काव्य गोष्ठी “अभिव्यक्ति–3” ने बिखेरी साहित्यिक रंगों की अनुपम छटा

केवल काव्य परिवार के सौजन्य से आयोजित हुआ यादगार साहित्यिक आयोजन।

नई दिल्ली, 9 अगस्त 2026
केवल काव्य परिवार के सौजन्य से आयोजित काव्य गोष्ठी “अभिव्यक्ति–3” साहित्य, संवेदना, गीत, ग़ज़ल, हास्य और काव्यात्मक अभिव्यक्ति का एक बेहद खूबसूरत संगम बनकर सामने आई।
कार्यक्रम में दिल्ली एवं आसपास के अनेक प्रतिष्ठित कवि-कवयित्रियों और शाइरों ने अपनी उत्कृष्ट रचनाओं से बेहद खूबसूरत समा बांधा ।

कार्यक्रम का संचालन केवल काव्य परिवार की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष ग़ज़लकार गुरचरन मेहता ‘रजत’ ने सहज अंदाज़ में किया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रसिद्ध ग़ज़लकार श्री विजय स्वर्णकार जी ने की। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सुप्रसिद्ध ग़ज़लकार श्री बलजीत सारसर जी रहे, जबकि विशिष्ट अतिथि डॉ मनोज अबोध,डॉ. देवव्रत शर्मा ‘अयन’ एवं श्रीमती माधुरी स्वर्णकार रहीं , सभी ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति से कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।

कार्यक्रम के प्रारंभ माँ वाणी के आगे पुष्प समर्पित एवं दीप प्रज्वलन किया गया । फिर मंचासीन अतिथियों का अंगवस्त्र से स्वागत एवं सम्मान किया गया। इसके पश्चात उपस्थित सभी रचनाकारों / साहित्य-साधकों के प्रति आदर एवं कृतज्ञता व्यक्त की गई।

कार्यक्रम का शुभारंभ आदरणीया कवयित्री शालिनी खन्ना जी द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना से हुआ। उनकी मधुर एवं भावपूर्ण प्रस्तुति ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक एवं साहित्यिक ऊर्जा से भर दिया।

इसके बाद शुरू हुई शब्दों और भावों की वह काव्य-यात्रा, जिसका सभी को बेसब्री से इंतज़ार था।

श्री अरविंद असर जी ने अपनी उम्दा ग़ज़लों से श्रोताओं की खूब वाहवाही लूटी। श्री मनोज बेताब जी ने अपनी शानदार ग़ज़लों से महफ़िल को आगे बढ़ाया। श्री मुकेश सिंह जी की काव्य प्रस्तुति ने श्रोताओं को प्रभावित किया, वहीं श्री सुंदर सिंह जी ने गीत एवं ग़ज़ल की अपनी बुलंद आवाज़ से वातावरण को सुरमयी बना दिया।
श्री संजय तन्हा जी ने अपनी उम्दा ग़ज़लों से श्रोताओं की दाद बटोरी। श्रीमती सुनीता पुनिया जी ने अपने गीत के माध्यम से अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराई।
कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए श्री प्रेम सागर प्रेम जी ने कविता, गीत और ग़ज़ल की विविधता से श्रोताओं को आनंदित किया। इंजीनियर महेंद्र सिंह जी ने अपनी प्रभावशाली काव्य प्रस्तुति दी। श्रीमती एकता सिंह चौहान जी ने अपनी सुंदर रचना से महफ़िल में भावों के रंग भरे।
श्री गोल्डी ग़ज़ब जी ने हास्य की फुहार बिखेर दी। उनकी प्रस्तुति पर श्रोताओं की जोरदार तालियाँ और ठहाके सुनाई दिए।
श्रीमती गुलबहार गुल जी ने शानदार तरन्नुम में ग़ज़ल प्रस्तुत कर महफ़िल को एक अलग ही रंग प्रदान किया। उनकी गायकी और शायरी का सुंदर मेल सभी को खूब पसंद आया। श्री राकेश राणा जी एवं श्री सुरेंद्र सिफ़र जी ने अपनी उम्दा रचना से काव्य-रसिकों को प्रभावित किया।
इसके बाद श्री जयशंकर द्विवेदी ‘विश्वबंधु’ जी ने अपने लाजवाब छंदों से सभी की भरपूर दाद हासिल की।
श्रीमती शालिनी खन्ना जी, जो कहानी लेखन के साथ-साथ गीत एवं ग़ज़ल में भी सिद्धहस्त हैं, ने अपनी बहुआयामी साहित्यिक प्रतिभा का परिचय दिया। श्रीमती जाह्नवी सिंह जी ने बहुत ही बेहतरीन गीत एवं छंद सुनाकर ख़ूब दाद बटोरी , योगा अध्यापक श्री धूम सिंह जी संक्षिप्त लेकिन उम्दा काव्य पाठ किया ।

कार्यक्रम में केवल काव्य परिवार की राष्ट्रीय संगठन मंत्री एवं प्रदेश प्रभारी श्रीमती संतोष सम्प्रीति जी ने अपने प्रभावशाली गीत एवं छंदों से सभी को प्रभावित किया।
दिल्ली इकाई की साहित्य मंत्री श्रीमती कृष्णा राजपुरोहित जी ने अपनी सरस आवाज़ में बेहद ही खूबसूरत माहिया प्रस्तुत कर खूब रंग जमाया । दिल्ली इकाई की कोषाध्यक्ष श्रीमती चेतना कपूर ‘शफ़क़’ जी ने बेहतरीन ग़ज़ल की प्रस्तुति से अपनी बहुआयामी प्रतिभा का परिचय दिया। दिल्ली इकाई के मीडिया प्रभारी श्री जगदीश मीणा जी, जो एक बेहतरीन फोटोग्राफर होने के साथ-साथ शानदार ग़ज़लकार भी हैं, ने अपनी ग़ज़ल और मनमोहक तरन्नुम से महफ़िल में चार चाँद लगा दिए। कार्यक्रम के संचालक एवं दिल्ली इकाई के अध्यक्ष गुरचरन मेहता ‘रजत’ जी ने पिता को समर्पित एक ग़ज़ल प्रस्तूत कर सभी से भरपूर दाद प्राप्त की।

इसके पश्चात कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री बलजीत सारसर जी ने अपनी लाजवाब ग़ज़लों से महफ़िल को नई ऊँचाई प्रदान की। विशिष्ट अतिथि जनाब मनोज अबोध जी ने तहत एवं तरन्नुम दोनों तरह से बेहद उम्दा ग़ज़ल सुनाई । विशिष्ट अतिथि आद॰माधुरी स्वर्णकार ने प्रभावशाली कविताएवं ग़ज़ल से मंत्रमुग्ध किया। विशिष्ट अतिथि डॉ. देवव्रत शर्मा ‘अयन’ जी ने रचनाओं के माध्यम से मन की भावनाओं को बेहद खूबसूरत अंदाज़ में प्रस्तुत किया ।अंत में कार्यक्रम अध्यक्ष श्री विजय स्वर्णकार जी, ने अपनी उत्कृष्ट ग़ज़लों से कार्यक्रम को एक यादगार मुकाम तक पहुँचाया।
पूरे कार्यक्रम के दौरान सभी रचनाकारों की प्रस्तुतियों पर लगातार तालियों और वाहवाही सेऐसा प्रतीत हो रहा था मानो कविता गीत ग़ज़ल छंद सभी एक-दूसरे से संवाद कर रहे हों।

“अभिव्यक्ति–3” की सबसे बड़ी विशेषता यही रही कि मंच पर हर रचनाकार ने अपनी विशिष्ट शैली में अपनी बात कही और सभी ने एक से बढ़कर एक रचनाएँ प्रस्तुत कीं। गीत, ग़ज़ल, कविता, हास्य साहित्य की अनेक विधाओं ने मिलकर इस आयोजन को विविध रंग प्रदान किए।

अंत में धन्यवाद ज्ञापन एवं जलपान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। आयोजकों ने सभी अतिथियों, रचनाकारों और के प्रति आभार व्यक्त किया।

रिपोर्ट: गुरचरण मेहता रजत

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