हिंदी विवि में विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर हुआ विशेष व्याख्यान

विभाजन विभीषिका प्रदर्शनी का हुआ उद्घाटन
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय में विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। भारत विभाजन के दौरान हुई मानवीय त्रासदी, विस्थापन एवं पीड़ा को स्मरण करते हुए नई पीढ़ी को उस दौर के ऐतिहासिक अनुभवों से अवगत कराना तथा राष्ट्रीय एकता, सामाजिक समरसता एवं आपसी सद्भाव के महत्व को रेखांकित करना इस आयोजन का उद्देश्य था। इस अवसर पर वाचस्पति भवन में विभाजन विभीषिका प्रदर्शनी का उद्घाटन किया गया।
महादेवी वर्मा सभागार में आयोजित व्याख्यान में मुख्य अतिथि राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज विश्वविद्यालय, नागपुर के सामाजिक विज्ञान विद्यापीठ के अधिष्ठाता प्रो. शामराव कोरेटी ने संबोधित किया। उन्होंने कहा कि विभाजन के कारण लाखों महिला, पुरूषों का संहार हुआ और कई लोग इस भयानक त्रासदी के शिकार बने। विभाजन की घोषणा 03 जून 1947 को हुई परंतु इसका कोई सटीक विश्लेषण नहीं हो पाया। उन्होंने देश के कई हिस्सों में विभाजन को लेकर हुई नरसंहार की घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि यह घटना रक्तरंजीत इतिहास की याद दिलाती है। उन्होंने कहा कि हमें आज़ादी की भारी कीमत चुकानी पड़ी। उन्होंने विभाजन में मारे गए लोगों के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके द्वारा दी गयी कुर्बानी का स्मरण किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता साहित्य विद्यापीठ के अधिष्ठाता प्रो. अवधेश कुमार ने की। उन्होंने अखंड भारत के लिए भाईचारा और शांति के द्वारा काम करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम का प्रारंभ कुलगीत से तथा समापन राष्ट्रगीत एवं राष्टगान से किया गया। कार्यक्रम का संचालन संगोष्ठी के संयोजन डॉ. बालाजी चिरडे ने किया। इस अवसर पर प्रो. प्रीति सागर, डॉ. अशोक नाथ त्रिपाठी, डॉ. रामानुज अस्थाना, डॉ. राकेश मिश्र, डॉ. राजेश लेहकपुरे, डॉ. जयंत उपाध्याय, डॉ. राम प्रकाश यादव, डॉ. संदीप सपकाले, डॉ. शैलेश मरजी कदम, डॉ. रूपेश कुमार सिंह, डॉ. रेणु सिंह, डॉ. मुन्नालाल गुप्ता, डॉ. मीरा निचळे, डॉ. सूर्य प्रकाश पाण्डेय, डॉ. कोमल कुमार परदेशी, डॉ. रणंजय कुमार सिंह, बी.एस. मिरगे सहित बड़ी संख्या में शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित थे।
