‘मन की सतरंगी उड़ान’ का लोकार्पण: संवेदना, प्रकृति और जीवन-मूल्यों का सतरंगी काव्य उत्सव

दिनांक 26/06/2026, नई दिल्ली। लोधी रोड स्थित आईसीसी परिसर में वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. मृदुला अग्रवाल के प्रथम काव्य-संग्रह ‘मन की सतरंगी उड़ान’ का गरिमापूर्ण लोकार्पण एवं परिचर्चा आयोजित की गई। कार्यक्रम में देश के प्रतिष्ठित साहित्यकारों, शिक्षाविदों एवं साहित्यप्रेमियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। अध्यक्षीय वक्तव्य मे पूर्व संपादक साहित्य अकादमी डॉ. ब्रजेन्द्र त्रिपाठी ने उनकी कृति की समीक्षा करते हुए कहा कि समकालीन हिंदी कविता में जहाँ प्रकृति का विशुद्ध चित्रण अपेक्षाकृत कम दिखाई देता है, वहीं ‘मन की सतरंगी उड़ान’ में पर्वत, नदियाँ, झरने, बादल, वृक्ष और पर्यावरण अत्यंत सजीव रूप में उपस्थित हैं। उन्होंने कहा कि कवयित्री ने विकास के नाम पर प्रकृति के दोहन, पर्यावरणीय संकट और मानवीय संवेदनाओं जैसे गंभीर विषयों को सरल, सहज एवं प्रभावशाली भाषा में अभिव्यक्त किया है। उनके अनुसार यह काव्य-संग्रह पाठकों के लिए एक सार्थक और पठनीय कृति है। इसके उपरांत कार्यक्रम के मुख्य अतिथि लक्ष्मीशंकर वाजपेयी पूर्व उपमहानिदेशक, आकाशवाणी कवि एवं ग़ज़लकार ने अपने उद्बोधन में कहा कि ‘मन की सतरंगी उड़ान’ आशा, प्रेम, करुणा और जीवन के सकारात्मक मूल्यों का सशक्त काव्य-संग्रह है। उन्होंने कहा कि आज जब समाज में रिश्तों का क्षरण, घृणा और विखंडन बढ़ रहा है, ऐसे समय में ऐसी रचनाएँ पाठकों को संवेदना, साहस और सकारात्मक दृष्टि प्रदान करती हैं। उन्होंने समाज में भाईचारे, सत्य तथा मानवीय मूल्यों को सुदृढ़ करने का आह्वान करते हुए युवाओं को मौलिक चिंतन और सृजन के लिए प्रेरित किया। इसके बाद विशिष्ट अतिथि हास्य व्यंग्य कवयित्री निशा भार्गव ने काव्य-संग्रह की विस्तृत समीक्षा प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि यह संग्रह बचपन से लेकर जीवन के विविध अनुभवों, प्रकृति, मानवीय संवेदनाओं और जीवन-मूल्यों का सजीव दस्तावेज है। संग्रह की प्रत्येक कविता किसी न किसी उद्देश्य, प्रेरणा और जीवन-दृष्टि को सहज एवं संकेतात्मक शैली में प्रस्तुत करती है। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई ) के बढ़ते प्रभाव के बावजूद साहित्य की वास्तविक शक्ति लेखक की मौलिक अनुभूति और संवेदना में निहित है। उन्होंने युवा रचनाकारों से मौलिक लेखन को अपनाने का आग्रह किया। कार्यक्रम में इसके पश्चात श्रीशुभ चिंतन चीफ कमिश्नर कस्टम्स कवि एवं ग़ज़लकार का संदेश पढ़ा गया, जिसमें साहित्य को समाज में सकारात्मक चेतना, नैतिक मूल्यों और मानवीय संवेदनाओं के संवाहक के रूप में रेखांकित किया गया। संदेश में डॉ. मृदुला अग्रवाल के काव्य-संग्रह को जीवन, प्रकृति और मानवीय संबंधों की सार्थक अभिव्यक्ति बताते हुए उनके साहित्यिक अवदान की सराहना की गई तथा उनके उज्ज्वल रचनात्मक भविष्य की मंगलकामना व्यक्त की गई। अंत में गिरवर दयाल आईएएस हिन्दी प्रणेता जी ने अपने वक्तव्य में कहा कि साहित्य केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने वाली सृजनात्मक शक्ति है। उन्होंने ‘मन की सतरंगी उड़ान’ को मानवीय मूल्यों, प्रकृति-प्रेम और सकारात्मक जीवन-दृष्टि का सुंदर काव्य-संग्रह बताते हुए विश्वास व्यक्त किया कि यह कृति पाठकों के बीच व्यापक रूप से सराही जाएगी और हिंदी साहित्य में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित करेगी। कार्यक्रम के दौरान कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और मौलिक लेखन पर भी सार्थक चर्चा हुई। सभी वक्ताओं का मत था कि एआई सूचना का माध्यम हो सकता है, किंतु कल्पनाशक्ति, संवेदना और मौलिक सृजन का स्थान नहीं ले सकता। युवा पीढ़ी को अपने अनुभवों, विचारों और संवेदनाओं के आधार पर सृजन करने का संदेश दिया गया। कार्यक्रम का समापन डॉ. मृदुला अग्रवाल के उज्ज्वल साहित्यिक भविष्य की मंगलकामनाओं के साथ हुआ। उपस्थित साहित्यकारों ने विश्वास व्यक्त किया कि ‘मन की सतरंगी उड़ान’ हिंदी साहित्य जगत में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित करेगी तथा पाठकों को जीवन, प्रकृति और मानवीय मूल्यों के प्रति नई दृष्टि प्रदान करेगी।

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