बालस्वरूप राही जी के 90वें जन्मदिवस समारोह कार्यक्रम

दिनांक 14 मई 2026 को द्वारका स्थित क्रिएटिव अनलॉक सभागार में हिंदी साहित्य जगत के सुप्रसिद्ध साहित्यकार एवं वरिष्ठ कवि बालस्वरूप राही जी के 90वें जन्मदिवस के उपलक्ष्य में एक गरिमामय एवं आत्मीय समारोह का आयोजन किया गया। यह आयोजन कृष्णादित्य परंपरा परिवार तथा अक्षर आंगन मंच के संयुक्त तत्वावधान में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम का संयोजन आदरणीय राजेन्द्र निगम जी, आदरणीया इंदु राज निगम जी, आदरणीय लक्ष्मी शंकर वाजपेई जी तथा आदरणीया ममता किरण जी द्वारा अत्यंत स्नेहपूर्ण एवं सुव्यवस्थित रूप से किया गया। समारोह में अनेक साहित्यकारों, कवियों, कवयित्रियों एवं साहित्यप्रेमियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। सम्पूर्ण वातावरण आत्मीयता, सम्मान और साहित्यिक ऊष्मा से परिपूर्ण था। उपस्थित सभी जनों ने आदरणीय राही जी के दीर्घ साहित्यिक योगदान एवं उनके प्रेरणादायी व्यक्तित्व को नमन करते हुए उन्हें जन्मदिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ अर्पित कीं। कार्यक्रम का सबसे आकर्षक और आनंदमय पक्ष स्वयं आदरणीय राही जी की सशक्त उपस्थिति रही। इस विशेष अवसर पर उन्होंने अपनी अनेक रचनाओं का सस्वर पाठ किया और अपनी सहज शैली, गहन संवेदनाओं तथा अद्भुत अभिव्यक्ति से सभी श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनकी ऊर्जावान प्रस्तुति और शब्दों की जीवंतता ने यह अनुभव कराया कि सच्चा साहित्यकार उम्र से नहीं, अपनी संवेदनाओं और सृजनशीलता से पहचाना जाता है। उपस्थित सभी जन उनकी रचनाएँ सुनकर अत्यंत आनंदित एवं अभिभूत हुए।

कार्यक्रम का एक अत्यंत भावुक और आत्मीय क्षण तब आया जब राही जी की सुपुत्री ने अपने माता-पिता से जुड़े रोचक और प्रेरणादायी संस्मरण साझा किए। उन्होंने अपने माता-पिता की प्रेम कहानी को कविता के माध्यम से जिस भावपूर्ण शैली में प्रस्तुत किया, उसने पूरे सभागार को भावुक कर दिया। उनके शब्दों में पारिवारिक स्नेह, सम्मान और जीवन-संघर्ष की सुंदर झलक देखने को मिली। इस अवसर पर राही जी के स्नेहियों, साहित्यकार मित्रों एवं शुभचिंतकों ने उन्हें सम्मानित करते हुए शुभकामनाएँ अर्पित कीं। कुछ साथी कवि एवं कवयित्रियों ने भी राही जी की रचनाओं का पाठ कर उनके साहित्यिक अवदान को आदरपूर्वक स्मरण किया। साहित्य संगम मंच की ओर से भी आदरणीय राही जी का विशेष सम्मान किया गया। मंच की संस्थापिका के रूप में मैं शिखा खुराना, अध्यक्ष सुनीला नारंग जी तथा उपाध्यक्ष अलका गर्ग जी ने आदरणीय राही जी को “राधे-राधे” जड़ित अंगवस्त्र पहनाकर सम्मानित किया तथा श्रद्धा एवं आदर स्वरूप श्रीमद्भगवद्गीता की प्रति भेंट की। यह सम्मान केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक एवं साहित्यिक मूल्यों के प्रति गहन आदर और श्रद्धा का प्रतीक था।
मुझे भी इस गरिमामयी आयोजन का हिस्सा बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। आदरणीय राही जी को सुनना, उनके अनुभवों से सीखना तथा उनके व्यक्तित्व की विनम्रता और साहित्य के प्रति समर्पण को निकट से अनुभव करना मेरे लिए अत्यंत प्रेरणादायी एवं अविस्मरणीय रहा। समारोह का समापन अत्यंत हर्षोल्लासपूर्ण वातावरण में केक काटकर, सामूहिक छायाचित्रों तथा स्वादिष्ट जलपान के साथ सम्पन्न हुआ। यह आयोजन केवल एक जन्मदिवस समारोह नहीं, बल्कि साहित्य, संस्कार, आत्मीयता और पीढ़ियों के मध्य सृजनात्मक संवाद का सुंदर उत्सव बन गया, जिसकी स्मृतियाँ लंबे समय तक सभी के मन में बनी रहेंगी।

रिपोर्ट :— डॉ. अँजु क्वात्रा

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