पौराणिक अवधारणाएँ और यंत्रबुद्धि : एक वैज्ञानिक दृष्टि पर ऑनलाइन संगोष्ठी

नई दिल्ली, 23 अगस्त 2026। विश्व हिंदी सचिवालय, केंद्रीय हिंदी संस्थान, अंतर्राष्ट्रीय सहयोग परिषद, वातायन तथा भारतीय भाषा मंच के संयुक्त तत्वावधान में वैश्विक हिंदी परिवार द्वारा 23 अगस्त 2026 को ‘पौराणिक अवधारणाएँ और यंत्रबुद्धि : एक वैज्ञानिक दृष्टि’ विषय पर महत्वपूर्ण ऑनलाइन संगोष्ठी का सफल आयोजन किया गया। संगोष्ठी में देश-विदेश से जुड़े विद्वानों, शिक्षाविदों, भाषा विशेषज्ञों एवं हिंदीप्रेमियों ने सहभागिता की। कार्यक्रम का स्वागत उद्बोधन लेखिका स्वरांगी साने ने किया। उन्होंने देश-विदेश से जुड़े सभी विद्वानों एवं प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए विषय की समकालीन प्रासंगिकता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान-परंपरा और आधुनिक तकनीक के बीच सार्थक संवाद स्थापित करने से ज्ञान की नई संभावनाएँ विकसित हो सकती हैं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. गिरीश नाथ झा, संगणकीय भाषा विज्ञान विशेषज्ञ, जेएनयू ने की। उन्होंने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में भारतीय ज्ञान-परंपरा, इतिहास और आधुनिक यंत्रबुद्धि के अंतर्संबंधों पर प्रकाश डाला। उन्होंने नालंदा से लेकर पाणिनीय व्याकरण तक भारतीय ज्ञान-विज्ञान की समृद्ध परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय ज्ञान-संपदा को पूर्वाग्रह से मुक्त होकर आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टि से समझने की आवश्यकता है। उन्होंने पाणिनीय व्याकरण की संरचनात्मक विशेषताओं को आधुनिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता के संदर्भ में महत्वपूर्ण बताते हुए भारतीय ज्ञान-परंपरा के संरक्षण एवं उसके आधुनिक तकनीकी उपयोग पर बल दिया।
मुख्य अतिथि बालेंदु शर्मा दाधीच, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, एल्गो टेक्नोलॉजी, दुबई ने अपने विस्तृत वक्तव्य में पौराणिक अवधारणाओं, भारतीय ज्ञान-परंपरा, भाषा और आधुनिक यंत्रबुद्धि के बीच संबंधों पर विचार व्यक्त किया। उन्होंने ऋग्वेद के वाक् सूक्त तथा पाणिनीय व्याकरण का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय परंपरा में भाषा को व्यवस्थित और गणितीय स्वरूप प्रदान करने की अत्यंत विकसित परंपरा रही है। पाणिनीय व्याकरण की संरचनात्मकता आधुनिक कंप्यूटर विज्ञान और AI के लिए उपयोगी आधार प्रदान कर सकती है।
उन्होंने भारतीय भाषाओं के लिए स्वदेशी एवं संप्रभु AI मॉडल विकसित करने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय भाषाओं में पर्याप्त डिजिटल डाटा उपलब्ध नहीं है, इसलिए भारतीय भाषाओं के मूल ग्रंथों, व्याख्यानों और अन्य भाषाई संसाधनों का व्यापक डिजिटलीकरण आवश्यक है। उन्होंने पाणिनीय व्याकरण को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़कर कम डाटा में भारतीय भाषाओं के लिए प्रभावी AI प्रणाली विकसित करने की संभावनाएँ भी प्रस्तुत कीं। उनका विशेष आग्रह था कि पौराणिक ग्रंथों में विज्ञान खोजने की बहस तक सीमित रहने के बजाय उपलब्ध तकनीक और डाटा का उपयोग कर भारतीय भाषाओं के लिए उपयोगी तकनीकी समाधान विकसित किए जाएँ। उन्होंने AI को ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ की भावना से विकसित करने पर जोर दिया।
डॉ. वरुण कुमार, पूर्व निदेशक, राजभाषा, रेल मंत्रालय, भारत सरकार ने भारतीय एवं विदेशी ज्ञान-परंपराओं के संदर्भ में यंत्रबुद्धि की भूमिका पर विचार रखा। उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा को केवल प्राचीन ज्ञान के रूप में देखने के बजाय उसकी वैज्ञानिक एवं तकनीकी उपयोगिता को समझना चाहिए। उन्होंने भारतीय ज्ञान-संपदा, भाषा, व्याकरण और परंपरागत ज्ञान को आधुनिक तकनीक से जोड़ने तथा डिजिटल माध्यमों से संरक्षित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
डॉ. राजीव रावत, वरिष्ठ हिंदी अधिकारी, आईआईटी खड़गपुर ने भारतीय ज्ञान-परंपरा और आधुनिक यंत्रबुद्धि के संबंध पर विचार व्यक्त करते हुए कहा कि पौराणिक अवधारणाओं को केवल आस्था या मिथक के रूप में देखने के बजाय उनके पीछे निहित तर्क, संरचना और ज्ञान को समझना आवश्यक है। उन्होंने भारतीय ज्ञान-पद्धतियों को आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टि से देखने तथा नई तकनीक में उनके उपयोग की संभावनाओं पर बल दिया।
सुश्री नर्मदा कुमारी, राजभाषा अधिकारी ने भारतीय ज्ञान-परंपरा और आधुनिक यंत्रबुद्धि के बीच संवाद की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने पौराणिक अवधारणाओं के पीछे निहित तर्क, ज्ञान एवं वैज्ञानिक दृष्टि को समझने की आवश्यकता बताई। साथ ही भारतीय भाषाओं, साहित्य और परंपरागत ज्ञान को AI के माध्यम से नई पीढ़ी तक पहुँचाने की संभावनाओं पर विचार रखा।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. मोहन बहुगुणा, सहायक निदेशक, गृह मंत्रालय, भारत सरकार ने किया। उन्होंने विषय से जुड़े विभिन्न विचारों को प्रभावी ढंग से क्रमबद्ध करते हुए वक्ताओं और प्रतिभागियों के बीच सार्थक संवाद स्थापित किया।
कार्यक्रम के अंत में डॉ. शिवम शर्मा, राजभाषा अधिकारी, जेएनयू ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। उन्होंने अध्यक्ष प्रो. गिरीश नाथ झा, मुख्य अतिथि बालेंदु शर्मा दाधीच, डॉ. वरुण कुमार, डॉ. राजीव रावत, सुश्री नर्मदा कुमारी, संचालक डॉ. मोहन बहुगुणा, कार्यक्रम के संयोजकों, तकनीकी टीम तथा देश-विदेश से जुड़े सभी प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
रिपोर्ट : अजय शर्मा
