विराट साहित्य स्तम्भ पद्मश्री नरेंद्र कोहली जी की पुण्यतिथि पर ‘नरेंद्र कोहली स्मृति कार्यक्रम’ का सफल आयोजन सम्पन्न

दिनांक 17 अप्रैल 2026 को लक्ष्मीबाई महाविद्यालय (दिल्ली विश्वविद्यालय) में हिन्दी विभाग एवं वैश्विक हिन्दी परिवार द्वारा विराट साहित्य स्तम्भ पद्मश्री नरेंद्र कोहली जी की पुण्यतिथि पर ‘नरेंद्र कोहली स्मृति कार्यक्रम’ का सफल आयोजन सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में नरेंद्र कोहली जी की धर्मपत्नी प्रो. मधुरिमा कोहली जी एवं उनके सुपुत्र प्रो. कार्तिकेय कोहली जी की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम का शुभारम्भ द्वीप प्रज्जवलन के साथ किया गया। तत्पश्चात कोहली जी को श्रद्धांजलि अर्पित कर सभी वक्ताओं एवं आमंत्रित अतिथियों का सम्मान कर कार्यक्रम को संचालक प्रो. राजेश कुमार जी ने आगे बढ़ाया। कार्यक्रम में कुल 7 विशिष्ट वक्ताओं ने अपने कोहली जी से सम्बंधित संस्मरण एवं वक्तव्य श्रोताओं के समक्ष रखे। जिसे श्रोताओं ने अत्यंत ध्यानपूर्वक सुना एवं तालियों के साथ प्रशंसा भी जाहिर की। विशिष्ट वक्ताओं में सर्वप्रथम प्रो. लता शर्मा जी, प्राचार्या लक्ष्मीबाई कॉलेज (दिल्ली विश्वविद्यालय) ने NEP 2020 का जिक्र करते हुए उसमें अध्यात्म और जीवंत पात्रों के समायोजन से शिक्षण की बात कही, जिस प्रकार कोहली जी ने किया। तत्पश्चात प्रख्यात लेखक श्री तरुण विजय जी ने श्रोताओं के समक्ष अपने कोहली जी के साथ एक मित्र एवं सहयोगी के रूप में संस्मरण रखे। श्रोताओं ने उनके वक्तव्य का भरपूर आनंद लेते हुए तालियों से उनकी प्रशंसा की। इसके बाद प्रसिद्ध समीक्षक एवं विचारक श्री राजेश्वर वशिष्ठ जी ने कोहली जी के गद्य साहित्य का जिक्र करते हुए उनके उपन्यास अहिल्या पर श्रोताओं के समक्ष अपने विचार प्रस्तुत किए। कार्यक्रम में अगली वक्ता डॉ. नीलम वर्मा जी ने कोहली जी के साथ अपने संक्षिप्त संस्मरण श्रोताओं के साथ साझा किए। तत्पश्चात अगली वक्ता अदिति जी रहीं जिन्होंने कोहली जी के साथ हुए अपने कई संस्मरण श्रोताओं के समक्ष रखे। जिससे श्रोतागण भावविभोर हो उठे। तत्पश्चात कोहली जी पर शोध करे रहे दिल्ली विश्वविद्यालय के शोधार्थी श्री सुधीर जी ने कोहली जी की लोकप्रियता और साहित्य में उनके योगदान पर पाठकों के समक्ष अपने विचार रखे। इसके बाद प्रख्यात कवि श्री राजेश चेतन जी ने कोहली जी के साथ अपने संस्मरण श्रोताओं से साझा किए। जिसका ठहाकों एवं तालियों के साथ श्रोताओं ने ख़ूब आनंद लिया। तत्पश्चात् प्रो. रमा शर्मा जी,प्राचार्या,हंसराज महाविद्यालय,(दिल्ली विश्वविद्यालय) ने कोहली जी के साथ संस्मरण साझा करते हुए उनकी लेखनी तथा उनके जीवन संघर्ष से श्रोताओं को अवगत कराते हुए कहा “अगर आपको जीवन जीना है तो कोहली जी जैसा जीना।” प्रो. रमा जी को सुन सभी श्रोतागण आह्लादित हो गए। तत्पश्चात श्री प्रमोद शास्त्री जी ने कोहली जी कृत नाटक ‘अगस्त्य कथा’ के मंचन से सम्बंधित कुछ संस्मरण पाठकों के समक्ष रखे। इसके बाद अंतिम वक्ता के रूप में वैश्विक हिन्दी परिवार के अध्यक्ष श्री अनिल जोशी जी ने कोहली जी के साथ अपने संस्मरण श्रोताओं के साथ साझा करते हुए कोहली जी द्वारा रचित साहित्य पर विस्तार से अपने विचार रखे।अंत में श्रीमती राधिका जी ने कोहली जी के साथ अपने साहित्यिक अनुभव एवं संस्मरण श्रोताओं के समक्ष रखे। इस सफल आयोजन में लक्ष्मीबाई महाविद्यालय के हिन्दी विभाग प्रभारी डॉ. रजत शर्मा जी, कार्यक्रम के आयोजक वैश्विक हिन्दी परिवार के सदस्य श्री ऋषि कुमार शर्मा जी एवं श्री हर्षवर्धन आर्य जी के साथ लक्ष्मीबाई महाविद्यालय से डॉ. सुमित कुमार मीना जी, डॉ. रामजी लाल जी, डॉ. प्रेम प्रकाश मीणा जी की विशेष उपस्थिति रही।इस कार्यक्रम में 7 विशिष्ट वक्ताओं के साथ कुछ विशेष प्रवक्ताओं ने भी अपने विचार और संस्मरणों से श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया। इस सफल कार्यक्रम में गणमान्य अतिथियों सहित लगभग 70 छात्र-छात्राओं एवं शोधार्थियों की सम्मिलित उपस्थिति रही। कार्यक्रम का अंत श्री ऋषि कुमार शर्मा जी के कोहली जी पर संक्षिप्त वक्तव्य व धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ |
रिपोर्ट – प्रखर शर्मा
