माँ फूलों में (काव्य-संग्रह) का भव्य लोकार्पण कार्यक्रम सम्पन्न

सुश्री चन्द्रकान्ता ‘चन्द्रेश’ जी के प्रथम काव्य-संग्रह “माँ फूलों में” पुस्तक का लोकार्पण कार्यक्रम 22/7/2026 को श्री शिव मन्दिर रतिया वाली प्याऊ के रैगर चौपाल देव नगर, करोलबाग, नई दिल्ली में अत्यंत भव्य तरीके से वरिष्ठ साहित्यकार राम चन्द्र वर्मा ‘साहिल’ जी की अध्यक्षता में आयोजित किया गया।

माँ को समर्पण प्रेम की पुस्तक 

“माँ फूलों में” काव्य संग्रह का लोकार्पण श्री योगेन्द्र चांदोलिया सांसद उत्तर पश्चिम लोकसभा एवं विशिष्ट अतिथियों की गरिमामय उपस्थिति में हुआ। इस पुस्तक परिचर्चा में सुश्री पुष्पा सिंह बिसेन,श्री अनिल वर्मा मीत, सुश्री अल्का सिन्हा,श्री राम अवतार बैरवा,श्री सुधाकर पाठक, डॉ.चन्द्र सैन, श्री अनिल मासूम,श्री हरमोहिंदर सिंह, आर जे मनीष आजाद जी जैसे दिग्गज साहित्यकारों शायरों एवं कवियों ने इस पुस्तक पर बहुत ही गहन, विस्तृत और सार्थक चर्चा में भाग लिया।
इस भव्य आयोजन में मुख्य अतिथि के रूप में श्री योगेन्द्र चांदोलिया, सांसद उत्तर पश्चिम लोकसभा की गरिमामय उपस्थिति ने कार्यक्रम को और भी भव्य रूप दे दिया।
चन्द्रकान्ता जी को उनके इस प्रथम प्रयास पर ख़ूब शुभकामनाओं तथा शुभाशीषों द्वारा नवाजा गया। सभी उपस्थित माननीय जनों का भव्य स्वागत किया गया। इस लोकार्पण समारोह में सम्मिलित हुए श्री प्रदीप मोहन चांदोलिया,श्री परमनांद जाजोरिया,श्री कृष्ण गोपाल पिगोलिया,श्री नवीन कुरड़िया,श्री पन्ना लाल सिंगाड़िया,श्री जगदीश जलुथरिया, ओम प्रकाश कानखेड़िया,धर्मेंद्र दोतानिया श्री लक्ष्मी नारायण शेरशिया,श्री विजय अटल,श्री लाजपत घरबारिया,योगगुरु मामचंद तोणगरिया,श्री अशोक सिवाल,श्री सूरज प्रकाश रातावाल,श्रीओम प्रकाश जाजोरिया,श्री केवल कृष्ण भाखडीवाल,श्री प्रभुदयाल शेरशिया,श्री जगदीश आलोरिया मनोज साटोलिया जी एवं श्रीमती रुक्मणी मौर्या श्रीमती समीरा छुगानी,पूनम खोरवाल,मीरा बन्दरवाल,सुमित्रा खजोतिया, जयश्री बड़ीवाल, कांता जाजोरिया,रचना शेरशिया,बबिता कांसोटिया,एकता सिंह,अल्का निम,लक्ष्ली खोरवाल, जया मौर्या,शकुंतला कुरड़िया, इंदु सक्करवाल जी एवं साहित्य समाज के गणमान्यजन व मातृशक्ति उपस्थित रही। इस भव्य सुंदर आयोजन का संचालन बड़े ही शानदार सार गर्भित डॉ भावना शुक्ल ने किया। चन्द्रकान्ता चन्द्रेश’ जी के संक्षिप्त धन्यवाद प्रस्ताव के पश्चात कार्यक्रम का समापन हुआ।
मुझे विश्वास है कि इस कार्यक्रम को एक सुंदर यादगार के रूप में याद किया जाएगा। पाठकों से भरपूर स्नेह और सम्मान मिलेगा चन्द्रकान्ता जी को तथा भविष्य में और भी ऐसे काव्य-संग्रहों की उनसे अपेक्षा की जाएगी ।

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