चेतना इंडिया साहित्यिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्था (पंजी.) के तत्वावधान में “व्यंग्य साहित्य” गोष्ठी का भव्य आयोजन सम्पन्न

दिनांक 11.04.2026 को नई दिल्ली के रायसीना हिल्स के मध्य स्थित प्रतिष्ठित प्रेस क्लब आफ इंडिया के सभागार में चेतना इंडिया साहित्यिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्था (पंजी.) के तत्वावधान में “व्यंग्य साहित्य” गोष्ठी का भव्य आयोजन किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता का दायित्व सुविख्यात शीर्ष व्यंग्यकार एवं वरिष्ठ साहित्यकार सुभाष चन्दर ने निर्वहन किया। मंच पर गणमान्य विभूतियों की श्रेणी में वरिष्ठ साहित्यकार डॉ विवेक गौतम, वरिष्ठ व्यंग्यकार श्रवण कुमार उर्मलिया, वरिष्ठ साहित्यकार रिंकल शर्मा, वरिष्ठ साहित्यकार रणविजय राव तथा वरिष्ठ व्यंग्यकार सुनील जैन ‘राही’ विराजमान रहे। संचालन का दायित्व कुशल मीडियाकर्मी सिद्धार्थ सिंह के सशक्त हाथों में रहा।
कार्यक्रम का शुभारंभ मंचासीन गणमान्य विभूतियों को क्रमबद्ध तरीके से चेतना इंडिया संस्था की अध्यक्षा चंद्रिका शर्मा के कर-कमलों द्वारा अंगवस्त्र ओढ़ाकर एवं वशिष्ठ धर्म सेवा ट्रस्ट के सौजन्य से भेंट स्वरूप उपहार प्रदान करके सम्मानित किया गया।
तत्पश्चात्, संचालक द्वारा परिचयात्मक उदबोधनों के माध्यम से क्रमानुसार गणमान्य विभूतियों को अपने-अपने वक्तव्यों के लिए आमंत्रित किया गया।
जहां एक ओर, रिंकल शर्मा ने ‘जिज्जी का साहित्यिक सफर’ शीर्षक से अपनी श्रेष्ठ रचना के पाठ से श्रोताओं को भाव-विभोर किया। वहीं दूसरी ओर, रणविजय राव ने अपने बहुचर्चित व्यंग्य ‘होई है वही, जो राम रची राखा’ के अपने चिर-परिचित अंदाज में वाचन से सभागार में उपस्थित विद्वतजनों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
अगले क्रम में सुनील जैन राही ने ‘रोज़ा – झम्मन मियां’ शीर्षक से सृजित अपने श्रेष्ठतम व्यंग्य के पाठ से श्रोताओं में इस पावन पर्व से जुड़ी भावनाओं को संचारित किया। वहीं डॉ विवेक गौतम ने व्यंग्य के आलेख से हटकर व्यंग्य पूरित कविताओं – ‘खरीदी हुई नींद’, ‘जब दीवारें बिकती हैं’ तथा ‘दुकान में सामान नहीं है’ तो क्या करें’ जैसी सामाजिक परिप्रेक्ष्य पर कटाक्ष और सटीक अभिव्यक्ति के माध्यम से छाप छोड़ती श्रेष्ठतम रचनाओं के काव्यपाठ से उपस्थित प्रबुद्धजनों को आल्हादित करते हुए वाह-वाही के उदघोषों से वातावरण को गुंजायमान करने पर विवश कर दिया।
काव्य की भाव-भंगिमाओं को आगे बढ़ाते हुए सुशील सरित ने अपनी ‘सड़कें’ और ‘लोकडाउन का दर्द’ शीर्षक की श्रेष्ठ रचनाओं के काव्यपाठ से श्रोताओं के संवेदनशील मनोभावों को झकझोरते हुए उनके भीतर मन को सिंचित किया, तो अगले चरण में हरीश कुमार सिंह भदौरिया ने ‘अतुल्य शक्ति सोच की हवा निकल गई’ शीर्षक की समसामयिक अभिव्यक्ति परिपूर्ण काव्य रचना के काव्यपाठ से श्रोताओं को लाभान्वित किया। इसी क्रम को गति प्रदान करते हुए दुर्ग विजय सिंह दीप ने अपने श्रेष्ठतम गीत ‘आओ मिलकर बेचें देश’ तथा ‘हमें क्षमादान दो मां’ के काव्यपाठ के माध्यम से सभागार में उपस्थित जनसमुदाय को भाव-विभोर कर दिया।
श्रवण कुमार उर्मलिया ने वातावरण को पुनः जहां एक ओर, अपने व्यंग्य ‘ऐ मेरी भूतपूर्व प्रेमिका’ के वाचन से विद्वतजनों को मंत्रमुग्ध करते हुए गड़गड़ाती करतल-ध्वनि से दात देने को विवश कर दिया। वहीं दूसरी ओर, उन्होंने अपनी गज़ल ‘जब तलक मैंने तुझे देखा नहीं था’ के पाठ से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध करके वातावरण को गुंजायमान कर दिया।
पत्रकार मधुलिका ने मानवीय संवेदनाओं और समसामयिक विषयों पर आधारित अपनी कविताओं ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’, ‘किसलिए यह जंग है’ तथा ‘अंतरिक्ष, विज्ञान और चंदा मामा’ पर केंद्रित संजोए मनोभावों से ओत-प्रोत अभिव्यक्ति परिपूर्ण काव्यपाठ के द्वारा श्रोताओं को आनंदित किया।
अपने अध्यक्षीय वक्तव्य के उपस्थित हुए सुभाष चन्दर ने अवगत कराया कि वह आज अपने व्यंग्य का पाठ नहीं करेंगे, अपितु गंभीर अभिव्यक्तियों से परिपूर्ण तीन खंडों में विभक्त एक संवेदनशील आलेख ‘बकरा भक्त नहीं है – मंदिर में काली मां की मूर्ति और बकरा बलि की तैयारी है’, ‘गाय हमारी माता है और इंजेक्शन लगाना’ तथा ‘खरगोश रोता क्यों है?’ का प्रस्तुतिकरण अपनी संवेदनशील भावनाओं के अनुरूप जनसमुदाय के समक्ष प्रस्तुत किया, जिसके अंतिम पड़ाव पर जहां उन्होंने सभागार में उपस्थित विद्वतजनों को भीतर तक झकझोर दिया, स्वयं की आंखें भी संवेदनशील भावनाओं के अश्रुओं से छलछला उठी थी।
श्रोता-दीर्घा में विराजित गणमान्य विभूतियों में देश के विभिन्न शहरों और क्षेत्रों से संबंधित
समापन से पूर्व चंद्रिका शर्मा द्वारा देशभर के विभिन्न शहरों और क्षेत्रों से सभागार में पधारकर उपस्थित रहे सभी विद्वतजनों, प्रबुद्धजनों एवं आगंतुकों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए धन्यवाद और आभार ज्ञापित करने के पश्चात् यह भव्य आयोजन सम्पन्न हुआ।
इस अवसर पर मेरे द्वारा लिए गए कुछ चित्र एवं वीडियो आप सभी के अवलोकनार्थ यहां प्रस्तुत हैं।
रिपोर्ट – कुमार सुबोध
