‘साहित्य संवाद’ में डॉ. पुष्पा सक्सेना के साहित्य पर हुआ सार्थक विमर्श

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लंदन/भारत, 27 सितंबर 2026।
‘वातायन’,गृहस्वामिनी, क्रिएटिव कल्चर और वैश्विक हिंदी परिवार के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित विशेष ऑनलाइन कार्यक्रम ‘साहित्य संवाद’ में राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित एवं प्रतिष्ठित कथाकार-संपादक डॉ. पुष्पा सक्सेना के बहुआयामी साहित्य और रचनात्मक अवदान पर सार्थक चर्चा हुई। कार्यक्रम का आयोजन 26 सितंबर रात आठ बजे भारतीय समयानुसार किया गया।

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डॉ. पुष्पा सक्सेना की साहित्यिक यात्रा पर चर्चा करते हुए वक्ताओं ने उनके कहानी-साहित्य, उपन्यासों, बाल साहित्य, एकांकी तथा यात्रा-वृत्तांत सहित विभिन्न रचनात्मक विधाओं पर विचार रखे। उनके साहित्य पर आधारित फिल्मों और उनकी रचनाओं के व्यापक प्रभाव का भी उल्लेख किया गया।
कार्यक्रम का संवाद डॉ. हरीश नवल, सेवानिवृत्त प्राध्यापक, व्यंग्यकार एवं संपादक, ने किया। डॉ. रश्मि कुमार, सेवानिवृत्त प्रोफेसर, कॉमर्स डिपार्टमेंट, इलाहाबाद विश्वविद्यालय तथा डॉ. अशोक कुमार ज्योति, वरिष्ठ सहायक आचार्य, हिंदी विभाग, काशी हिंदू विश्वविद्यालय ने समीक्षक के रूप में डॉ. सक्सेना के साहित्य के विभिन्न पक्षों को रेखांकित किया।

इस अवसर पर अंतरीपा ठाकुर मुखर्जी, ‘वातायन’ की महासचिव एवं कविता कैफ़े-यूके की सह-संस्थापक, ने डॉ. पुष्पा सक्सेना की कहानी पीले फूल का प्रभावपूर्ण पाठ प्रस्तुत किया। आचार्य राजेश कुमार ने प्रभावशाली एवं कुशल संचालन से पूरे कार्यक्रम को अत्यंत सुव्यवस्थित और आकर्षक बनाए रखा।

गृहस्वामिनी की संपादक अर्पणा संत सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए कहा कि साहित्यिक संवाद का उद्देश्य केवल किसी रचनाकार की उपलब्धियों को गिनाना नहीं, बल्कि उसकी रचनात्मक दृष्टि और साहित्य के भीतर छिपे जीवन-सत्य को पाठकों तक पहुँचाना है।

कार्यक्रम की संकल्पना एवं संयोजन दिव्या माथुर, वातायन की संस्थापक और वातायनम् की संपादक ने किया। तकनीकी सहयोग डॉ. मोहन बहुगुना ने किया।
कार्यक्रम में भारत सहित विभिन्न देशों से साहित्यकारों, हिंदीप्रेमियों और साहित्य-प्रेमी श्रोताओं ने सहभागिता की तथा डॉ. पुष्पा सक्सेना से कुछ प्रश्न भी पूछें।
साहित्य संवाद हर दूसरे शनिवार किसी एक साहित्यकार पर केंद्रित कार्यक्रम है जिसमें उनकी एक कहानी का पाठ, साक्षात्कार, दो समीक्षक और दो शोधार्थी तथा दर्शकों से प्रश्नों को भी शामिल किया जाता है। हिंदी साहित्य के वैश्विक संवाद को आगे बढ़ाने और वरिष्ठ रचनाकारों के साहित्य से नई पीढ़ी को जोड़ने की दिशा में एक सार्थक पहल प्रस्तुत की।

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