हरियाली तीज : लोकपरंपरा, प्रकृति और सांस्कृतिक विरासत का संगम

जनपद संपदा संविभाग के वार्षिकोत्सव पर “हरियाली तीज” उल्लास, लोक परंपराओं और भारतीय सांस्कृतिक विरासत की व बहुविधि कार्यक्रमों के माध्यम से भव्यतापूर्वक मनाया गया। संविभाग के अध्यक्ष प्रो. के० अनिल कुमार ने एक वर्ष में किए गए कार्यों की जानकारी दी।
समारोह में दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष लता गुप्ता ने हरियाली तीज को महिलाओं के सशक्तिकरण, उनके अधिकारों और सामाजिक चेतना से जोड़ते हुए कहा, कि हमारी लोक परंपराएँ केवल उत्सव नहीं, बल्कि समाज में महिलाओं की भूमिका और सामुदायिक शक्ति को अभिव्यक्त करने का माध्यम भी हैं।
प्रो. रश्मि सिन्हा (पूर्व निदेशक, स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज, इग्नू) ने पर्यावरण और मानव जीवन के गहरे संबंध को रेखांकित करते हुए बताया कि हमारी लोक परंपराओं और पर्वों में प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व की भारतीय दृष्टि सहज रूप से दिखाई देती है।
शिक्षाविद एवं कवयित्री मालविका जोशी ने जनपद संपदा संविभाग के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि समुदायों की भागीदारी से ही हमारी लोक-स्मृतियों, परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को जीवंत रखा जा सकता है। वहीं प्रो. नंदिनी सिन्हा कपूर, निदेशक, SOITS, IGNOU ने अपने विशेष व्याख्यान में “Hariyali Teej: Historical Traditions, Regional Practices, Tribal Celebrations and Agrarian Significance in North India” के माध्यम से हरियाली तीज की ऐतिहासिक परंपराओं, क्षेत्रीय एवं जनजातीय स्वरूप और उत्तर भारत के कृषि जीवन से उसके गहरे संबंधों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि लोकपर्व किस प्रकार समुदायों को प्रकृति, कृषि और अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ते हैं।
समारोह में पाँच महत्वपूर्ण पुस्तकों का लोकार्पण, चार वृत्तचित्र फिल्मों का प्रदर्शन, ‘Paddy Culture of India’ प्रदर्शनी और जीवंत ‘तीज बाज़ार’ विशेष आकर्षण रहे।
यह आयोजन उत्सव से आगे बढ़कर लोकज्ञान, जनजातीय परंपराओं, कृषि संस्कृति और भारत की जीवंत विरासत को संरक्षित एवं आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाने का सामूहिक संकल्प बना।
