विशेष व्याख्यान “भारतीय कला धरोहर : बांसुरी”

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र, कलादर्शन प्रभाग द्वारा आयोजित विशेष व्याख्यान “भारतीय कला धरोहर : बांसुरी के विशेष संदर्भ में” प्रसिद्ध बांसुरी वादक चेतन जोशी ने भारतीय परंपरा में बांसुरी की अटूट यात्रा और उसकी निरंतरता पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि ऋग्वेद में इसे “बाकुर” तथा यजुर्वेद में “वंशी” कहा गया है। साथ ही बांसुरी के सप्तकों, उसकी स्वर-संरचना और भारतीय संगीत में उसके आध्यात्मिक महत्व की विस्तृत जानकारी दी। व्याख्यान में रघुनाथ सेठ, पंडित हरिप्रसाद चौरसिया सहित अनेक महान बांसुरी वादकों के योगदान को भी स्मरण किया गया। इस अवसर पर केंद्र के डीन प्रशासन एवं कलानिधि प्रभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. रमेश चंद्र गौड़ ने कहा कि भारतीय संगीत और संस्कृति की यह परंपरा तभी जीवित रहेगी, जब युवाओं को बांसुरी सहित भारतीय वाद्य यंत्रों से जोड़ा जाएगा। कलादर्शन प्रभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. ऋचा कांबोज ने अतिथि परिचय सहित केंद्र की ऐसे व्याख्यान में भूमिका के बारे में जानकारी दी।
