अंतरंग कथाएँ, बहिरंग संसार’ का लोकार्पण एवं परिचर्चा आयोजित

वंदना यादव की रचनात्मक दुनिया पर केंद्रित पुस्तक पर साहित्यकारों ने साझा किए विचार
नई दिल्ली। स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर सिविल सर्विसेज ऑफिसर्स इंस्टीट्यूट (CSOI), नई दिल्ली में विशाल पाण्डेय द्वारा संपादित पुस्तक ‘अंतरंग कथाएँ, बहिरंग संसार’ का लोकार्पण एवं परिचर्चा आयोजित की गई। वंदना यादव की रचनात्मक दुनिया पर केंद्रित इस पुस्तक पर हुई सार्थक परिचर्चा ने उनके साहित्यिक व्यक्तित्व और रचनात्मक सरोकारों को समझने का एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान किया।
परिचर्चा के दौरान प्रो. विद्या सिन्हा ने पुस्तक के लोक पक्ष पर प्रकाश डालते हुए उसकी जड़ों और सामाजिक सरोकारों को रेखांकित किया। प्रो. सुषमा यादव ने पुस्तक में मौजूद न्याय-बोध तथा प्रेरक एवं मोटिवेशनल पक्षों को संवेदनशीलता के साथ सामने रखा। वहीं प्रो. भारती गोरे ने पुस्तक की विस्तृत, गंभीर और प्रभावशाली समीक्षा प्रस्तुत करते हुए इसके विविध साहित्यिक एवं वैचारिक आयामों पर विस्तार से चर्चा की।

पुस्तक के संपादक विशाल पाण्डेय ने पुस्तक के संपादन के उद्देश्य, उसकी परिकल्पना और रचनात्मक यात्रा के बारे में विस्तार से अपने विचार साझा किए। कार्यक्रम का सहज, सुंदर और गरिमापूर्ण संचालन निवोदिता मिश्रा, कार्यक्रम अधिशासी, आकाशवाणी महानिदेशालय ने किया। इस अवसर पर वंदना यादव की रचनात्मक दुनिया पर केंद्रित पुस्तक को लेकर वक्ता के रूप में अपने विचार साझा करने का अवसर भी मिला।
कार्यक्रम की विशेषता यह रही कि स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर मौसम भी बरसात से सराबोर था। घनघोर बारिश के बावजूद साहित्यकारों, साहित्यप्रेमियों और युवाओं की बड़ी संख्या में उपस्थिति ने आयोजन को विशेष बना दिया। प्रतिकूल मौसम में भी साहित्य के प्रति लोगों का उत्साह और आत्मीय सहभागिता इस शाम को यादगार बना गया।
‘अंतरंग कथाएँ, बहिरंग संसार’ न केवल वंदना यादव की रचनात्मक दुनिया को समझने का माध्यम बनी, बल्कि उनके साहित्य में निहित सामाजिक सरोकारों, संवेदना, न्याय-बोध और मानवीय दृष्टि पर संवाद का एक सार्थक मंच भी बनी। स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर आयोजित यह साहित्यिक संध्या विचार, संवाद और आत्मीयता से परिपूर्ण रही।
