‘रामदरश मिश्र : सम्यक पुनरवलोकन’ का भव्य लोकार्पण

रामदरश मिश्र के व्यापक रचना-संसार के मूल्यांकन और पुनरवलोकन का महत्वपूर्ण प्रयास

रानापार, 14 अगस्त 2026। हिंदी के सुप्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. रामदरश मिश्र के शताब्दी वर्ष के अवसर पर उनके साहित्यिक अवदान पर केंद्रित पुस्तक ‘रामदरश मिश्र : सम्यक पुनरवलोकन’ का भव्य लोकार्पण उनके गाँव डुमरी के निकट स्थित अखिल भाग्य स्नातकोत्तर महाविद्यालय, रानापार के सभागार में संपन्न हुआ। पुस्तक का संपादन डॉ. ओम निश्चल और प्रो. स्मिता मिश्र ने किया है तथा इसका प्रकाशन सर्वभाषा ट्रस्ट द्वारा किया गया है।

पुस्तक की पृष्ठभूमि नवंबर 2024 में दिल्ली विश्वविद्यालय के गुरु तेग बहादुर खालसा कॉलेज में आयोजित रामदरश मिश्र शताब्दी वर्ष की दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी से जुड़ी है। इस संगोष्ठी में देश-विदेश के अनेक विद्वानों, साहित्यकारों और शोधार्थियों ने रामदरश मिश्र के जीवन एवं साहित्य के विविध पक्षों पर अपने शोध-पत्र प्रस्तुत किए थे। एक सत्र में स्वयं रामदरश मिश्र भी विद्यार्थियों और शोधार्थियों के बीच उपस्थित हुए थे।

संगोष्ठी में प्रस्तुत चुनिंदा शोध-पत्रों के साथ अनेक विद्वान लेखकों के आलेखों को शामिल करके इस पुस्तक का स्वरूप तैयार किया गया है। पुस्तक का उद्देश्य रामदरश मिश्र के विपुल रचनात्मक संसार के विविध आयामों का मूल्यांकन करते हुए उनके साहित्य का सम्यक पुनरवलोकन प्रस्तुत करना है। संपादकों का मानना है कि रामदरश मिश्र की व्यापक रचनात्मकता को एक पुस्तक में पूरी तरह समेटना संभव नहीं है, फिर भी इस संग्रह के माध्यम से उनके साहित्य की बहुआयामी समझ विकसित करने का महत्वपूर्ण प्रयास किया गया है।

इस अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के आयोजन में गुरु तेग बहादुर खालसा कॉलेज के प्राचार्य प्रो. गुरमोहिंदर सिंह की महत्वपूर्ण भूमिका रही। संगोष्ठी के संयोजक डॉ. अमरेंद्र पाण्डेय, डॉ. कँवलजीत कौर और डॉ. गगनदीप कौर ने प्रो. स्मिता मिश्र के मार्गदर्शन में विभिन्न वैचारिक सत्रों को सार्थक और बहसपरक बनाया। इस प्रकार पुस्तक की परिकल्पना और निर्माण में खालसा कॉलेज के साथ-साथ शोधार्थियों एवं शोध-अध्येताओं का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा।

पुस्तक का लोकार्पण साहित्य अकादमी के पूर्व अध्यक्ष प्रो. विश्वनाथ तिवारी, प्रो. रामदेव शुक्ल, डॉ. चितरंजन मिश्र, डॉ. वेद प्रकाश पांडेय, डॉ. सुधीर राय तथा प्रो. स्मिता मिश्र ने संयुक्त रूप से किया।

लोकार्पण अवसर पर रामदरश मिश्र के साहित्यिक अवदान, उनकी रचनात्मक दृष्टि और हिंदी साहित्य में उनके विशिष्ट योगदान को रेखांकित किया गया। वक्ताओं ने कहा कि रामदरश मिश्र का साहित्य भारतीय समाज, गाँव, मनुष्य और बदलते जीवन-मूल्यों की गहरी संवेदना से जुड़ा हुआ है। उनकी रचनाओं का पुनर्पाठ आज भी समकालीन साहित्यिक और सामाजिक संदर्भों में प्रासंगिक है।

सर्वभाषा ट्रस्ट द्वारा प्रकाशित यह पुस्तक शीघ्र ही अमेज़न सहित अन्य प्रमुख ऑनलाइन विक्रय मंचों पर उपलब्ध होगी। यह पुस्तक रामदरश मिश्र के साहित्य को नए संदर्भों में समझने और उनके व्यापक रचना-संसार के पुनर्मूल्यांकन की दिशा में एक महत्वपूर्ण साहित्यिक दस्तावेज के रूप में देखी जा रही है।

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