‘लम्हें ज़िंदगी के’ की भव्य काव्य गोष्ठी में साहित्य और संवेदनाओं का हुआ अद्भुत संगम

प्रेम, भक्ति, श्रृंगार और राष्ट्रभाव से सजी काव्यधारा; वृक्षारोपण के संदेश के साथ सम्पन्न हुआ गरिमामय आयोजन
नई दिल्ली, 9 अगस्त 2026।
स्वतंत्रता दिवस के पावन पर्व की पूर्व बेला में साहित्य, संस्कृति, प्रकृति और राष्ट्रभाव को समर्पित ‘लम्हें ज़िंदगी के’ के तत्वावधान में एक भव्य साहित्यिक काव्य गोष्ठी एवं वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन कम्युनिटी सेंटर, डी-7, वसंत कुंज, नई दिल्ली में किया गया। कार्यक्रम का आयोजन दोपहर 3 बजे से शाम 7 बजे तक हुआ, जिसमें साहित्य एवं काव्य-जगत से जुड़े अनेक प्रतिष्ठित रचनाकारों ने अपनी सशक्त प्रस्तुतियों से वातावरण को साहित्यिक गरिमा प्रदान की।

कार्यक्रम की आयोजक एवं ‘लम्हें ज़िंदगी के’ की संस्थापिका डॉ. पूजा भारद्वाज तथा आयोजन की महत्वपूर्ण सहयोगी ज्योति जुल्का जी के कुशल संयोजन में आयोजित इस साहित्यिक समारोह ने उपस्थित साहित्यप्रेमियों के मन पर गहरी छाप छोड़ी।
कार्यक्रम में अतिविशिष्ट अतिथि वरिष्ठ अधिवक्ता एवं हरियाणा विधानसभा के पूर्व विधायक आ. नरेश यादव जी की गरिमामयी उपस्थिति ने आयोजन की शोभा बढ़ाई। वहीं विशिष्ट अतिथियों आ. मनोज अबोध जी, आ. विनीत पांडेय जी एवं आ. रवि शर्मा जी , आ. विनय कुमार जी , ने अपनी उपस्थिति से कार्यक्रम को विशेष गरिमा प्रदान की । कार्यक्रम का संचालन जितेंद्र जीत ने बहुत ही सुंदर प्रभावशाली और अनुशासित तरीके से किया
काव्य गोष्ठी में देश के विभिन्न भावों और संवेदनाओं को अपनी रचनाओं में पिरोने वाले अनेक आमंत्रित कवियों ने शानदार काव्यपाठ किया। गोल्डी ‘ग़ज़ब’, हिमांशु शुक्ला, डॉ ईशा भारद्वाज , रक्षा सिंह , विशाल जी ,मनीषा ‘मणि’ , प्रीति शर्मा , मनोज अबोध, हरिनारायण जाट, नीरज सक्सेना, ललित कुमार शर्मा, रमा त्यागी ‘एकाकी’, अमरीश राजन एवम सुरेंद्र “ सिफर” ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया ।
कवियों के ओजपूर्ण, भावपूर्ण एवं सधे हुए काव्यपाठ पर श्रोताओं ने जमकर तालियां बजाईं। पूरे कार्यक्रम के दौरान साहित्यप्रेमियों में विशेष उत्साह और आत्मीयता का वातावरण बना रहा।
वहीं आयोजन की विशेषता यह रही कि काव्य के साथ-साथ वृक्षारोपण कार्यक्रम के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण और प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी का संदेश भी दिया गया। आयोजकों ने साहित्य को केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक चेतना और संवेदनशीलता जागृत करने का माध्यम बताते हुए प्रकृति संरक्षण को जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाने का आह्वान किया।
रिपोर्ट: डॉ. पूजा भारद्वाज
