वैश्विक हिंदी परिवार द्वारा आयोजित पुस्तक लोकार्पण एवं परिचर्चा कार्यक्रम संपन्न

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नई दिल्ली, 31 अक्टूबर 2026 I वैश्विक हिंदी परिवार द्वारा अणुव्रत भवन, नई दिल्ली में पुस्तक लोकार्पण एवं साहित्यिक परिचर्चा कार्यक्रम का गरिमामय आयोजन किया गया। कार्यक्रम में कवि एवं ग़ज़लकार श्री मनोज अबोध की पुस्तक ‘माँ, धूप और अन्य कविताएँ’ तथा चर्चित कवयित्री सुश्री रूबी मोहंती की पुस्तक ‘मल्टीटास्किंग स्त्रियाँ’ का लोकार्पण और सार्थक साहित्यिक विमर्श हुआ। इस अवसर पर साहित्य, कविता, स्त्री विमर्श, पारिवारिक स्मृतियों, प्रकृति, समकालीन सामाजिक परिस्थितियों तथा भारतीय भाषाओं के महत्त्व से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विद्वानों एवं साहित्यकारों ने अपने विचार व्यक्त किए।
कार्यक्रम का स्वागत उद्बोधन वैश्विक हिंदी परिवार की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष श्री ऋषि कुमार शर्मा ने किया। उन्होंने उपस्थित अतिथियों, साहित्यकारों एवं साहित्यप्रेमियों का स्वागत करते हुए कार्यक्रम की साहित्यिक महत्ता को रेखांकित किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता वैश्विक हिंदी परिवार के अध्यक्ष श्री अनिल शर्मा ‘जोशी’ ने की। अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में उन्होंने वैश्विक हिंदी परिवार की मूल अवधारणा को स्पष्ट करते हुए कहा कि वैश्विक हिंदी परिवार के लिए प्रत्येक रचना और प्रत्येक रचनाकार अपने परिवार का अभिन्न अंग है। उन्होंने परिवार के साप्ताहिक रविवार कार्यक्रमों एवं उनमें आयोजित होने वाली विविध साहित्यिक, सांस्कृतिक और भाषायी गतिविधियों का उल्लेख किया। साथ ही हिंदी एवं भारतीय भाषाओं के प्रति समर्पित हिंदी प्रेमियों के सम्मान और संगठन की गतिविधियों में उनकी सहभागिता के महत्त्व को स्पष्ट किया।
उन्होंने सहयोगी सदस्य बनने की प्रक्रिया एवं सदस्यता की शर्तों पर भी प्रकाश डालते हुए कहा कि किसी व्यक्ति के जीवन में भारतीय भाषाओं का क्या महत्त्व है और वह उनके संरक्षण एवं संवर्धन के लिए किस प्रकार योगदान दे सकता है, यह विचारणीय है।
दोनों पुस्तकों की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि दोनों रचनाओं में माँ की अनुभूति, उसका चित्र और उससे जुड़ी स्मृतियाँ एक सामान्य सूत्र के रूप में उपस्थित हैं। मनोज अबोध की पुस्तक में जीवन एवं प्रकृति की गहरी समझ दिखाई देती है, जबकि रूबी मोहंती की पुस्तक में समकालीन समय और स्त्री जीवन की विविध परिस्थितियों का चित्रण मिलता है। उन्होंने पारस्परिक संबंधों में बढ़ते लेन-देन आधारित व्यवहार (Transactional Relationship) की प्रवृत्ति को भी रेखांकित किया। कविताओं में उल्लिखित स्मृतियों एवं उनके भावात्मक पक्ष पर चर्चा की।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री लक्ष्मी शंकर बाजपेयी, पूर्व उपमहानिदेशक, आकाशवाणी ने अपने वक्तव्य में विशेष रूप से रूबी मोहंती की पुस्तक ‘मल्टीटास्किंग स्त्रियाँ’ के माध्यम से स्त्री जीवन के विविध पक्षों पर विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि चाँद-युक्त छंद से छंदमुक्त कविता तक की यात्रा में रूबी मोहंती की कविताएँ अपनी अलग पहचान बनाती हैं। उनकी कविताओं के अंत में जो अप्रत्याशित प्रभाव और चमत्कार दिखाई देता है, वह अद्भुत है।
उन्होंने पुस्तक की कुछ कविताओं का पाठ करते हुए उनकी काव्यगत विशेषताओं को स्पष्ट किया। साथ ही ‘माँ, धूप और अन्य कविताएँ’ के संदर्भ में कविता में निर्मित रेखाचित्रों, संवेदना और बिंबों की विशेष रूप से सराहना की। उन्होंने कहा कि इन कविताओं में अनुभूतियों और जीवन के विभिन्न पक्षों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया है। अंत में उन्होंने ‘मुखौटे’ कविता का पाठ कर अपने विचारों को विराम दिया।
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि श्री के. सी. जैन, प्रबंध न्यासी, अखिल भारतीय अणुव्रत न्यास ने अणुव्रत की अवधारणा एवं उसके मूल सिद्धांतों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि ‘अणु’ का अर्थ छोटा और ‘व्रत’ का अर्थ संकल्प अथवा सिद्धांत है। आचार्य तुलसी जी ने अणुव्रत आंदोलन की शुरुआत कर समाज को नैतिकता, संयम और मानवीय मूल्यों से जोड़ने का महत्त्वपूर्ण कार्य किया। उन्होंने जैन धर्म एवं अणुव्रत के विचारों को स्पष्ट करते हुए दोनों पुस्तकों की सराहना की।
वरिष्ठ कवयित्री एवं लेखिका सुश्री अलका सिन्हा ने दोनों पुस्तकों को एक ही सिक्के के दो पहलू बताते हुए कहा कि मनोज अबोध की पुस्तक में एहसास और रूबी मोहंती की पुस्तक में आक्रोश की सशक्त अभिव्यक्ति दिखाई देती है। दोनों पुस्तकों में रचनात्मक ईमानदारी है। उन्होंने स्त्री जीवन के अकेलेपन, संघर्ष और अपनी पहचान स्थापित करने की जद्दोजहद को विशेष रूप से रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि रूबी मोहंती की कविताओं में स्त्रियों के संघर्ष और आत्मपहचान की यात्रा प्रभावशाली रूप में सामने आती है। उन्होंने ‘पिलर’ सहित कुछ कविताओं का पाठ भी किया। अपनी बात को एक महत्त्वपूर्ण कथन के साथ समाप्त करते हुए उन्होंने कहा— “बात में कविता हो या न हो, पर कविता से बात होनी चाहिए।”
कवि एवं समालोचक श्री राजेश्वर वशिष्ठ ने ‘माँ, धूप और अन्य कविताएँ’ के भावनात्मक एवं संवेदनात्मक पक्ष पर चर्चा की। उन्होंने अपनी माँ से जुड़ी स्मृतियों को साझा करते हुए पुस्तक की कविताओं का पाठ किया। उन्होंने संग्रह की मार्मिकता, भावनात्मक गहराई और संवेदना की सूक्ष्म अभिव्यक्ति को रेखांकित किया। उनके अनुसार, इस संग्रह की कविताएँ पाठक को अपनी निजी स्मृतियों और आत्मीय अनुभवों से जोड़ती हैं।
आचार्य श्री उदित कुमार ने अणुव्रत की स्थापना, उसके उद्देश्यों एवं वर्तमान समय में उसकी प्रासंगिकता को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्र, हिंदी भाषा और भारतीय भाषाओं से जुड़े साहित्यिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का अणुव्रत में सदैव स्वागत है। उन्होंने रचनाकारों और उनकी पुस्तकों को सम्मानित करने की परंपरा को महत्त्वपूर्ण बताते हुए ऐसे आयोजनों की आवश्यकता पर बल दिया।
वैश्विक हिंदी परिवार की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष श्री ऋषि कुमार शर्मा ने रूबी मोहंती की पुस्तक ‘मल्टीटास्किंग स्त्रियाँ’ पर अपने विचार रखते हुए आज की स्त्री की बहुआयामी भूमिका, उसकी कार्यक्षमता और सामाजिक जिम्मेदारियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने पुस्तक में प्रयुक्त अंग्रेजी शब्दों को उसकी समकालीन अभिव्यक्ति का एक विशिष्ट पक्ष बताया। आज की स्त्री के कठिन परिश्रम और एक साथ अनेक भूमिकाओं का निर्वहन करने की क्षमता को रेखांकित करते हुए उन्होंने पुस्तक की ‘एम्पायर’ कविता का पाठ किया।
श्री शशिकांत शर्मा, उपाध्यक्ष, वयम् ने दोनों पुस्तकों की विषयवस्तु पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने रूबी मोहंती की पुस्तक ‘मल्टीटास्किंग स्त्रियाँ’ में संकलित कुल 77 कविताओं का उल्लेख करते हुए बताया कि इनमें स्त्री के सपनों, आक्रोश, सोई हुई उम्मीदों और जीवन के विविध भावों को अभिव्यक्ति मिली है। वहीं ‘माँ, धूप और अन्य कविताएँ’ में स्त्री, उसके नारीत्व और संवेदनात्मक अनुभवों को तीन भागों में विभाजित कर प्रस्तुत किया गया है। उन्होंने दोनों पुस्तकों की रचनात्मक विशेषताओं एवं भावात्मक पक्ष की सराहना की।

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युवा कवि एवं समालोचक श्री राहुल शिवाय ने कविता की विकास यात्रा पर चर्चा करते हुए छंदयुक्त कविता से छंदमुक्त कविता तक हुए परिवर्तन को स्पष्ट किया। उन्होंने कविता के मूल तत्त्वों एवं उसकी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अपने विचार रखे। ‘माँ, धूप और अन्य कविताएँ’ में प्रयुक्त बिंबों, प्रतीकों तथा धार्मिक-सांस्कृतिक संदर्भों की चर्चा करते हुए उन्होंने पुस्तक की सराहना की।
कवि एवं ग़ज़लकार श्री मनोज अबोध ने अपनी पुस्तक ‘माँ, धूप और अन्य कविताएँ’ से ‘प्रेयसी’ शीर्षक कविता सहित कुछ अन्य कविताओं का पाठ किया। उन्होंने अपने जीवन से जुड़े अनुभवों और बचपन की स्मृतियों को साझा करते हुए बताया कि किस प्रकार इन आत्मीय अनुभूतियों को उन्होंने कविता के माध्यम से शब्दबद्ध किया है। उन्होंने कहा कि जीवन के अनेक छोटे-बड़े अनुभव, प्रकृति से जुड़ाव और अतीत की स्मृतियाँ इस संग्रह में कविता के रूप में अभिव्यक्त हुई हैं।
चर्चित कवयित्री सुश्री रूबी मोहंती ने अपनी पुस्तक ‘मल्टीटास्किंग स्त्रियाँ’ से ‘उस दिन’ सहित कुछ कविताओं का पाठ किया। उन्होंने अपनी कविताओं के माध्यम से स्त्री संवेदना, उसके संघर्ष, आत्मसम्मान, आकांक्षाओं और समकालीन समाज में उसकी बहुआयामी भूमिका को अभिव्यक्त किया। उन्होंने बताया कि इस संग्रह में आज की स्त्री के जीवन के विविध पक्षों, उसकी चुनौतियों और भावनात्मक अनुभवों को स्वर देने का प्रयास किया गया है। इस अवसर पर कवि, कवियत्रियाँ और विभिन्न अतिथियो सहित करीब सत्तर व्यक्ति उपस्थित थे । जिनमें अमेरिका और मलेशिया से आये तीन हिंदी साहित्यकार भी शामिल रहे ।
कार्यक्रम के अंत में भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक व सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के संयुक्त निदेशक श्री शिव कुमार निगम ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों, साहित्यकारों, वक्ताओं एवं सभी सहभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम का प्रभावी एवं रोचक संचालन वरिष्ठ ग़ज़लकार श्री अनिल मीत ने किया। उनके साहित्यिक एवं कुशल संचालन ने पूरे कार्यक्रम को सुव्यवस्थित और संवादपूर्ण बनाए रखा।

रिपोर्ट : अजय शर्मा

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