राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय द्वारा आयोजित भारत रंग महोत्सव में जर्मनी,यूरोप के सदस्यों द्वारा नाटक “तीन रंग : एक पहचान” की सशक्त नाट्य प्रस्तुति

संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार एवं राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय, (नई दिल्ली ) द्वारा आयोजित भारत रंग महोत्सव में जर्मनी से, डॉ शिप्रा शिल्पी के लेखन एवं निर्देशन में वैश्विक हिंदीशाला संस्थान (VHSS, जर्मनी) एवं सृजनी ग्लोबल (यूरोप) के सदस्यों द्वारा नाटक “तीन रंग : एक पहचान” की सशक्त नाट्य प्रस्तुति।
भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय, राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय, (नई दिल्ली ) द्वारा आयोजित भारत रंग महोत्सव के अवसर पर जर्मनी से, डॉ शिप्रा शिल्पी के लेखन एवं निर्देशन में वैश्विक हिंदीशाला संस्थान (VHSS, जर्मनी) एवं सृजनी ग्लोबल (यूरोप) के सदस्यों श्रीमती प्रियदर्शिनी द्वारक एवं श्रीमती दीप्ति वर्मा द्वारा नाटक “तीन रंग : एक पहचान” की सशक्त नाट्य प्रस्तुति प्रस्तुत की गई।
कार्यक्रम का प्रारंभ माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के शुभकामना संदेश के साथ किया गया। मुख्य अतिथि प्रसिद्ध रंगकर्मी, शिक्षक, निर्देशक एवं नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा के पूर्व निदेशक पद्मश्री राम गोपाल बजाज जी थे। विशिष्ट अतिथि पद्मश्री भरत गुप्ता (वाइस चेयरमैन,NSD), ब्रांड एम्बेसडर सुप्रसिद्ध रंगकर्मी एवं अनिनेत्री सुश्री मीता वशिष्ठ जी एवं गेस्ट ऑफ हॉनर बॉलीवुड के सुविख्यात सशक्त अभिनेता पंकज त्रिपाठी एवं प्रतिष्ठित गीतकार स्वानंद किरकिरे जी एवं श्री चितरंजन त्रिपाठी जी (निदेशक, नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा ) के सानिध्य में विभिन्न देशों द्वारा प्रस्तुत नाटक की झलकियों को प्रदर्शित किया गया। जिसमें जर्मनी से डॉ शिप्रा शिल्पी के लेखन एवं निर्देशन में देशभक्ति से ओतप्रोत तीन रंग : एक पहचान नाटक का मंचन प्रस्तुत किया गया।
इस अवसर पर NSD के निदेशक चितरंजन त्रिपाठी ने कहा, रंगमंच के प्रति प्रवासियों का समर्पण अनुकरणीय है। डॉ शिप्रा ने निदेशक चितरंज त्रिपाठी एवं चेतना वशिष्ठ को इस महत्वपूर्ण आयोजन प्रस्तुति हेतु आमंत्रित करने के लिए आभार प्रकट करते हुए कहा_ “हम राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय तथा इस महोत्सव की संपूर्ण आयोजन टीम के प्रति हृदय से आभार व्यक्त करते हैं कि उन्होंने हमें अपनी कला, संस्कृति और रंगभाषा को भारत जैसे समृद्ध सांस्कृतिक मंच पर प्रस्तुत करने का अवसर प्रदान किया।”
ज्ञातव्य हो डॉ शिप्रा शिल्पी अपनी संस्थाओं के माध्यम से विगत एक दशक से भी अधिक से हिंदी एवं भारतीय संस्कृति एवं साहित्य की दिशा में उल्लेखनीय कार्य कर रही है। वो एक प्रसिद्ध रंगकर्मी, मीडिया प्रोफेशनल, शिक्षाविद , संपादक, साहित्यकार एवं संचालक है। उनके लिखे नाटकों का मंचन जर्मनी की अनेक संस्थाओं द्वारा भी किया जा रहा है।
श्रीमती प्रियदर्शिनी पेशे से पेट्रोलियम इंजीनियर हैं, परंतु साथ ही वे एक प्रशिक्षित शास्त्रीय गायिका, वादक (वायलिन और कीबोर्ड) तथा पेशेवर भरतनाट्यम नृत्यांगना भी हैं। वे जर्मनी में विद्यार्थियों को कर्नाटिक संगीत और नृत्य की शिक्षा देती हैं, जिससे नई पीढ़ी का भारतीय कला-संस्कृति से जुड़ाव सशक्त हो रहा है। साथ ही वे यूरोप के विभिन्न सामुदायिक और सांस्कृतिक आयोजनों में सक्रिय रूप से प्रस्तुतियाँ देती रही हैं और “राइन तमिल एसोसिएशन” तथा “अरॊहणम्”—भारतीय शास्त्रीय कलाओं की संस्था, जर्मनी—की समिति सदस्य भी हैं।
वही दीप्ति एक इंटेपिन्योर है एवं भारत की संस्कृति से विशेष लगाव रखती है। रंगमंच से उन्हें गहरा लगाव है।
विगत वर्ष भी आपकी संस्था ने भरत मुनि के पंचम वेद पर नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में अपनी प्रस्तुति दी थी।
27 जनवरी से 20फरवरी तक दिल्ली में नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा द्वारा भारत रंग महोत्सव आयोजित किया गया। जिसके समापन समारोह मे हमारी प्रस्तुतियों का प्रदर्शन किया गया।
प्रस्तुति-
डॉ शिप्रा शिल्पी, वैश्विक हिंदीशाला संस्थान, जर्मनी एवं सृजनी ग्लोबल,यूरोप
