331वाँ अंतरराष्ट्रीय तरही मुशायरा : ‘एक शेर अर्ज़ किया है’
‘एक शेर अर्ज़ किया है’ पटल की साप्ताहिक दो तरही मिसरों पर आधारित डिजिटल वीडियो गोष्ठी का 331वाँ अंतरराष्ट्रीय मुशायरा 15 अगस्त 2026 को आयोजित किया गया। कार्यक्रम का विषय “आधुनिक युग में ग़ज़ल का पुनरुत्थान और पुनर्सृजन” रहा।
गोष्ठी का संयोजन मलेशिया से दिगम्बर नासवा ने तथा अध्यक्षता भारत से मनोज अबोध ने की। इस अवसर पर निम्न दो तरही मिसरों पर शायरों ने अपनी ग़ज़लें प्रस्तुत कीं—
- 667वाँ: “एक मुट्ठी भी अगर दें तो गुज़ारा कर लूँ”
- 668वाँ: “ज़रा सी तंग-दस्ती सब नज़ाकत छीन लेती है”
मुशायरे में भारत, अमेरिका और मलेशिया से कुल 12 शायरों ने भाग लिया और 30 नई ग़ज़लें प्रस्तुत कीं। क्रमशः रूबी मोहंती, राम प्रकाश यति, के.पी. सक्सेना, सुरेंद्र कौशिक, मधु शर्मा, खुर्रम नूर, अशोक सिंह, रेनू हुसैन, वर्षा बोपचे, दिगम्बर नासवा, आलोक अविरल और मनोज अबोध ने अपनी रचनाओं से महफ़िल को समृद्ध किया।
कार्यक्रम में हिंदी और उर्दू की तरही ग़ज़लों के माध्यम से पारंपरिक शायरी और आधुनिक संवेदनाओं का सुंदर संगम देखने को मिला। ‘एक शेर’ की संकल्पना इस विचार को रेखांकित करती है कि एक प्रभावशाली शेर भी गहरी अनुभूति और व्यापक विचार को व्यक्त कर सकता है। डिजिटल माध्यम के जरिए विभिन्न देशों के रचनाकारों का एक मंच पर जुड़ना ग़ज़ल की वैश्विक पहुँच और उसके नए रूपों को भी दर्शाता है।
लगभग 1 घंटा 46 मिनट 34 सेकंड चले इस मुशायरे में श्रोताओं ने विविध विषयों, भावों और समकालीन सरोकारों से जुड़ी सुंदर शायरी का आनंद लिया। कार्यक्रम ने परंपरा और नवीनता के समन्वय के साथ ग़ज़ल को आधुनिक दौर में नए पाठकों और श्रोताओं तक पहुँचाने की दिशा में अपनी विशिष्ट भूमिका निभाई।
इस प्रकार 331वाँ ‘एक शेर अर्ज़ किया है’ अंतरराष्ट्रीय तरही मुशायरा साहित्य, शायरी और डिजिटल संवाद का प्रभावी संगम सिद्ध हुआ तथा अदब की दुनिया में अपनी विशिष्ट पहचान को और मजबूत करता हुआ संपन्न हुआ।
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