिक्षा, शोध एवं नवाचार, संयुक्त शोध परियोजनाओं, छात्र एवं संकाय आदान-प्रदान, संयुक्त राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठियों, कार्यशालाओं, प्रशिक्षण कार्यक्रमों, पाठ्यक्रम विकास तथा अन्य शैक्षणिक गतिविधियों में परस्पर सहयोग करेंगे। साथ ही राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के उद्देश्यों के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण, नवाचार आधारित एवं रोजगारोन्मुखी शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए संयुक्त रूप से कार्य किया जाएगा।

रवींद्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) रवि प्रकाश दुबे ने कहा कि यह साझेदारी दोनों संस्थानों की शैक्षणिक एवं अनुसंधान क्षमता को और अधिक सशक्त बनाएगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह सहयोग विद्यार्थियों के समग्र विकास, नवाचार को प्रोत्साहन तथा उत्कृष्ट अकादमिक वातावरण के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

इस अवसर पर उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय की ओर से रवींद्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय के कुलाधिपति प्रो. संतोष चौबे को विश्वविद्यालय का स्मृति-चिह्न (मोमेंटो) भेंट कर सम्मानित किया गया। प्रो. चौबे ने दोनों विश्वविद्यालयों के बीच हुए इस शैक्षणिक सहयोग का स्वागत करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि यह समझौता ज्ञान, अनुसंधान एवं नवाचार के क्षेत्र में दीर्घकालिक एवं परिणामोन्मुखी साझेदारी का सुदृढ़ आधार बनेगा।

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