वैशाली महिला समिति के कवयित्री सम्मेलन में स्त्री विमर्श और संवेदनाओं की सशक्त अभिव्यक्ति
वैशाली महिला समिति की सेमीनार कमेटी द्वारा
कवयित्री सम्मेलन का आयोजन पीतम पुरा वैशाली कम्युनिटी सेंटर में किया गया। हिन्दी पखवाड़े में विशेष रूप से आयोजित इस काव्य गोष्ठी का शुभारम्भ दीप प्रज्ज्वलित करके हुआ। डॉ. राधिका सिंह द्वारा रचित सरस्वती वंदना का गायन अंजु जैन, अदिति गुप्ता तथा पूजा जैन ने किया। समिति की उपाध्यक्ष चारू गौड़ व सचिव अंजु जैन ने सभी कवयित्रियों का परिचय देते हुए उनका स्वागत किया।
कविता का इस प्रबुद्ध संध्या में सबसे पहले युवा कवयित्री मीनाक्षी यादव ने अपने मुक्तक व अपनी कविता “चटोरी स्त्री“ का पाठ किया। स्त्री विमर्श की यह कविता व्यजनों के माध्यम से स्त्री के जीवन का समाहार करती हुई कविता के रूप में पसंद की गई। मंजुला गंगराड़े ने अपनी कविता “कपास के फूल“ और “पत्र“ पढ़ी। जीवन के संघर्ष और वर्तमान समय में पत्रों का प्रयोग ना होने की बात करती हुई दोनों कविताएँ पसन्द की गई।
प्रतिष्ठित रचनाकार व पूर्व प्राध्यापिका डॉ. मधुरिमा कोहली ने अपनी कविता में संबंधों की सशक्त अभिव्यक्ति करते हुए नानी और दोहती के नेह पर लिखी कविता सुनाई जिसका श्रोताओं ने स्नेहिल मन से अभिनंदन किया।
सुपरिचित कवयित्री व पूर्व प्राध्यापिका डॉ. राधिका सिंह ने अपनी प्रबुद्ध कविताओं का पाठ करते हुए स्त्री के अस्तित्व और महत्व पर केंद्रित कविताओं को प्रस्तुत किया वहीं अपने मधुर स्वर में प्रेम गीत की कर्णप्रिय प्रस्तुति दी। उनके शब्द और खिलखिलाती हुई हँसी से कार्यक्रम में महकते फूलों की हर अनुभूति हुई।
प्रतिष्ठित साहित्यकार सविता चड्ढा ने अपनी कविताओं से स्त्री को स्वयं के प्रति सम्मान करने, स्वयं से जुड़ने और अपने बड़ों का सम्मान करने वाली प्रेरक कविताओं का पाठ किया।
पूर्व प्राध्यापिका व लेखिका डॉ. अरूणा गुप्ता ने अपनी दो कविताओं “उर्मिला“ और “चाँदनी चौक“ का पाठ किया जिसमें जहाँ एक तरफ़ पौराणिक पात्रों पर चर्चा हुई वहीं चाँदनी चौक की पुरानी गलियों के दृश्य को भी दिखाया।
प्रतिष्ठित साहित्यकार, कवयित्री व मंच संचालिका अनीता वर्मा ने कार्यक्रम का सशक्त संचालन करते हुए अपनी नई पुस्तक “वो महकती सी लड़की“ में से घर में बैठी एलेक्सा से बात करती अकेली अम्मा की पीड़ा को चित्रित किया वहीं उन्होंने हिन्दी पखवाड़े के विशेष अवसर पर अपनी कविता “सुहासित सुभाषित“ पढ़कर कार्यक्रम को नवीन स्वर दिए।
कार्यक्रम में प्रतिष्ठित भाषाविद डॉ. विमलेश कांति वर्मा, दिल्ली विश्वविद्यालय हिंदी, के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. सुरेंद्र नाथ सिंह, आत्माराम सनातन धर्म कालेज के पूर्व प्रिंसिपल – प्रो.बी,एल अरोड़ा एवं अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहें।


