हल्क़ा-ए-तिश्नगान-ए-अदब की 587वीं माहाना नशिस्त में बना नया रिकॉर्ड

नई दिल्ली। हल्क़ा-ए-तिश्नगान-ए-अदब, दिल्ली की 587वीं माहाना नशिस्त रविवार, 23 अगस्त 2026 को अपराह्न 3 बजे से उर्दू घर ऑडिटोरियम, अंजुमन तरक़्क़ी उर्दू (हिंद), राउज़ एवेन्यू, आई टी ओ,नई दिल्ली में अत्यंत शानदार और कामयाब अंदाज़ में आयोजित हुई। अदबी सरगर्मियों से भरपूर इस यादगार नशिस्त की मेज़बानी डॉ. ख़ुर्रम शहज़ाद ‘नूर’ ने की।

नशिस्त की सदारत डॉ. के. के. ऋषि ने की। हल्क़ा-ए-तिश्नगान-ए-अदब, दिल्ली के सेक्रेटरी व संयोजक जनाब सीमाब सुलतानपुरी की देखरेख में आयोजित इस नशिस्त में जनाब अब्दुल रहमान मंसूर ने मेहमान-ए-ख़ुसूसी के रूप में शिरकत की।
कार्यक्रम की निज़ामत जनाब आशीष सिन्हा ‘क़ासिद’ ने अपने दिलकश और सधे हुए अंदाज़ में की।

यह नशिस्त कई मायनों में ऐतिहासिक रही। इसमें कुल 77 लोगों ने हाज़िरी दी, जिनमें 72 शोअरा व शायरात ने अपना कलाम पेश किया और पाँच लोगों ने श्रोता एवं मेहमान की हैसियत से शिरकत की। एक ही नशिस्त में 72 रचनाकारों द्वारा कलाम पेश किया जाना हल्क़ा-ए-तिश्नगान-ए-अदब की अब तक की नशिस्तों का नया रिकॉर्ड है।

नशिस्त में डॉ. के. के. ऋषि, जनाब सीमाब सुलतानपुरी, जनाब अब्दुल रहमान मंसूर, जनाब हबीब सैफ़ी, जनाब आशीष सिन्हा ‘क़ासिद’, डॉ. ख़ुर्रम शहज़ाद ‘नूर’, डॉ. लिज़ा ख़ान, जनाब असर देहलवी, जनाब हाशिम देहलवी, जनाब फ़हीम जोगापुरी, जनाब गोल्डी ग़ज़ब, जनाब हशमत भारद्वाज, जनाब आलोक अविरल, जनाब मनोज बेताब, जनाब असलम बेताब, जनाब आरिफ़ देहलवी, जनाब जावेद अब्बासी, जनाब सचिन परवाना, जनाब प्रदीप तिवारी ‘दीप’, डॉ. वीरेंद्र सिंह ‘वीर’, जनाब संजीव नादान, मोहतरमा शुभ्रा पालीवाल, मोहतरमा गुलबहार ‘गुल’, जनाब सज्जाद अख़्तर, जनाब शहादत अली निज़ामी, जनाब प्रवीण सक्सेना, जनाब ख़ुमार देहलवी, जनाब सुरेन्द्र सिफ़र, पंडित प्रेम बरेलवी, मोहतरमा रमा त्यागी ‘एकाकी’, मोहतरमा वसुधा कनुप्रिया, जनाब राजेश तल्ख़, जनाब अजय अक्स, जनाब शाहिद अनवर, जनाब मंजीत दहिया, डॉ. अमृता ‘अमृत’, डॉ. फ़ौज़िया अफ़ज़ाल, जनाब महेन्द्र सिंह, जनाब संजय कुमार गिरि, जनाब अरविन्द असर, जनाब नागेश चन्द्र, जनाब फ़ैज़ बदायूनी, जनाब अजय अज्ञात, जनाब यामीन मंज़र, जनाब फ़रीद अहमद फ़रीद, जनाब निसार अहमद, जनाब गुरचरन मेहता रजत, डॉ. मनोज अबोध, जनाब ज़फ़र कानपुरी, जनाब पवन कुमार तोमर, जनाब सैयद अली अब्बास नौगांवी, जनाब सुश्रुत पंत ‘ज़र्रा’, जनाब दिलदार देहलवी, जनाब अनिमेष शर्मा ‘आतिश’, मोहतरमा सपना अहसास, मोहतरमा अंजलि अदा, मोहतरमा सीमा शर्मा मेरठी, मोहतरमा रूबी मोहंती, डॉ. आदेश त्यागी, डॉ. मुनव्वर कमाल, जनाब रामलोचन कुमार, जनाब विवेक कवीश्वर, मोहतरमा सबीना सरताज, जनाब शादान एहसन, सैयद ग़ुफ़रान अहमद राशिद, जनाब आज़म हुसैन सहसवानी, जनाब अशोक साहिब, मोहतरमा मीनाक्षी जिजीविषा, जनाब असरार राज़ी, जनाब मकीन सिद्दीकी, जनाब जगदीश मीना और मोहतरमा हुमा देहलवी ने अपने कलाम से महफ़िल को अदबी रंग और रौनक़ अता की।

बतौर मेहमान और श्रोता जनाब सरफ़राज़ अहमद फ़राज़ देहलवी, जनाब एहतराम सिद्दीकी ‘जाहिल लखनवी’, जनाब संजीव दुआ, जनाब शिवम झा ‘कबीर’ और डॉ. आरती नूर ने अपनी मौजूदगी से नशिस्त की गरिमा बढ़ाई।

शोअरा व शायरात ने ग़ज़ल, नज़्म, गीत और अन्य काव्य-विधाओं में अपना चुनिंदा कलाम पेश किया। विचारों की विविधता, भावों की गहराई और प्रस्तुति की दिलकशी ने श्रोताओं को अंत तक बाँधे रखा। हर रचना का भरपूर स्वागत हुआ और ऑडिटोरियम बार-बार तालियों तथा दाद-ओ-तहसीन से गूँजता रहा।

सदर-ए-महफ़िल डॉ. के. के. ऋषि तथा मेहमान-ए-ख़ुसूसी जनाब अब्दुल रहमान मंसूर और डॉ हबीब सैफ़ी ने अपने ख़यालात का इज़हार करते हुए हल्क़े की अदबी सेवाओं की सराहना की और इतनी बड़ी संख्या में शोअरा, शायरात और अदब-नवाज़ों की शिरकत को हल्क़े की बढ़ती लोकप्रियता और साहित्यिक प्रतिबद्धता का प्रमाण बताया।

मेज़बान डॉ. ख़ुर्रम शहज़ाद ‘नूर’ ने सभी सम्मानित अतिथियों, शोअरा, शायरात और श्रोताओं का शुक्रिया अदा किया। उन्होंने कहा कि 72 रचनाकारों का एक ही नशिस्त में कलाम पेश करना केवल संख्या का रिकॉर्ड नहीं, बल्कि उर्दू-हिंदी अदब के प्रति लोगों की गहरी मुहब्बत, दिलचस्पी और समर्पण का ख़ूबसूरत प्रमाण है।

मुहब्बत, सौहार्द, साहित्य और आपसी सम्मान के यादगार वातावरण में यह ऐतिहासिक नशिस्त सफलतापूर्वक संपन्न हुई।

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