कोपेनहेगन में हिन्दी दिवस समारोह: हिन्दी भाषा, साहित्य और शिक्षण पर सार्थक विमर्श

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कोपेनहेगन, 14 सितम्बर। डेनमार्क स्थित भारतीय दूतावास द्वारा हिन्दी दिवस उत्साह और उल्लास के साथ मनाया गया। समारोह में हिन्दी भाषा की विशेषताओं, उसके बढ़ते वैश्विक महत्व, डेनमार्क में हिन्दी अध्ययन एवं शिक्षण तथा भारत और डेनमार्क के बीच साहित्यिक और सांस्कृतिक आदान-प्रदान की संभावनाओं पर सार्थक चर्चा हुई।
कार्यक्रम में भारत के राजदूत श्री मनीष प्रभात, उनकी पत्नी श्रीमती रूचि प्रभात, दूतावास के अधिकारीगण, हिन्दी के विद्वान, साहित्यकार तथा भारतीय समुदाय के अनेक सदस्य उपस्थित रहे। राजदूत श्री मनीष प्रभात और काउंसलर श्री पंकज कुमार सिंघल ने अपने वक्तव्यों में हिन्दी की महत्ता, उसकी विशिष्टताओं और विदेशों में उसके प्रचार-प्रसार की संभावनाओं पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर राजदूत श्री मनीष प्रभात ने हिन्दी दिवस पर भारत के गृह मंत्री श्री अमित शाह का संदेश भी पढ़ा।

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हिन्दी दिवस समारोह का विशेष आकर्षण बच्चों और किशोरों की भागीदारी रही। बच्चों ने हिन्दी कविताओं और गीतों की सुंदर प्रस्तुतियों से उपस्थित लोगों का मन मोह लिया। नई पीढ़ी का हिन्दी के प्रति उत्साह कार्यक्रम को विशेष रूप से जीवंत बना गया और प्रवासी परिवेश में हिन्दी के भविष्य के प्रति आशा भी जगाता रहा। आरहुस यूनिवर्सिटी में हिन्दी के अध्यापन से जुड़े डॉ. विवेक शुक्ला विशेष रूप से आरहुस से कार्यक्रम में भाग लेने के लिए आए। उन्होंने विश्वविद्यालय स्तर पर हिन्दी अध्ययन, शिक्षण और अनुवाद की स्थिति पर अपने विचार रखे।
साहित्यकार, अनुवादक और शिक्षाविद् अर्चना पैन्यूली ने अपने वक्तव्य में हिन्दी से जुड़े अपने निजी अनुभवों के साथ डेनिश-हिन्दी साहित्य के बीच अनुवाद और डेनमार्क में हिन्दी शिक्षण की स्थिति पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि विदेश में रहने पर अपनी भाषा को एक नए दृष्टिकोण से देखने का अवसर मिलता है और हिन्दी अपनी समृद्ध देवनागरी लिपि, साहित्यिक परंपरा और व्यापक बोलचाल के कारण विशिष्ट स्थान रखती है।
डेनिश साहित्य के हिन्दी अनुवाद से जुड़े अपने अनुभवों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि अनुवाद दो अलग-अलग समाजों और संस्कृतियों के बीच प्रभावी सेतु का कार्य करता है। उन्होंने डेनिश लेखिकाओं कारेन ब्लिक्सन और हेल्ले हेल्ले की कृतियों के अपने हिन्दी अनुवादों का उल्लेख करते हुए आशा व्यक्त की कि भविष्य में डेनिश से हिन्दी के साथ हिन्दी से डेनिश में भी अधिक साहित्यिक अनुवाद होंगे।
डेनमार्क में हिन्दी शिक्षण पर चर्चा करते हुए उन्होंने पिछले वर्षों में विभिन्न स्तरों पर हुए प्रयासों का संक्षिप्त उल्लेख किया और सुझाव दिया कि डेनिश जिमनेजियमों (हाईस्कूलों) में हिन्दी को वैकल्पिक विदेशी भाषा के रूप में शामिल करने की संभावनाओं पर विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने हिन्दी के औपचारिक अध्ययन, पुस्तकालयों में हिन्दी साहित्य की उपलब्धता तथा नई पीढ़ी को हिन्दी पढ़ने-लिखने से जोड़ने की आवश्यकता पर भी बल दिया।
काउंसलर श्री पंकज कुमार सिंघल ने बताया कि डेनिश जिम्नेजियमों में हिन्दी को वैकल्पिक भाषा के रूप में शामिल किए जाने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। वहीं राजदूत श्री मनीष प्रभात ने हिन्दी और डेनिश के बीच साहित्यिक अनुवाद को बढ़ावा देने पर बल देते हुए कहा कि इस दिशा में ठोस परियोजना तैयार होने पर आईसीसीआर (भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद) से आर्थिक सहयोग की संभावनाएँ तलाशी जा सकती हैं। समारोह में ‘डेनमार्क में हिन्दी का परिदृश्य’, ‘हिन्दी अध्ययन एवं अनुवाद’ तथा ‘भारत और डेनमार्क के बीच साहित्यिक सेतु’ जैसे विषय चर्चा के केंद्र में रहे। वक्ताओं और प्रतिभागियों ने इस बात पर विचार साझा किए कि साहित्य और अनुवाद किस प्रकार दोनों देशों के लोगों को एक-दूसरे की भाषा, संस्कृति और मानवीय संवेदनाओं के निकट ला सकते हैं।
कार्यक्रम में इस बात पर भी जोर दिया गया कि विदेश में हिन्दी का विकास केवल बोलचाल और सांस्कृतिक गतिविधियों तक सीमित न रहे, बल्कि उसके अध्ययन, अध्यापन, पठन-पाठन और साहित्यिक गतिविधियों को भी प्रोत्साहित किया जाए। बदलते तकनीकी परिवेश में इंटरनेट, डिजिटल प्रकाशन, सोशल मीडिया और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे माध्यमों ने हिन्दी के लिए नई संभावनाएँ खोली हैं।
समारोह में उपस्थित लोगों ने हिन्दी भाषा और भारतीय संस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुँचाने में परिवारों, शिक्षकों, सामाजिक-सांस्कृतिक संस्थाओं और समुदाय की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। कार्यक्रम ने डेनमार्क में हिन्दी से जुड़े विभिन्न प्रयासों और भविष्य की संभावनाओं को एक साझा मंच पर सामने लाने का अवसर प्रदान किया। समारोह के अंत में राजदूत श्री मनीष प्रभात और श्रीमती रूचि प्रभात ने प्रतिभागियों को सम्मानित किया तथा हिन्दी के प्रति उनके उत्साह और योगदान की सराहना की। प्रतिभागियों को भारतीय स्नैक्स और हिन्दी पुस्तकें भी वितरित की गईं।
कुल मिलाकर हिन्दी दिवस समारोह भाषा, साहित्य, शिक्षा और सांस्कृतिक संवाद का एक सार्थक आयोजन रहा। कार्यक्रम का प्रमुख संदेश यह रहा कि हिन्दी को जीवंत और समृद्ध बनाए रखने के लिए उसे बोलने के साथ पढ़ने, लिखने, सिखाने और नई पीढ़ी तक पहुँचाने के निरंतर प्रयास आवश्यक हैं। साथ ही साहित्य और अनुवाद के माध्यम से हिन्दी भारत और डेनमार्क के बीच सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

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